पंचांग 3 जनवरी 2026: पौष पूर्णिमा, शुभ-अशुभ मुहूर्त, राहुकाल
पंचांग 3 जनवरी 2026: आज शनिवार के दिन पौष शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। यह दिन धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। आज माघ स्नान का आरंभ हो रहा है और पूर्णिमा व्रत तथा सत्य व्रत का पुण्य फल प्राप्त होता है।
संवत्सर एवं काल गणना
आज का विक्रम संवत 2082 है और संवत्सर कालयुक्त है। शक संवत 1947 चल रहा है, जिसका नाम विश्वावसु संवत्सर है। पूर्णिमांत और अमांत—दोनों ही गणनाओं में मास पौष है।
तिथि विवरण
शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि 2 जनवरी 2026 को शाम 06:53 बजे से प्रारंभ होकर 3 जनवरी 2026 को दोपहर 03:32 बजे तक रहेगी। इसके बाद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि आरंभ होगी, जो 4 जनवरी 2026 को दोपहर 12:30 बजे तक रहेगी।
नक्षत्र और ग्रह स्थिति
आज आर्द्रा नक्षत्र शाम 05:27 बजे तक रहेगा, जिसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र प्रारंभ होगा। चंद्रमा पूरे दिन और रात मिथुन राशि में संचार करेगा। सूर्य आज धनु राशि में स्थित है।
योग और करण
ब्रह्म योग प्रातः 09:05 बजे तक रहेगा, इसके बाद इन्द्र योग आरंभ होकर अगले दिन प्रातः 05:15 बजे तक रहेगा। करण की बात करें तो बव करण दोपहर 03:32 बजे तक, बालव करण रात 01:58 बजे तक और इसके बाद कौलव करण रहेगा।
शुभ मुहूर्त
आज अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:10 बजे से 12:52 बजे तक रहेगा। अमृत काल प्रातः 08:32 बजे से 09:57 बजे तक है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:36 बजे से 06:24 बजे तक रहेगा, जो साधना और पूजा के लिए उत्तम माना जाता है।
अशुभ काल
राहुकाल प्रातः 09:52 बजे से 11:11 बजे तक रहेगा। यम गण्ड दोपहर 01:50 बजे से 03:10 बजे तक, कुलिक काल सुबह 07:12 बजे से 08:32 बजे तक रहेगा। दुर्मुहूर्त सुबह 08:37 बजे से 09:20 बजे तक और वर्ज्यम् काल 04:19 बजे से 05:46 बजे तक रहेगा।
सूर्य और चंद्रमा का समय
आज सूर्योदय सुबह 07:12 बजे और सूर्यास्त शाम 05:49 बजे होगा। चंद्रोदय शाम 05:49 बजे तथा चंद्रास्त अगले दिन सुबह 08:00 बजे होगा।
त्यौहार और व्रत
आज पौष पूर्णिमा के साथ पूर्णिमा व्रत रखा जाएगा। माघ स्नान का आज से शुभारंभ हो रहा है। इसके अतिरिक्त सत्य व्रत का भी विशेष महत्व है। धार्मिक कार्यों, दान और स्नान के लिए यह दिन अत्यंत फलदायी माना गया है।
आनंदादि और विशेष योग
आज आनंदादि योग में मुद्गर योग शाम 05:27 बजे तक रहेगा, इसके बाद छत्र योग बनेगा। इसके साथ ही आगामी दिन पुनर्वसु नक्षत्र में त्रिपुष्कर योग का निर्माण होगा, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
ऋतु और पंचांग निष्कर्ष
वैदिक ऋतु हेमंत और द्रिक ऋतु शिशिर चल रही है। पौष पूर्णिमा का यह दिन स्नान, दान, जप और व्रत के लिए श्रेष्ठ है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए अनुकूल मानी जा रही है।