सक्ती. जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अमृत विकास तोपनो ने सख्त कदम उठाया है। प्रशासन ने पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार ठाकुर द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन, उपलब्ध दस्तावेजों, संबंधित व्यक्ति के जवाब और विभिन्न सामाजिक संगठनों के अभ्यावेदनों का गंभीरता से परीक्षण करने के बाद यह निर्णय लिया।

जांच के दौरान यह सामने आया कि ओमप्रकाश बंजारे के विरुद्ध विभिन्न न्यायालयों में कई प्रतिबंधात्मक प्रकरण लंबित हैं और अब तक वह किसी भी मामले में दोषमुक्त नहीं हुआ है। स्वयं बंजारे ने भी इन मामलों की पुष्टि की। इसके अलावा, उसने प्रदेशभर में सामाजिक गतिविधियों के नाम पर आयोजित धरना-प्रदर्शनों में भाग लेने की बात स्वीकार की, लेकिन अपने पक्ष में कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
प्रशासन ने यह भी पाया कि पूर्व में की गई चेतावनियों और प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। उसके आचरण में सुधार न आने के कारण वह लगातार आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहा, जिससे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का वातावरण बन गया था। आम नागरिकों को इससे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए जिला दंडाधिकारी ने छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 3 एवं 5 के तहत कार्रवाई करते हुए ओमप्रकाश बंजारे को एक वर्ष के लिए जिला बदर करने का आदेश जारी किया। इस आदेश के अंतर्गत उसे सक्ती जिले के साथ-साथ जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों की सीमाओं से भी निष्कासित किया गया है।
प्रशासन ने निर्देश दिया है कि संबंधित व्यक्ति 24 घंटे के भीतर इन सभी जिलों की सीमाओं से बाहर चला जाए और अगले एक वर्ष तक इन क्षेत्रों में प्रवेश न करे। इस कार्रवाई को जिले में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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