लोकसभा में PM मोदी बोले: ‘वंदे मातरम्’ ने जगाई आजादी की लौ, अंग्रेजों की नींद उड़ाने वाला मंत्र बना
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विशेष चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा और राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना का शक्तिशाली प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् की गूंज ने न सिर्फ अंग्रेज हुकूमत को विचलित किया, बल्कि पूरे देश में आजादी के संकल्प को मजबूत किया।
प्रधानमंत्री ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। अंग्रेज शासन पर इसके प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने इस गीत पर प्रतिबंध लगाकर इसे गाने को अपराध घोषित कर दिया था। इसके बावजूद देशभर में लोग दमन झेलते हुए भी गर्व के साथ वंदे मातरम् का जयघोष करते रहे।
उन्होंने कहा कि जब इस गीत का शताब्दी वर्ष मनाया जाना था, उस समय देश आपातकाल के अंधकारमय दौर में था। जिस गीत ने आजादी की मशाल जगाई, उसकी 100वीं वर्षगांठ पर देश को मूल अधिकारों से वंचित कर दिया गया था। प्रधानमंत्री ने इस ऐतिहासिक विडंबना को भी विशेष रूप से रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वंदे मातरम् पर चर्चा किसी पक्ष या विपक्ष का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र की सामूहिक भावना का पर्व है। उन्होंने बताया कि आजादी की लड़ाई में यह गीत सिर्फ अंग्रेजों को परास्त करने का मंत्र नहीं था, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर और भविष्य के स्वप्न का भी प्रतीक था।
उन्होंने बताया कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1882 में ‘आनंदमठ’ उपन्यास की रचना के दौरान वंदे मातरम् को स्थान दिया, जो आगे चलकर स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरक गीत बन गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस गीत ने देश की सांस्कृतिक आत्मा, सामाजिक भावनाओं और आजादी की आकांक्षा को एक सूत्र में पिरो दिया।
प्रधानमंत्री ने 1905 के बंगाल विभाजन का उल्लेख करते हुए कहा कि अंग्रेजों ने ‘बांटो और राज करो’ की नीति के तहत बंगाल को बांटने का प्रयास किया, क्योंकि बंगाल की बौद्धिक चेतना पूरे देश का मार्गदर्शन कर रही थी। उन्होंने कहा कि विभाजन के विरोध में वंदे मातरम् एक चट्टान की तरह खड़ा रहा और बंगाल की गलियों में इसकी गूंज पूरे भारत में एकता और प्रतिरोध का प्रतीक बन गई।
उन्होंने यह भी बताया कि अंग्रेजों ने वंदे मातरम् बोलने पर सजा तक का प्रावधान कर दिया था, फिर भी छोटे-छोटे बच्चे प्रभात फेरियों के दौरान यह गीत गाते हुए अत्याचार झेलते रहे। अनेक वीर स्वतंत्रता सेनानी वंदे मातरम् के जयघोष के साथ फांसी पर चढ़ गए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों की सांस्कृतिक ऊर्जा और स्वतंत्रता के दिव्य संकल्प का आधुनिक रूप है। यह गीत आज भी देशवासियों में वही स्वाभिमान, वही प्रेरणा और वही राष्ट्रभाव भरता है, जो स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भरता था।
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