Equity Committee से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक: UGC नियमों पर बवाल

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UGC new rules, What is about UGC Bill: UGC के नए नियमों के तहत हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में एक अनिवार्य Equity Committee बनाई जाएगी। यह कमेटी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों से जुड़ी जातिगत भेदभाव की शिकायतों की सुनवाई करेगी। नियमों के अनुसार कमेटी में SC-ST, OBC, दिव्यांग और महिला प्रतिनिधियों की भागीदारी जरूरी होगी। कमेटी का उद्देश्य कैंपस में समानता का माहौल बनाना, शिकायतों का समयबद्ध निपटारा करना और वंचित वर्गों के लिए योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना है।

क्यों लाने पड़े UGC को ये सख्त नियम?

इन नियमों की पृष्ठभूमि सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी है। साल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों की सुनवाई के दौरान UGC को पुराने 2012 के नियमों को अपडेट करने और जातिगत भेदभाव रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया था। रोहित वेमुला (हैदराबाद यूनिवर्सिटी) और पायल तड़वी (मुंबई मेडिकल कॉलेज) ने कथित जातिगत उत्पीड़न के बाद आत्महत्या कर ली थी। इन मामलों में पीड़ित छात्रों की माताओं द्वारा दायर जनहित याचिकाओं ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए थे।

किस रिपोर्ट के आधार पर बने ये नियम?

UGC ने सुप्रीम कोर्ट में जो रिपोर्ट सौंपी, वही इन नियमों की नींव बनी। रिपोर्ट के अनुसार उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव की शिकायतें 2017-18 में 173 थीं, जो 2023-24 में बढ़कर 378 हो गईं। यानी पांच साल में 118.4% की बढ़ोतरी। हालांकि 90% से अधिक मामलों का निपटारा हुआ, लेकिन पेंडिंग केस भी तेजी से बढ़े। 2019-20 में जहां 18 मामले लंबित थे, वहीं 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 108 हो गई। ये आंकड़े UGC के आधिकारिक डेटा पर आधारित हैं।

जातिगत भेदभाव की नई परिभाषा क्या कहती है?

नए नियमों में जातिगत भेदभाव को पहले से कहीं ज्यादा स्पष्ट और व्यापक रूप से परिभाषित किया गया है। SC, ST और OBC छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष, अपमानजनक या गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला व्यवहार भेदभाव की श्रेणी में आएगा। अगर किसी छात्र की शिक्षा में समान अवसर को नुकसान पहुंचाया जाता है या उसकी सामाजिक पहचान को आधार बनाकर भेदभाव किया जाता है, तो वह शिकायत योग्य अपराध माना जाएगा और दोषी पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।

फिर क्यों हो रहा है विरोध और प्रदर्शन?

इन नियमों को लेकर सबसे ज्यादा विरोध जनरल कैटेगरी यानी सवर्ण छात्रों की ओर से देखने को मिल रहा है। उनका आरोप है कि नियम पूरी तरह एकतरफा हैं क्योंकि इसमें सिर्फ SC, ST और OBC छात्रों के खिलाफ भेदभाव की ही बात की गई है। जनरल कैटेगरी के छात्रों को भेदभाव का शिकार मानने का कोई प्रावधान नहीं है। विरोध करने वालों का कहना है कि इन नियमों का दुरुपयोग कर झूठी शिकायतों के जरिए सवर्ण छात्रों को फंसाया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

UGC के इन नए नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर हो चुकी है। याचिका में कहा गया है कि ये नियम UGC एक्ट और उच्च शिक्षा में समान अवसर की संवैधानिक भावना के खिलाफ हैं। विरोध करने वालों का तर्क है कि इससे कैंपस में भेदभाव कम होने के बजाय और बढ़ सकता है।

कुल मिलाकर क्या है पूरा विवाद?

UGC ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और अपनी रिपोर्ट के आधार पर ये नियम लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य दलित-पिछड़े छात्रों को सुरक्षित माहौल देना है। लेकिन जनरल कैटेगरी के छात्रों को डर है कि ये नियम उनके खिलाफ हथियार बन सकते हैं। एक तरफ सामाजिक न्याय और सुरक्षा का सवाल है, तो दूसरी तरफ निष्पक्षता और दुरुपयोग की आशंका। इसी टकराव ने यूनिवर्सिटी और कॉलेज कैंपस में हंगामे की स्थिति पैदा कर दी है और मामला अब न्यायिक प्रक्रिया में है।

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