Tomato Price Hike: 15 दिन में दाम 50% तक उछले, सप्लाई संकट से कई शहरों में 80 रुपये किलो तक पहुंची कीमतें
Tomato Price Hike: नई दिल्ली. देशभर में एक बार फिर लाल टमाटर की महंगाई ने रसोई का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। पिछले लगभग 15 दिनों में टमाटर के दामों में 50% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि कुछ शहरों में कीमतें दोगुनी तक पहुंच चुकी हैं।
तेज बारिश और फसल खराब होने के कारण सप्लाई में आई भारी कमी इस अचानक बढ़े दामों की प्रमुख वजह बताई जा रही है।
खुदरा कीमतों में 27% से 100% तक की बढ़ोतरी
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने में टमाटर की खुदरा कीमतों में 25% से लेकर 100% तक की बढ़ोतरी हुई है।
19 नवंबर को पूरे देश में औसत रिटेल कीमत 46 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई, जबकि एक माह पहले यह 36 रुपये प्रति किलो थी। यानी औसत कीमतों में 27% का उछाल।
किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा असर
आंकड़ों के मुताबिक, चंडीगढ़ में टमाटर 112% तक महंगा हो गया है।
इसके अलावा आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में भी 40% से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कई शहरों में 80 रुपये किलो तक पहुंचा भाव
बाजारों में अच्छी क्वालिटी वाला टमाटर 60 से 80 रुपये प्रति किलो में बिक रहा है।
थोक व्यापारियों का कहना है कि:
- बारिश से फसल खराब
- शादी और न्यू ईयर सीजन की बढ़ी मांग
- सप्लाई पहले से ही कम
इन कारणों से निकट भविष्य में कीमतों में राहत मिलना मुश्किल है।
थोक बाजार भी गर्म
टमाटर की कीमतों में तेजी सिर्फ रिटेल तक सीमित नहीं है।
- महाराष्ट्र में थोक दाम नवंबर में 45% तक बढ़े
- दिल्ली में 26% की वृद्धि दर्ज
सितंबर–अक्टूबर में दाम कम होने से घटी थी महंगाई
कुछ महीनों पहले तक स्थिति बिल्कुल उलट थी।
सितंबर–अक्टूबर में टमाटर, प्याज और आलू के दाम गिरने से रिटेल महंगाई 0.25% तक नीचे आ गई थी, जो 2013 के बाद सबसे कम स्तर था।
अक्टूबर में टमाटर की महंगाई -42.9% दर्ज की गई थी, यानी कीमतें काफी कम थीं।
लेकिन नवंबर में मौसम और मांग दोनों ने पूरी तस्वीर बदल दी।
आगे क्या उम्मीद?
फिलहाल फसल खराब होने और त्योहार–मैरिज सीजन में मांग बढ़ने के कारण टमाटर की कीमतें स्थिर होने की संभावना कम दिखाई देती है।
आने वाले सप्ताह में भी बड़े बदलाव के संकेत नहीं मिल रहे।
टमाटर की मौजूदा महंगाई मौसम और बाजार दोनों के संतुलन बिगड़ने का परिणाम है।
यदि आने वाले समय में मौसम सुधरता है और नई फसल बाजार में आती है, तभी दामों में कमी संभव है।