छत्तीसगढ़ में ऑयल पाम खेती को बड़ा बढ़ावा: किसानों को मिलेगा 2 लाख रुपये तक का अनुदान, 30 साल तक स्थायी आय का अवसर
महासमुंद. देश को खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य के साथ नेशनल मिशन ऑन एडीबल ऑयल (NMEO) के अंतर्गत ऑयल पाम की खेती को तेजी से प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ शासन ने किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए केंद्र सरकार की सब्सिडी के अतिरिक्त 69,620 रुपये प्रति हेक्टेयर का टॉप-अप अनुदान देने की घोषणा की है।
इस योजना के तहत किसानों को अब कुल 1.99 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक की आर्थिक सहायता उपलब्ध होगी, जिससे ऑयल पाम जैसी दीर्घकालीन और मुनाफे वाली फसल को अपनाना और भी आसान हो गया है।
उद्यानिकी विभाग की सहायक संचालक श्रीमती पायल साव के अनुसार, जिले में ऑयल पाम रोपण को बढ़ावा देने के लिए नई अनुदान नीति लागू की गई है। ऑयल पाम एक ऐसी फसल है, जिसमें रोपण के लगभग चौथे वर्ष से उत्पादन शुरू हो जाता है और लगातार 30 वर्षों तक नियमित आय प्राप्त की जा सकती है।
तेल उत्पादन के मामले में ऑयल पाम पारंपरिक तिलहन फसलों से कहीं आगे है। इसकी उत्पादन क्षमता अन्य फसलों की तुलना में चार से छह गुना अधिक होती है। किसानों की शुरुआती लागत कम करने के उद्देश्य से राज्य शासन ने कई घटकों में सहायता राशि बढ़ाई है।
नई व्यवस्था के तहत किसानों को—
- रखरखाव मद में 6,750 रुपये
- अंतरवर्तीय फसलों के लिए 10,250 रुपये
- ड्रिप सिंचाई हेतु 22,765 रुपये
- फेंसिंग (पौधों को पशुओं से सुरक्षा) के लिए 54,485 रुपये प्रति हेक्टेयर
की सहायता प्रदान की जा रही है।
ऑयल पाम की खेती में रोगों का प्रकोप अपेक्षाकृत कम होता है और यह कम श्रम में अधिक लाभ देने वाली फसल मानी जाती है। शुरुआती 3–4 वर्षों की गेस्टेशन अवधि के बाद इसकी देखरेख आसान हो जाती है, जिससे किसानों को लंबे समय तक स्थायी और भरोसेमंद आमदनी मिलती है।
केंद्र सरकार के 1.30 लाख रुपये के अनुदान के साथ राज्य सरकार द्वारा दी जा रही अतिरिक्त सहायता किसानों के लिए इस योजना को और अधिक आकर्षक बनाती है। इच्छुक किसान अपने नजदीकी उद्यानिकी विभाग कार्यालय से संपर्क कर पंजीयन करा सकते हैं और इस लाभकारी योजना का फायदा उठा सकते हैं।