छत्तीसगढ़ में डिजिटल धान खरीदी बनी किसानों की समृद्धि का आधार, टोकन सिस्टम से बदली खेती की तस्वीर
रायपुर. छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था अब केवल फसल विक्रय का माध्यम नहीं रही, बल्कि यह किसानों की आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रभावशाली पहल बन चुकी है। राज्य सरकार द्वारा निर्धारित उच्चतम समर्थन मूल्य और आधुनिक डिजिटल प्रणाली ने धान खरीदी को पूरी तरह पारदर्शी, सरल और किसान हितैषी बना दिया है।
सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड स्थित रामपुर धान उपार्जन केंद्र में यह बदलाव स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। ग्राम पंचायत इंदरपुर के लघु किसान महेंद्र यादव ने डिजिटल टोकन व्यवस्था के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके पास कुल 120 क्विंटल धान का उत्पादन है। उन्होंने “किसान तुहंर टोकन” मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे ही 60 क्विंटल धान के लिए डिजिटल टोकन प्राप्त किया।
महेंद्र यादव के अनुसार, अब समिति कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे समय, श्रम और अतिरिक्त खर्च की बचत हो रही है, वहीं प्रक्रिया भी पहले से कहीं अधिक सहज हो गई है। उपार्जन केंद्र पहुंचने पर नमी परीक्षण, बारदाना वितरण और तौल जैसी सभी प्रक्रियाएं तय समय में पूरी की गईं, जिससे उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी किए जाने से किसानों को मजबूत आर्थिक संबल मिला है। बीते वर्ष धान विक्रय से प्राप्त आय से उन्होंने मोटरसाइकिल खरीदी थी, जबकि वर्तमान में वे खेती का दायरा बढ़ाते हुए गेहूं, दलहन, तिलहन और सब्जियों की खेती भी कर रहे हैं।
महेंद्र यादव का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था और उचित समर्थन मूल्य ने खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया है। उन्होंने धान खरीदी की पारदर्शी और सुव्यवस्थित प्रणाली के लिए शासन और प्रशासन के प्रति संतोष और आभार व्यक्त किया।