Jeera Price Hike 2025: टमाटर के बाद जीरा भी किचन का बजट बिगाड़ेगा! कीमतों में 10% उछाल, आगे कितना और महंगा होगा?
Jeera Price Hike – देश में रोजमर्रा की जरूरतों के दाम पहले ही लोगों की जेब पर भारी पड़ रहे हैं, और अब टमाटर के बाद जीरा (Cumin) भी रसोई का बजट असंतुलित करने लगा है। पिछले कुछ दिनों में जीरे की कीमतों में लगभग 10% की तेज़ बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिसने आम घरों से लेकर FMCG इंडस्ट्री तक चिंता बढ़ा दी है।
Jeera Rate Today: कीमतें कहां पहुंच गईं
वर्तमान में जीरा 21,450 रुपये प्रति क्विंटल (लगभग ₹214 प्रति किलो) से ऊपर ट्रेंड कर रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 1–2 महीनों में जीरा 20,600–20,200 के दायरे में हल्की गिरावट दिखा सकता है, लेकिन ऊपरी स्तर पर 21,800–22,100 रुपये तक पहुंचने की अधिक संभावना है।
यदि किसानों द्वारा बुआई में कमी रही, तो आगे दाम 23,800–25,200 रुपये प्रति क्विंटल तक जा सकते हैं।
बुआई में देरी से गहराया संकट
देश के दो प्रमुख जीरा उत्पादक राज्य—गुजरात और राजस्थान—इस बार मौसम की गड़बड़ियों से बुरी तरह प्रभावित हुए।
- खेतों में नमी ज्यादा रहने से मिट्टी देर से सूखी
- किसान समय पर बुआई शुरू नहीं कर पाए
- उत्पादन का अनुमान इस बार काफी कम
गुजरात में बुआई पिछड़ने के बाद अब केवल 40,012 हेक्टेयर तक पहुंच पाई है, जबकि राजस्थान में स्थिति इससे भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण बताई जा रही है।
Unjha Mandi में कम आवक से भाव और तेज़
भारत में उंझा मंडी जीरा ट्रेडिंग का प्रमुख केंद्र माना जाता है, लेकिन इस सीजन में आवक बहुत कम है।
उत्पादन के शुरुआती अनुमान बताते हैं कि देश का जीरा उत्पादन 1.10 करोड़ बोरी से घटकर 90–92 लाख बोरी ही रह सकता है, यानी करीब 20 लाख बोरी की गिरावट। सप्लाई की यह कमी कीमतों को तेजी से ऊपर धकेल रही है।
ग्लोबल साइड पर दबाव
दुनियाभर में जीरे की उपलब्धता पहले ही सीमित है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौसम में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव ने निर्यात योग्य जीरे की उपलब्धता कम कर दी है।
भारत का जीरा निर्यात अप्रैल-अगस्त अवधि में लगभग 17% गिर गया, हालांकि अगस्त में हल्की रिकवरी देखने को मिली।
Wedding Season बना Super Demand Booster
नवंबर से फरवरी के बीच भारत में शादी का सबसे बड़ा सीजन शुरू होता है और इस बार करीब 46 लाख शादियां होने का अनुमान है।
- लगभग 6.5 लाख करोड़ रुपये का Wedding Market
- कैटरर्स और होटल इंडस्ट्री मसालों की आबंटन में 30–40% तक अधिक खरीद
- जीरा, हल्दी, लाल मिर्च, गरम मसाला और मिक्स मसाले की डिमांड में भारी उछाल
यही अतिरिक्त मांग कीमतों को और सहारा दे रही है।
आम परिवारों पर क्या असर?
- रसोई का मासिक खर्च बढ़ेगा
- मिक्स मसालों और FMCG पैकेटेड मसालों की कीमतें बढ़ सकती हैं
- शादी और होटल इंडस्ट्री के बिल बढ़ सकते हैं
- छोटी-मध्यम खाद्य व्यवसायों की लागत में तेज़ इजाफ़ा संभव
बुआई में देरी, कम उत्पादन, वैश्विक सप्लाई संकट, उंझा मंडी में कम आवक और शादी सीजन की भारी मांग—इन सभी कारणों ने जीरे की कीमतों को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ महीनों तक जीरा महंगा रहेगा और कीमतों में नरमी की संभावना काफी कम है।