आज का पंचांग 23 जनवरी 2026: बसंत पंचमी पर बन रहे शुभ योग, जानें तिथि, नक्षत्र, राहुकाल और शुभ मुहूर्त
आज का पंचांग 23 जनवरी 2026: आज शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है। आज बसंत पंचमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है, जो विद्या, संगीत और ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।
संवत और काल गणना
आज का विक्रम संवत 2082 (कालयुक्त), शक संवत 1947 (विश्वावसु) है। पूर्णिमांत और अमांत दोनों ही मान्यताओं के अनुसार मास माघ है। वैदिक और द्रिक ऋतु शिशिर चल रही है।
तिथि का विवरण
शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि 23 जनवरी को प्रातः 02:28 बजे से प्रारंभ होकर 24 जनवरी को 01:46 बजे तक रहेगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि का आरंभ होगा।
नक्षत्र और योग
आज पूर्वभाद्रपदा नक्षत्र 02:32 PM तक रहेगा, इसके पश्चात उत्तरभाद्रपदा नक्षत्र लगेगा। योग की बात करें तो परिघ योग 03:58 PM तक रहेगा, जिसके बाद शिव योग बनेगा, जो कई शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
करण का महत्व
आज बव करण 02:10 PM तक, इसके बाद बालव करण 01:46 AM तक रहेगा। रात्रि में कौलव करण का आरंभ होगा।
ग्रहों की स्थिति और राशि परिवर्तन
आज चंद्रमा सुबह 08:33 AM तक कुंभ राशि में रहेंगे, इसके बाद मीन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य वर्तमान में मकर राशि में स्थित है।
सूर्योदय और चंद्रमा का समय
आज सूर्योदय 07:13 AM पर और सूर्यास्त 06:03 PM पर होगा। चंद्रोदय 09:57 AM तथा चंद्रास्त 10:22 PM पर रहेगा।
शुभ मुहूर्त आज के दिन
आज अभिजीत मुहूर्त 12:16 PM से 01:00 PM तक रहेगा। अमृत काल सुबह 06:59 AM से 08:35 AM तक और ब्रह्म मुहूर्त 05:37 AM से 06:25 AM तक रहेगा, जो पूजा-पाठ और नए कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
अशुभ काल से रहें सावधान
आज राहुकाल 11:17 AM से 12:38 PM तक रहेगा। यम गण्ड 03:21 PM से 04:42 PM तक, कुलिक काल 08:34 AM से 09:56 AM तक रहेगा। दुर्मुहूर्त 09:23 AM से 10:06 AM और 01:00 PM से 01:43 PM तक है। वर्ज्यम काल 12:01 AM से 01:36 AM तक रहेगा।
त्यौहार और व्रत
आज बसंत पंचमी का पावन पर्व है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा, विद्यारंभ, पीले वस्त्र धारण और शुभ कार्यों की परंपरा है। विद्यार्थियों और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए यह दिन विशेष फलदायी माना जाता है।
आनंदादि योग
आज आनंदादि योग के अनुसार 02:32 PM तक ध्वांक्ष योग रहेगा, इसके बाद ध्वजा (केतु) योग का प्रभाव रहेगा।