31 दिसंबर 2029 तक बदलेगी देश की तस्वीर, गृह मंत्री अमित शाह का नशा मुक्ति पर ऐतिहासिक ऐलान

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नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर ‘पुलिस स्मृति दिवस’ के अवसर पर देश के अमर शहीदों को नमन करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बड़ा राष्ट्रीय संकल्प दोहराया। शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद सुरक्षा बलों और देशवासियों को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने घोषणा की कि भारत सरकार ने अगले 3.5 वर्षों के भीतर देश को नशीले पदार्थों के जाल से पूरी तरह आजाद कराने का खाका तैयार कर लिया है। शाह ने सभी राज्यों की पुलिस एजेंसियों और सुरक्षा बलों से आह्वान किया कि वे 31 दिसंबर 2029 तक भारत को पूर्णतः ‘नशा मुक्त’ बनाने के मिशन में एक साथ मिलकर काम करें।

अर्थव्यवस्था और विकास के लिए नशा सबसे बड़ा खतरा: गृह मंत्री

अपने संबोधन में अमित शाह ने स्पष्ट किया कि नशीली दवाओं का कारोबार न केवल समाज को खोखला करता है, बल्कि यह देश के आर्थिक विकास को भी बाधित करता है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने 2026 के शेष समय से लेकर वर्ष 2027, 2028 और 2029 की अवधि के दौरान एक एकीकृत और आक्रामक अभियान चलाने का निर्णय लिया है।

शाह ने कहा, “हमारा देश आज भी कई तरह की आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। गृह मंत्रालय ने यह संकल्प लिया है कि हम अगले 3.5 वर्षों में एकजुट होकर नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे। हमारा एकमात्र ध्येय 31 दिसंबर 2029 तक भारत को नशा मुक्त बनाना है।”

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तीन प्रमुख हॉटस्पॉट में बहाल हुई शांति: कश्मीर, पूर्वोत्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्र

गृह मंत्री ने आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर हासिल की गई ऐतिहासिक सफलताओं का जिक्र करते हुए कहा कि दशकों से देश की सुरक्षा के लिए नासूर बने तीन प्रमुख क्षेत्रों—जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर और ‘रेड टेरर’ (नक्सलवाद) प्रभावित इलाकों—में अब शांति स्थापित हो चुकी है।

सुरक्षा बलों के शौर्य और अनुशासन की सराहना

  • जम्मू-कश्मीर: घाटी में आतंकवाद को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया गया है और आम जीवन सामान्य हुआ है।
  • पूर्वोत्तर: विभिन्न शांति समझौतों और हजारों उग्रवादियों के आत्मसमर्पण के बाद पूरा पूर्वोत्तर विकास की मुख्यधारा से जुड़ चुका है।
  • नक्सलवाद का सफाया: पांच दशकों से कई राज्यों को प्रभावित करने वाली नक्सल समस्या का सुरक्षा बलों ने बहादुरी से अंत कर दिया है।

निष्पक्ष और हिंसा-मुक्त चुनावों में पुलिस व CAPFs का योगदान

अमित शाह ने देश में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को सुरक्षित और पारदर्शी बनाए रखने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) और राज्य पुलिस बलों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य के इतिहास में यह पहली बार देखा गया जब चुनावी प्रक्रिया के दौरान हिंसा में किसी भी व्यक्ति की जान नहीं गई। इसी तरह उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में भी चुनाव से जुड़ी हिंसा को रोकने में जवानों ने निष्पक्षता और अनुशासन का परिचय दिया है।

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राष्ट्रीय पुलिस स्मारक: बलिदान से प्रेरणा लेने का केंद्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2018 में उद्घाटन किए गए ‘नेशनल पुलिस मेमोरियल’ का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि यह स्मारक कर्तव्य पथ पर प्राण न्योछावर करने वाले वीरों की अमर गाथा का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि आजादी के आठ दशकों में भारत ने वैश्विक पटल पर जो मुकाम हासिल किया है, उसकी मजबूत नींव में हमारे बहादुर जवानों का लहू और बलिदान शामिल है। अगर हमारे जवानों ने सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा की रक्षा में अपना सर्वस्व न्यौछावर न किया होता, तो आज देश इस मुकाम पर न खड़ा होता।  babapost.in पर पढ़ें ताजा खबरें

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