नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने लोकसभा में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किए।
इन विधेयकों के पेश होते ही विपक्षी सांसद सदन में हंगामा करने लगे। इसी बीच गृहमंत्री अमित शाह और कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल के बीच नैतिकता पर बहस होने लगी।
मंत्री अमित शाह और सांसद वेणुगोपाल में तीखी बहस
गंभीर आरोपों में गिरफ्तार और 30 दिनों से ज्यादा समय तक हिरासत में रखे गए निर्वाचित नेताओं को हटाने संबंधी विधेयक पर विपक्ष और सरकार के बीच लोकसभा (Loksabha) में तीखी बहस के दौरान, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल और गृह मंत्री अमित शाह के बीच इस कानून की नैतिकता को लेकर तीखी बहस भी हुई।
वेणुगोपाल ने उठाए सवाल
सांसद वेणुगोपाल ने कहा, “यह विधेयक देश की संघीय व्यवस्था को तहस-नहस करने वाला है, इसका उद्देश्य संविधान के मूल सिद्धांतों को तहस-नहस करना है। बीजेपी के नेता कह रहे हैं कि यह विधेयक राजनीति में नैतिकता लाने वाला है। क्या मैं गृह मंत्री से सवाल पूछ सकता हूं? जब वे गुजरात के गृह मंत्री थे, तब उन्हें गिरफ्तार किया गया था। क्या उन्होंने उस वक्त नैतिकता का पालन किया था?”
अमित शाह ने यह जवाब दिया
सांसद वेणुगोपाल के सवाल पर गृह मंत्री शाह ने कहा, “मैं सच्चाई बताना चाहता हूं। मेरे खिलाफ फर्जी आरोप लगाए गए, लेकिन इसके बाद भी मैंने नैतिकता का पालन किया और न सिर्फ इस्तीफा दिया, बल्कि सभी आरोपों से मुक्त होने तक कोई भी संवैधानिक पद स्वीकार नहीं किया। वे हमें नैतिकता सिखाने की कोशिश कर रहे हैं? मैंने इस्तीफा दे दिया था। मैं चाहता हूं कि नैतिकता बढ़े। हम इतने बेशर्म नहीं हो सकते कि हम पर आरोप लगे और संवैधानिक पदों पर बने रहें। मैंने गिरफ्तारी से पहले ही इस्तीफा दे दिया था।”
लोकसभा में पेश किए गए तीन विधेयक
इससे पूर्व, गृहमंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने लोकसभा में तीन विधेयक पेश किए थे। संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025, और जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025, जिसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री और मंत्री, जिन्हें कम से कम पांच साल की जेल की सजा वाले अपराधों के लिए गिरफ्तार किया जाता है और लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रखा जाता है, उन्हें 31 दिनों के अंदर इस्तीफा देना होगा ऐसा नहीं करने पर वो स्वत: पदमुक्त हो जाएंगे।
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