आज का पंचांग 21 जनवरी 2026: माघ शुक्ल तृतीया, व्यतीपात योग, कुंभ राशि में चंद्रमा, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त

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आज का पंचांग 21 जनवरी 2026: आज बुधवार, 21 जनवरी 2026 को माघ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। विक्रम संवत 2082 (कालयुक्त), शक संवत 1947 (विश्वावसु) चल रहा है। पंचांग के अनुसार आज का दिन धार्मिक कार्यों, जप-तप और मानसिक शुद्धि के लिए विशेष महत्व रखता है।

तिथि का महत्व

आज शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि 02:47 AM तक रहेगी, इसके बाद चतुर्थी तिथि का आरंभ होगा। तृतीया तिथि सौंदर्य, सृजन और सकारात्मक कार्यों के लिए उत्तम मानी जाती है।

नक्षत्र और योग

आज धनिष्ठा नक्षत्र 01:58 PM तक रहेगा, जिसके बाद शतभिषा नक्षत्र प्रभावी होगा। व्यतीपात योग 06:58 PM तक रहेगा, इसके बाद वरीयान योग बनेगा। व्यतीपात योग को सामान्यतः अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दौरान नए और महत्वपूर्ण कार्यों से बचना शुभ रहता है।

करण और वार

आज तैतिल करण 02:48 PM तक, उसके बाद गर करण 02:47 AM तक और फिर वणिज करण रहेगा। वार बुधवार होने से यह दिन बुद्धि, व्यापार और गणनात्मक कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।

सूर्य और चंद्रमा की स्थिति

आज सूर्य मकर राशि में स्थित है, जबकि चंद्रमा पूरे दिन और रात कुंभ राशि में संचार करेगा। कुंभ राशि में चंद्रमा का गोचर सामाजिक कार्यों, नवीन विचारों और आत्मचिंतन को बढ़ावा देता है।

सूर्य और चंद्र समय

आज सूर्योदय 7:13 AM और सूर्यास्त 6:02 PM पर होगा। चन्द्रोदय सुबह 8:50 AM तथा चन्द्रास्त रात 8:30 PM पर होगा।

अशुभ काल का समय

आज राहुकाल 12:38 PM से 01:59 PM तक रहेगा। यम गण्ड 8:34 AM से 9:56 AM तक, कुलिक काल 11:17 AM से 12:38 PM तक और दुर्मुहूर्त 12:16 PM से 12:59 PM तक रहेगा। वर्ज्यम काल रात 09:18 PM से 10:56 PM तक रहेगा।

शुभ मुहूर्त

आज ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:37 AM से 06:25 AM तक रहेगा, जो ध्यान और साधना के लिए श्रेष्ठ है। अमृत काल 07:05 AM से 08:43 AM तक रहेगा। आज अभिजीत मुहूर्त नहीं है।

आनंदादि और विशेष योग

आज आनंदादि योग में मित्र योग 01:58 PM तक रहेगा, उसके बाद मानस योग प्रभावी होगा। इसके अतिरिक्त द्विपुष्कर योग का प्रभाव आज 02:42 AM तक माना गया है, जो कुछ कार्यों में दोहरा फल देने वाला होता है।

आज का पंचांग क्यों है खास

21 जनवरी 2026 का पंचांग ग्रह-नक्षत्रों की दृष्टि से आत्मविश्लेषण, योजना निर्माण और संयमित निर्णयों के लिए उपयुक्त है। शुभ काल में किए गए कार्य स्थायित्व प्रदान करते हैं, वहीं अशुभ काल में धैर्य और सावधानी रखना लाभकारी होता है।