उत्तर बस्तर कांकेर. छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर कांकेर जिले में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। राजस्व पटवारी संघ के आह्वान पर हड़ताल कर रहे जिले के 155 पटवारियों को प्रशासन की ओर से सेवा में व्यवधान (ब्रेक इन सर्विस) की कार्रवाई के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने सभी हड़ताली पटवारियों को तत्काल अपने कार्यस्थल पर उपस्थित होकर शासकीय कामकाज शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक, राजस्व पटवारी संघ के बैनर तले जिले के पटवारी 13 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। लगातार जारी इस हड़ताल के चलते राजस्व विभाग के कई जरूरी और समयबद्ध कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसका सीधा असर किसानों के साथ-साथ आम नागरिकों को मिलने वाली राजस्व सेवाओं पर भी पड़ रहा है।
155 पटवारियों को जारी हुआ कारण बताओ नोटिस
कांकेर जिला प्रशासन के अनुसार, जिले के पांच राजस्व अनुविभागों में कुल 175 पटवारी पदस्थ हैं। इनमें कांकेर, चारामा, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़ और पखांजूर शामिल हैं। कुल पदस्थ पटवारियों में से 155 कर्मचारी वर्तमान में हड़ताल पर हैं।
प्रशासन का कहना है कि हड़ताल शुरू होने के बाद से संबंधित पटवारियों ने अपने कर्तव्यों पर उपस्थित होकर सरकारी कामकाज शुरू नहीं किया है। इसी को देखते हुए उन्हें ब्रेक इन सर्विस की संभावित कार्रवाई के संबंध में नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
पटवारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर काम पर लौटने और अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है या वे निर्धारित अवधि में कार्यभार ग्रहण नहीं करते हैं, तो प्रचलित सेवा नियमों के तहत आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
इसे भी पढ़ें – Patwari Strike: 819 हड़ताली पटवारियों को प्रशासन का अल्टीमेटम, तत्काल काम पर लौटने के निर्देश; जारी हुए शो-कॉज नोटिस
किसानों के जरूरी कामकाज पर पड़ रहा असर
पटवारियों की लगातार अनुपस्थिति के कारण जिले में कई महत्वपूर्ण राजस्व कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इनमें डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS), गिरदावरी, एग्रीस्टैक पंजीयन, फसल सत्यापन और धान खरीदी के लिए किसानों के दस्तावेजों का सत्यापन प्रमुख हैं।
इसके अलावा जमीन से जुड़े नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे मामलों में भी कामकाज प्रभावित हो रहा है। वहीं, आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र जारी करने के लिए आवश्यक जांच एवं प्रतिवेदन तैयार करने की प्रक्रिया में भी बाधा आ रही है।
धान खरीदी से पहले बढ़ी प्रशासन की चिंता
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया को देखते हुए किसानों की जमीन और फसल से संबंधित रिकॉर्ड का समय पर सत्यापन बेहद जरूरी है। गिरदावरी, एग्रीस्टैक रजिस्ट्रेशन और फसल सत्यापन के आधार पर किसानों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों का मिलान किया जाता है।
ऐसे में पटवारियों की हड़ताल लंबी खिंचने से धान खरीदी से जुड़े प्रशासनिक कार्यों पर भी असर पड़ने की आशंका है। जिला प्रशासन ने इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए हड़तालरत कर्मचारियों को तत्काल काम पर लौटने के निर्देश दिए हैं। खबरें पढ़ने के लिए विजिट करें babapost.in पर।

