पंचांग 29 दिसंबर 2025: पौष शुक्ल नवमी–दशमी, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और आज का संपूर्ण पंचांग

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पंचांग 29 दिसंबर 2025: आज सोमवार, 29 दिसंबर 2025 को पौष मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है। विक्रम संवत 2082 (कालयुक्त) और शक संवत 1947 (विश्वावसु) चल रहा है। यह दिन धार्मिक कार्यों, व्रत, पूजा-पाठ और मुहूर्त विचार के लिए विशेष महत्व रखता है।

आज की तिथि और पक्ष

आज शुक्ल पक्ष नवमी तिथि प्रातः 10:12 बजे तक रहेगी, इसके बाद शुक्ल पक्ष दशमी तिथि आरंभ होगी जो अगले दिन सुबह 07:51 बजे तक रहेगी। पौष मास पूर्णिमांत और अमांत, दोनों गणनाओं में लागू है।

आज का नक्षत्र और चंद्र राशि

आज रेवती नक्षत्र सुबह 07:40 बजे तक रहेगा, इसके बाद अश्विनी नक्षत्र प्रारंभ होगा जो अगले दिन सुबह 06:04 बजे तक रहेगा। चंद्रमा सुबह 07:40 बजे तक मीन राशि में रहेंगे, इसके बाद मेष राशि में प्रवेश करेंगे। रेवती और अश्विनी दोनों ही गण्डमूल नक्षत्र माने जाते हैं, इसलिए जन्म या विशेष संस्कार में सावधानी रखी जाती है।

आज के योग और करण

आज परिघ योग सुबह 07:36 बजे तक रहेगा, इसके बाद शिव योग शुरू होगा जो अगले दिन तड़के 04:31 बजे तक रहेगा। करण की बात करें तो कौलव करण सुबह 10:12 बजे तक, फिर तैतिल करण रात 09:06 बजे तक और उसके बाद गर करण रहेगा।

सूर्य और चंद्रमा का समय

आज सूर्य धनु राशि में स्थित है। सूर्योदय सुबह 07:11 बजे और सूर्यास्त शाम 05:46 बजे होगा। चंद्रोदय दोपहर 01:07 बजे तथा चंद्रास्त अगले दिन तड़के 02:29 बजे होगा।

आज के अशुभ काल

राहुकाल सुबह 08:30 बजे से 09:50 बजे तक रहेगा। यम गण्ड 11:09 बजे से 12:28 बजे तक और कुलिक काल 01:48 बजे से 03:07 बजे तक रहेगा। दुर्मुहूर्त दोपहर 12:49 से 01:32 बजे तक और फिर 02:56 से 03:39 बजे तक रहेगा। वर्ज्यम् काल रात 02:20 से 03:50 बजे तक माना गया है।

आज के शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:07 से 12:49 बजे तक रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए उत्तम माना जाता है। अमृत काल रात 11:21 बजे से 12:50 बजे तक रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:35 से 06:23 बजे तक रहेगा, जो साधना और ध्यान के लिए श्रेष्ठ समय है।

आनन्दादि और अन्य विशेष योग

आज आनन्दादि योग में सुबह 07:40 बजे तक मातंग योग, सुबह 06:04 बजे तक राक्षस योग और उसके बाद चर योग प्रभावी रहेगा। वैदिक ऋतु हेमंत और द्रिक ऋतु शिशिर मानी जा रही है।

29 दिसंबर 2025 का पंचांग धार्मिक कार्यों, व्रत और सामान्य दिनचर्या के लिए महत्वपूर्ण है। शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त और ब्रह्म मुहूर्त का विशेष ध्यान रखें तथा राहुकाल और दुर्मुहूर्त में नए कार्यों से बचें।

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