पंचांग 31 दिसंबर 2025: आज का शुभ-अशुभ मुहूर्त, तिथि, नक्षत्र, राहुकाल और योग

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पंचांग 31 दिसंबर 2025: बुधवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस दिन पौष माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि रहेगी। विक्रम संवत 2082 (कालयुक्त), शक संवत 1947 (विश्वावसु) के अनुसार आज का पंचांग व्रत, पूजा और मांगलिक कार्यों की योजना बनाने में सहायक है।

तिथि का महत्व

आज शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि सुबह 05:00 बजे से प्रारंभ होकर 1 जनवरी 2026 को 01:48 बजे तक रहेगी। इसके बाद शुक्ल त्रयोदशी तिथि का आरंभ होगा जो रात्रि 10:22 बजे तक प्रभावी रहेगी। द्वादशी तिथि विष्णु पूजन, व्रत और दान के लिए शुभ मानी जाती है।

नक्षत्र और चंद्र राशि

इस दिन कृत्तिका नक्षत्र सुबह 03:58 बजे से रात 01:30 बजे तक रहेगा, इसके बाद रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ होगा। चंद्रमा सुबह 09:23 बजे तक मेष राशि में और इसके बाद वृषभ राशि में गोचर करेगा, जिससे स्थिरता और आर्थिक मामलों में सकारात्मकता देखी जाती है।

योग और करण

31 दिसंबर 2025 को साध्य योग रात 09:13 बजे तक रहेगा, इसके बाद शुभ योग का संयोग बनेगा। करण की बात करें तो बव करण दोपहर 03:27 बजे तक, फिर बालव करण रात 01:48 बजे तक और उसके बाद कौलव करण रहेगा। ये योग और करण कार्यों की सफलता में सहायक माने जाते हैं।

सूर्य और चंद्र का समय

आज सूर्य धनु राशि में स्थित रहेगा। सूर्योदय सुबह 07:12 बजे और सूर्यास्त शाम 05:47 बजे होगा। चंद्रोदय दोपहर 02:38 बजे और चंद्रास्त अगले दिन सुबह 04:46 बजे होगा।

शुभ और अशुभ काल

अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12:29 से 01:49 बजे तक रहेगा। यम गंड सुबह 08:31 से 09:50 बजे तक और गुलिक काल 11:10 से 12:29 बजे तक रहेगा। दुर्मुहूर्त दोपहर 12:08 से 12:51 बजे तक रहेगा। वहीं शुभ समय में ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:36 से 06:24 बजे तक और अमृत काल रात 11:19 से 12:45 बजे तक रहेगा।

विशेष शुभ योग

आज और अगले दिन सर्वार्थसिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जो रोहिणी नक्षत्र और बुधवार के संयोग से अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा त्रिपुष्कर योग का संयोग भी प्रातः काल में बन रहा है, जो नए कार्यों की शुरुआत के लिए उत्तम है।

चंद्र मास और ऋतु

आज अमांत और पूर्णिमांत दोनों के अनुसार पौष मास है। राष्ट्रीय शक संवत कैलेंडर के अनुसार पौष मास की 10वीं तिथि है। वैदिक ऋतु हेमंत और द्रिक ऋतु शिशिर मानी जा रही है, जो ठंड और स्थिरता का संकेत देती है।

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