CNAP क्या है? अब हर कॉल के साथ दिखेगा कॉलर का वेरिफाइड नाम, जानें कैसे बदलेगा कॉलिंग अनुभव

CNAP क्या है – CNAP यानी Calling Name Presentation एक नया टेलीकॉम फीचर है, जिसे टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) भारत में चरणबद्ध तरीके से लागू कर रही है। इस फीचर के तहत किसी

Written by: Admin

Published on: December 23, 2025

CNAP क्या है – CNAP यानी Calling Name Presentation एक नया टेलीकॉम फीचर है, जिसे टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) भारत में चरणबद्ध तरीके से लागू कर रही है। इस फीचर के तहत किसी भी इनकमिंग कॉल के साथ कॉल करने वाले व्यक्ति या संस्था का वेरिफाइड नाम मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देगा। अक्टूबर 2025 में इसके ढांचे को मंजूरी मिलने के बाद इसका लाइव टेस्ट शुरू हुआ और अब इसे अलग-अलग नेटवर्क पर धीरे-धीरे रोलआउट किया जा रहा है। उम्मीद है कि मार्च या अप्रैल 2026 तक यह सुविधा सभी मोबाइल यूजर्स के लिए पूरी तरह एक्टिव हो जाएगी।

CNAP लाने की जरूरत क्यों पड़ी?

पिछले कुछ वर्षों में भारत में फर्जी कॉल, टेली-स्कैम और बैंक या सरकारी अधिकारी बनकर ठगी करने के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग अनजान नंबर से आने वाली कॉल उठाने से भी डरने लगे हैं। TRAI का मानना है कि अगर कॉल के साथ सामने वाले का असली और सत्यापित नाम दिखे, तो यूजर को यह समझने में आसानी होगी कि कॉल भरोसेमंद है या नहीं। इससे सही फैसला लेने में मदद मिलेगी और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आ सकती है।

CNAP बाकी कॉलर ID ऐप्स से कैसे अलग है?

CNAP की सबसे खास बात इसका डेटा सोर्स है। यह फीचर किसी थर्ड-पार्टी ऐप या यूजर द्वारा सेव किए गए नामों पर निर्भर नहीं करता। कॉलर का नाम सीधे टेलीकॉम कंपनियों के KYC-वेरिफाइड रिकॉर्ड से लिया जाता है। ये वही जानकारी होती है जो सिम कार्ड लेते समय आधार जैसे आधिकारिक दस्तावेजों के जरिए दी जाती है। इसका मतलब यह है कि कॉल के दौरान दिखने वाला नाम कानूनी रूप से उस नंबर से जुड़ा हुआ होगा, न कि किसी अनुमान या गलत टैग पर आधारित।

चरणबद्ध तरीके से हो रहा है CNAP का रोलआउट

टेलीकॉम कंपनियों ने सबसे पहले चुनिंदा नेटवर्क्स पर CNAP का ट्रायल शुरू किया ताकि वास्तविक परिस्थितियों में इसकी परफॉर्मेंस को परखा जा सके। फिलहाल यह सुविधा 4G और 5G यूजर्स के लिए प्राथमिकता के आधार पर दी जा रही है, जबकि पुराने नेटवर्क्स को बाद में जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही TRAI ने स्मार्टफोन कंपनियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे छह महीने के भीतर अपने डिवाइसेज़ में CNAP सपोर्ट को सुनिश्चित करें ताकि यूजर्स को बिना किसी अतिरिक्त ऐप के यह सुविधा मिल सके।

Truecaller और CNAP में क्या अंतर है

भारत में Truecaller पहले से एक लोकप्रिय कॉलर ID ऐप है, लेकिन CNAP उससे पूरी तरह अलग तरीके से काम करता है। Truecaller क्राउडसोर्स्ड डेटा पर आधारित होता है, जहां यूजर्स खुद नाम जोड़ते हैं, जिससे गलत या भ्रामक जानकारी दिखने की संभावना रहती है। वहीं CNAP एक नेटवर्क-लेवल फीचर है, जिसके लिए किसी ऐप को इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं होती। इसमें कॉलर की पहचान टेलीकॉम कंपनी के वेरिफाइड रिकॉर्ड से आती है, जिससे नकली पहचान बनाना काफी मुश्किल हो जाता है, हालांकि इसमें कस्टमाइजेशन के विकल्प सीमित होते हैं।

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