रायपुर. छत्तीसगढ़ में चक्रवाती तूफान के असर से मौसम का मिजाज बदलने वाला है। बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवाती सिस्टम के कारण प्रदेश के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने किसानों के लिए विशेष कृषि सलाह जारी की है। वहीं, संभावित नुकसान को देखते हुए राज्य के कृषि विभाग को भी अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम में आने वाले इस बदलाव का असर धान की फसल, दलहन, तिलहन, सब्जियों और बागवानी फसलों पर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों को अगले कुछ दिनों तक कटाई, बुवाई और फसलों में दवाओं के छिड़काव जैसे कृषि कार्य मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर करने की सलाह दी गई है।
बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान बनने की आशंका
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) से प्राप्त पूर्वानुमान के मुताबिक, दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में बना दबाव का क्षेत्र अगले कुछ घंटों में चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। इस मौसम प्रणाली के प्रभाव से हवा की रफ्तार 115 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका जताई गई है।
इसके असर से छत्तीसगढ़ में बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है। खासकर 28 और 29 अक्टूबर को प्रदेश के कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है। लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण खेतों में जलभराव, फसलों के गिरने और तैयार उपज को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है।
छत्तीसगढ़ में कैसा रहेगा बारिश का असर
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में आगामी दिनों के दौरान बारिश का असर देखने को मिल सकता है।
- 27 अक्टूबर: प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है।
- 28 और 29 अक्टूबर: छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में बारिश की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है।
मौसम की परिस्थितियों में बदलाव संभव है। इसलिए किसानों और आम नागरिकों को स्थानीय मौसम चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी जाती है।
किसानों के लिए अलर्ट
चक्रवाती तूफान और भारी बारिश की आशंका को देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की सलाह दी है।
जिन खेतों में धान, दलहन और तिलहन की फसलें पकने की अवस्था में हैं, वहां अगले दो से चार दिनों तक कटाई का काम रोककर मौसम की स्थिति का आकलन करने को कहा गया है। जिन किसानों ने पहले ही फसल काट ली है, उन्हें उपज को जल्द से जल्द सुरक्षित और बारिश से बचाव वाले स्थान पर रखने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा, खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने के लिए उचित जल निकासी व्यवस्था करना जरूरी है। खेतों में पानी जमा होने से फसलों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और नुकसान बढ़ सकता है।
लगातार बारिश के दौरान फसलों में कीट एवं रोग नियंत्रण के लिए दवाओं का छिड़काव करने से बचने की सलाह दी गई है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि फसलों में रोग या कीट के लक्षण दिखाई दें, तो मौसम साफ होने के बाद ही आवश्यक कीटनाशक या कवकनाशक का इस्तेमाल करें।
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इससे दवाओं के प्रभावी उपयोग में मदद मिलेगी और बारिश के कारण उनके बह जाने की आशंका भी कम होगी। किसानों को दवाओं का इस्तेमाल संबंधित कृषि विशेषज्ञों की सलाह और निर्धारित निर्देशों के अनुसार ही करना चाहिए।
Rabi Crop Advisory
भारी बारिश का असर आगामी रबी सीजन की तैयारियों पर भी पड़ सकता है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने रबी फसलों की बुवाई करने वाले किसानों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने की सलाह दी है।
पूर्वानुमान के मद्देनजर रबी फसलों की बुवाई का काम नवंबर के पहले सप्ताह से शुरू करने का सुझाव दिया गया है। किसानों को खेतों में नमी और जल निकासी की स्थिति का आकलन करने के बाद ही बुवाई की तैयारी करनी चाहिए, ताकि प्रतिकूल मौसम के कारण बीज और फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
चक्रवाती सिस्टम के कारण तेज हवाएं चलने की आशंका को देखते हुए सब्जी एवं फल उत्पादक किसानों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।
कृषि वैज्ञानिकों ने करेला, लौकी जैसी लता वाली सब्जियों को मजबूत सहारा देने की सलाह दी है। इससे तेज हवा के दौरान बेलों को नुकसान पहुंचने की आशंका कम हो सकती है। केले के पौधों और फलदार वृक्षों को भी जरूरत के अनुसार सहारा देना चाहिए।
सब्जियों के खेतों में पानी की निकासी के लिए उचित व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है। बारिश के दौरान कीटनाशक और कवकनाशक का छिड़काव नहीं करना चाहिए। मौसम सामान्य होने के बाद फसलों की स्थिति का निरीक्षण कर आवश्यक कृषि उपाय अपनाए जा सकते हैं।
पशुपालक भी रहें सावधान
संभावित भारी बारिश और तेज हवाओं के मद्देनजर पशुपालकों को अपने पशुओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है। पशुओं को खुले स्थानों या पेड़ों के नीचे बांधने के बजाय सुरक्षित और सूखे स्थान पर रखना चाहिए।
इसके साथ ही पशुओं के लिए पर्याप्त सूखे चारे और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। पशुओं को बारिश, तेज हवा और जलभराव से बचाने के लिए उनके रहने के स्थान की पहले से जांच कर लेना भी जरूरी है।
कृषि विभाग अलर्ट
चक्रवाती तूफान के संभावित प्रभाव को देखते हुए किसान कल्याण मंत्री राम विचार नेताम और कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और मैदानी अमले को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य किसानों को समय पर जरूरी सहायता उपलब्ध कराना और संभावित नुकसान को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाना है।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम के ताजा पूर्वानुमान पर नजर रखें और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार ही खेती से जुड़े कार्य करें। समय रहते फसलों की सुरक्षा, जल निकासी और पशुधन की देखभाल के इंतजाम करने से चक्रवाती तूफान और भारी बारिश से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम करने में मदद मिल सकती है। खबरें पढ़ने के लिए babapost.in पर विजिट करें।

