ट्रंप की चेतावनी के बावजूद पीछे नहीं हटे खामेनेई, अमेरिका-ईरान वार्ता ठप; क्या सैन्य टकराव की ओर बढ़ रहा संकट?

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नई दिल्ली. अमेरिका और ईरान के बीच पहले से चले आ रहे तनाव ने अब और गंभीर रूप ले लिया है। दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय कूटनीतिक संवाद पूरी तरह ठप हो गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने साफ संकेत दे दिया है कि वह अमेरिकी दबाव या धमकियों के आगे झुकने के मूड में नहीं हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हालात ऐसे बन गए हैं कि ईरान और अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच प्रस्तावित सभी बातचीत रद्द कर दी गई है। इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय में यह सवाल तेज हो गया है कि क्या अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

परमाणु समझौते की उम्मीदें लगभग खत्म

पिछले करीब एक साल से अमेरिका, यूरोपीय देशों और इजरायल के साथ मिलकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी समझौते की कोशिश कर रहा था। हालांकि मौजूदा तनाव ने इन प्रयासों को बड़ा झटका दिया है। ईरान का मानना है कि अमेरिकी बयानबाजी और धमकियों ने कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को कमजोर कर दिया है।

ईरानी नेतृत्व का कहना है कि जब तक दबाव की राजनीति जारी रहेगी, तब तक किसी भी तरह की बातचीत संभव नहीं है।

अमेरिकी हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि अमेरिका ने उस पर हमला किया, तो वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएगा। इसके साथ ही ईरान ने पड़ोसी देशों को भी चेतावनी दी है कि वे किसी भी तरह से अमेरिकी सैन्य मदद का हिस्सा न बनें।

तनाव के बीच मध्य पूर्व में स्थित कुछ अमेरिकी ठिकानों से कर्मचारियों को सतर्कता के तौर पर हटने की सलाह दी गई है, जिससे हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

ट्रंप का प्रदर्शनकारियों को खुला समर्थन

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में सख्त बयान दिए हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन जारी रखने की अपील की और कहा कि उनकी मदद “रास्ते में” है।
ट्रंप ने यह भी ऐलान किया कि जब तक ईरान में कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों पर हिंसा बंद नहीं होती, तब तक ईरानी अधिकारियों के साथ सभी तरह की बैठकें रद्द रहेंगी।

भारत की एडवाइजरी: भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह

बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने ईरान में मौजूद भारतीयों को सतर्क रहने, भीड़भाड़ और विरोध प्रदर्शनों से दूर रहने की सलाह दी है।
इसके साथ ही भारतीय नागरिकों से कहा गया है कि वे जरूरी दस्तावेज तैयार रखें और भारतीय दूतावास के संपर्क में बने रहें।

आगे क्या?

मौजूदा हालात में अमेरिका और ईरान के बीच सीधा सैन्य टकराव अभी अनिश्चित है, लेकिन बढ़ती बयानबाजी, बातचीत का टूटना और जवाबी हमले की धमकियां इस बात का संकेत हैं कि संकट बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय दबाव और कूटनीतिक प्रयास ही यह तय करेंगे कि हालात युद्ध की ओर जाएंगे या किसी समाधान की राह निकलेगी।

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