महासमुंद में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का असर, किसानों के लिए कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी, फसल बचाने के लिए तुरंत करें ये काम

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महासमुंद. संभावित बारिश और तेज हवाओं को देखते हुए महासमुंद जिले में कृषि विभाग ने किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि सलाह जारी की है। भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त पूर्वानुमान के आधार पर उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप ने किसानों से फसलों, सब्जियों, बागवानी उपज और पशुधन की सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानियां बरतने की अपील की है। विभाग ने किसानों को मौसम संबंधी चेतावनियों पर नजर रखने और खराब मौसम के दौरान खेतों में काम करने से बचने की सलाह दी है।

कृषि विभाग के अनुसार, आगामी दिनों में वर्षा और तेज हवाओं की आशंका को देखते हुए किसानों को फसल कटाई, मड़ाई, भंडारण और रबी फसलों की बुवाई से जुड़े कार्य मौसम की स्थिति के अनुसार करने चाहिए। खासकर पककर तैयार फसलों को सुरक्षित रखने और खेतों में जलभराव रोकने पर ध्यान देना जरूरी है।

धान और दलहन की कटाई फिलहाल रोकने की सलाह

कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि धान, दलहन और तिलहन की जो फसलें पकने की अवस्था में हैं, उनकी कटाई मौसम की स्थिति को देखते हुए अगले दो से चार दिनों तक स्थगित रखें। जिन किसानों ने पहले ही कटाई शुरू कर दी है, वे कटी हुई फसल को जल्द से जल्द ऊंचे और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं।

कटी फसल को तिरपाल से ढकते समय यह सुनिश्चित करें कि उस पर बारिश का पानी जमा न हो। फसल के नीचे नमी एकत्रित होने से भी नुकसान हो सकता है। खेतों में अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था करें। इसके साथ ही कटाई, मड़ाई और फसल सुखाने के लिए साफ एवं सूखे स्थान पहले से तैयार रखें।

रबी फसलों की बुवाई को लेकर भी सलाह

मौसम प्रतिकूल रहने की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने उतेरा फसल के रूप में तिवरा और अलसी की बुवाई कुछ दिनों के लिए टालने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार, मौसम साफ होने के बाद नवंबर के पहले सप्ताह से रबी फसलों की बुवाई शुरू करने की योजना बनाई जा सकती है।

किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने के लिए भी कहा गया है। फसल में कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद उनकी सही पहचान कर उचित कीटनाशक अथवा कवकनाशक का इस्तेमाल करें। बिना जरूरत रासायनिक दवाओं का छिड़काव करने से बचें।

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बारिश से अनाज और बीज को बचाना जरूरी

बारिश के बाद फसल में नमी बढ़ने से अनाज की गुणवत्ता और भंडारण क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को गीली फसल लंबे समय तक ढेर में जमा करके नहीं रखने की सलाह दी है।

अनाज को साफ, हवादार और सुरक्षित स्थान पर रखें। पर्याप्त रूप से सुखाने के बाद ही उसका भंडारण करें। बीज के लिए रखी गई फसल को अलग सुरक्षित रखें, ताकि उसकी अंकुरण क्षमता बनी रहे और कीट-पतंगों से नुकसान न हो। भंडारण स्थल की छत, फर्श और जल निकासी की व्यवस्था भी दुरुस्त रखें।

सब्जियों और बागवानी फसलों की सुरक्षा के लिए ये उपाय अपनाएं

संभावित बारिश और तेज हवाओं को देखते हुए उद्यानिकी फसलों की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है। कृषि विभाग ने किसानों को पककर तैयार सब्जियों और अन्य बागवानी उपज की जल्द कटाई कर बाजार भेजने की व्यवस्था करने की सलाह दी है। फसलों में उर्वरकों का इस्तेमाल मौसम साफ होने के बाद ही करें।

विभाग की ओर से जारी सलाह के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  • फूलगोभी, ब्रोकली, चुकंदर, खीरा और पछेती करेला जैसी रबी सब्जियों की बुवाई या रोपाई नवंबर के पहले सप्ताह से शुरू करें।
  • करेला, लौकी और अन्य बेल वाली सब्जियों को तेज हवाओं से बचाने के लिए मजबूत सहारा दें।
  • जिन केले के पौधों में फूल या फल आ चुके हैं, उन्हें बांस का सहारा देकर सुरक्षित रखें।
  • जहां ओलावृष्टि की आशंका हो, वहां उपलब्धता के अनुसार ओलावृष्टिरोधी जाली का उपयोग करें।
  • बारिश के बाद पत्तियों पर धब्बे, तनों में सड़न और जड़ों से जुड़ी समस्याओं की जांच करें।
  • खेतों में अतिरिक्त वर्षा जल की निकासी सुनिश्चित करें और रोग के लक्षण मिलने पर सही पहचान के बाद ही नियंत्रण के उपाय अपनाएं।

पशुपालक भी बरतें सावधानी, पशुओं को सुरक्षित जगह पर रखें

खराब मौसम का असर पशुधन पर भी पड़ सकता है। इसे देखते हुए कृषि विभाग ने पशुपालकों को मवेशियों को सूखे और सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी है। तेज हवा या आकाशीय बिजली की आशंका के दौरान पशुओं को चराते समय पेड़ों के नीचे आश्रय लेने से बचें।

पशुओं के लिए पर्याप्त हरा चारा, सूखा चारा और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध रखें। पशु आहार को बारिश से सुरक्षित स्थान पर भंडारित करें। यदि किसी पशु में अचानक सुस्ती, भूख में कमी, दस्त या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।

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फसल खराब होने पर तुरंत दें सूचना, बीमा दावा करने में न करें देरी

प्राकृतिक आपदा या प्रतिकूल मौसम के कारण फसल को नुकसान होने पर बीमित किसानों को संबंधित फसल बीमा कंपनी या कृषि विभाग को तत्काल सूचना देने की सलाह दी गई है। किसानों को नुकसान की तस्वीरें और संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए। फसल बीमा दावा प्रस्तुत करते समय निर्धारित समय-सीमा और संबंधित प्रक्रिया का पालन करना भी जरूरी है।

किसानों को अपने बीमा दस्तावेजों में दर्ज सूचना देने की प्रक्रिया और समय-सीमा की पुष्टि संबंधित बीमा कंपनी या कृषि विभाग से कर लेनी चाहिए, ताकि नुकसान की स्थिति में दावा प्रक्रिया प्रभावित न हो।

किसानों से मौसम विभाग की चेतावनी मानने की अपील

महासमुंद कृषि विभाग ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि वे मौसम के पूर्वानुमान और आधिकारिक चेतावनियों पर लगातार नजर रखें। बारिश, तेज हवा और बिजली चमकने के दौरान खेतों में काम करने से बचें तथा फसलों, उद्यानिकी उपज, भंडारित अनाज और पशुधन की सुरक्षा के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाएं। खबरें पढ़ने के लिए विजिट करें babapost.in पर।

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