बस्तर के स्कूलों में डिजिटल हाजिरी की नई व्यवस्था, विद्या समीक्षा केंद्र ऐप से अब अनिवार्य होगी उपस्थिति
जगदलपुर. बस्तर जिले की सभी शासकीय शिक्षण संस्थाओं में अब शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल कर दी गई है। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी निर्देश के अनुसार अब उपस्थिति केवल राज्य शासन द्वारा विकसित विद्या समीक्षा केंद्र मोबाइल ऐप के माध्यम से ही दर्ज की जाएगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य स्कूलों की दैनिक उपस्थिति को पारदर्शी बनाना और उसे केंद्रीय स्तर पर नियमित रूप से मॉनिटर करना है।
केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप भेजा जाएगा डेटा
नई प्रणाली के तहत प्रतिदिन की उपस्थिति का पूरा डेटा शिक्षा मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय विद्या समीक्षा केंद्र तक भेजा जाएगा। यहां इस जानकारी की नियमित समीक्षा की जाएगी, जिससे स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था, शिक्षकों की मौजूदगी और विद्यार्थियों की सहभागिता पर सीधी निगरानी संभव हो सकेगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में सुधार आएगा और लापरवाही पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा।
GPS आधारित पंजीकरण बना सबसे अहम शर्त
शिक्षा विभाग ने इस व्यवस्था को लागू करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी निर्देश भी जारी किया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षकों को विद्या समीक्षा केंद्र ऐप को विद्यालय परिसर में पहुंचने के बाद ही अपने मोबाइल फोन में इंस्टॉल और पंजीकृत करना होगा। पंजीकरण के दौरान ऐप जीपीएस तकनीक के माध्यम से विद्यालय की लोकेशन को सेव करता है, जो भविष्य में उपस्थिति सत्यापन का आधार बनेगी।
स्कूल से बाहर रजिस्ट्रेशन करने पर नहीं लगेगी हाजिरी
यदि कोई शिक्षक विद्यालय परिसर से बाहर रहते हुए या घर से ऐप को इंस्टॉल या रजिस्टर करने का प्रयास करता है, तो सर्वर में दर्ज विद्यालय की लोकेशन और शिक्षक की वर्तमान लोकेशन का मिलान नहीं हो पाएगा। ऐसी स्थिति में लोकेशन मैच न होने के कारण ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकेगी और शिक्षक की हाजिरी अमान्य मानी जाएगी। इसी वजह से सभी शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे विद्यालय में उपस्थित होकर ही ऐप इंस्टॉलेशन और पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करें।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम
विद्या समीक्षा केंद्र ऐप के माध्यम से जीपीएस आधारित उपस्थिति प्रणाली को शिक्षा विभाग ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। इससे न केवल वास्तविक उपस्थिति दर्ज होगी बल्कि भविष्य में शैक्षणिक योजनाओं और नीतियों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में भी मदद मिलेगी।