मां की विरासत आगे बढ़ाएंगी खुशी कपूर! ‘मॉम 2’ से फिर जिंदा होगी देवकी की कहानी

बॉलीवुड में स्टार किड्स की एंट्री लगातार चर्चा में रहती है, लेकिन इस बार मामला खास है। दिवंगत अभिनेत्री Sridevi की छोटी बेटी Khushi Kapoor अब अपनी मां की आखिरी फिल्म के सीक्वल में नजर

Written by: Admin

Published on: March 2, 2026

बॉलीवुड में स्टार किड्स की एंट्री लगातार चर्चा में रहती है, लेकिन इस बार मामला खास है। दिवंगत अभिनेत्री Sridevi की छोटी बेटी Khushi Kapoor अब अपनी मां की आखिरी फिल्म के सीक्वल में नजर आने वाली हैं। 2017 में रिलीज हुई सुपरहिट रिवेंज थ्रिलर ‘Mom’ के सीक्वल ‘Mom 2’ की शूटिंग शुरू हो चुकी है और खुशी कपूर इसके लिए नोएडा पहुंच गई हैं।

खुशी ने 2023 में The Archies से बॉलीवुड डेब्यू किया था। अब वह एक इमोशनल और इंटेंस कहानी के साथ बड़े पर्दे पर अपनी पहचान मजबूत करने की तैयारी में हैं।

मॉम’ थी एक दमदार रिवेंज थ्रिलर

2017 में रिलीज हुई Mom एक सशक्त रिवेंज ड्रामा थी, जिसे Ravi Udyawar ने डायरेक्ट किया था। फिल्म में श्रीदेवी ने देवकी नाम की मां का किरदार निभाया था, जो अपनी सौतेली बेटी के साथ हुए जघन्य अपराध के बाद न्याय की लड़ाई लड़ती है।

फिल्म में उनके साथ Akshaye Khanna, Nawazuddin Siddiqui और Sajal Aly अहम भूमिकाओं में नजर आए थे।

इस फिल्म के लिए श्रीदेवी को मरणोपरांत राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह उनकी आखिरी रिलीज फिल्म थी, जो उनकी अचानक मृत्यु से कुछ महीने पहले सिनेमाघरों में आई थी।

‘मॉम 2’ की कमान किसके हाथ में?

‘Mom 2’ का निर्देशन Girish Kohli कर रहे हैं। फिल्म में खुशी कपूर के साथ Jisshu Sengupta और Karishma Tanna भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।

फिल्म को प्रोड्यूस कर रहे हैं खुशी के पिता Boney Kapoor, जो पहले पार्ट में को-प्रोड्यूसर भी थे। उनके साथ अक्षय पुरी भी इस प्रोजेक्ट को सपोर्ट कर रहे हैं।

नोएडा की नई फिल्म सिटी में शूटिंग

‘मॉम 2’ की शूटिंग उत्तर प्रदेश के नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे के पास बन रही नई इंटरनेशनल फिल्म सिटी में की जा रही है। बताया जा रहा है कि यह वहां शूट होने वाली शुरुआती बड़ी फिल्मों में से एक है।

यह लोकेशन बड़े स्केल की फिल्मों के लिए तैयार की जा रही है, जिससे आने वाले समय में यूपी फिल्म इंडस्ट्री को भी बड़ा फायदा मिल सकता है।

क्या मां की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगी खुशी?

खुशी कपूर के लिए यह फिल्म बेहद अहम मानी जा रही है। इससे पहले वह नए कलाकारों के साथ अलग-अलग प्रोजेक्ट्स में नजर आ चुकी हैं, लेकिन ‘मॉम 2’ उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है।

एक तरफ यह फिल्म भावनात्मक रूप से उनके लिए खास है, वहीं दूसरी ओर दर्शकों की अपेक्षाएं भी काफी ऊंची हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या खुशी अपनी मां की विरासत को उसी मजबूती से आगे बढ़ा पाती हैं या नहीं।

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श्रीदेवी: भारतीय सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार की प्रेरक कहानी

भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम इतिहास में जब भी महान अभिनेत्रियों का नाम लिया जाता है, तो श्रीदेवी का नाम सबसे पहले सामने आता है। उन्हें सिर्फ एक सफल अभिनेत्री नहीं, बल्कि भारतीय फिल्म उद्योग की पहली महिला सुपरस्टार माना जाता है। अपने चार दशक लंबे करियर में उन्होंने अभिनय, नृत्य और अभिव्यक्ति के माध्यम से जो ऊँचाइयाँ हासिल कीं, वह आज भी कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

प्रारंभिक जीवन और फिल्मी सफर की शुरुआत

श्रीदेवी का जन्म 13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु में हुआ था। बेहद कम उम्र में उन्होंने फिल्मों में कदम रख दिया था। मात्र चार वर्ष की आयु में उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा में बाल कलाकार के रूप में काम करना शुरू किया। उनकी मासूमियत और स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों का ध्यान तुरंत आकर्षित किया।

बचपन से ही कैमरे के सामने सहज होने के कारण उन्होंने किशोरावस्था तक कई भाषाओं—तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़—की फिल्मों में काम कर लिया था। हिंदी सिनेमा में उनका शुरुआती दौर संघर्षपूर्ण रहा, लेकिन उनकी प्रतिभा ने जल्द ही उन्हें अलग पहचान दिलाई।

हिंदी सिनेमा में सुपरस्टार का उदय

1980 के दशक में श्रीदेवी ने बॉलीवुड में अपनी मजबूत जगह बनाई। उनकी फिल्म हिम्मतवाला ने उन्हें व्यापक लोकप्रियता दिलाई। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

1987 में आई फिल्म मिस्टर इंडिया में उनका किरदार “सीमा” और गीत “हवा हवाई” आज भी यादगार है। इसी फिल्म ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। इसके बाद नगीना में नागिन के रूप में उनका दमदार अभिनय दर्शकों को रोमांचित कर गया।

फिल्म चांदनी ने उन्हें रोमांटिक नायिका के रूप में नई पहचान दी। इस फिल्म की सफलता ने यह साबित कर दिया कि वे अकेले अपने दम पर फिल्म को हिट कराने की क्षमता रखती हैं।

उनकी कॉमिक टाइमिंग भी बेहतरीन थी, जिसका उदाहरण चालबाज़ में डबल रोल के रूप में देखने को मिला। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला।

अभिनय शैली और विशेषताएँ

श्रीदेवी की सबसे बड़ी ताकत उनकी अभिव्यक्ति थी। उनकी बड़ी और भावपूर्ण आँखें बिना संवाद के भी बहुत कुछ कह देती थीं। चाहे रोमांस हो, कॉमेडी हो या इमोशनल सीन—हर भूमिका में वे पूरी तरह ढल जाती थीं।

वे एक शानदार डांसर भी थीं। “हवा हवाई” और “मैं तेरी दुश्मन” जैसे गीतों में उनका नृत्य आज भी याद किया जाता है। उनकी ऊर्जा, ग्रेस और परफॉर्मेंस ने उन्हें अपने दौर की सबसे अलग अभिनेत्री बना दिया।

निजी जीवन

1996 में उन्होंने फिल्म निर्माता बोनी कपूर से विवाह किया। उनकी दो बेटियाँ हैं—जान्हवी कपूर और खुशी कपूर। विवाह के बाद उन्होंने फिल्मों से कुछ समय का विराम लिया और पारिवारिक जीवन पर ध्यान केंद्रित किया।

शानदार वापसी

लंबे अंतराल के बाद 2012 में श्रीदेवी ने फिल्म इंग्लिश विंग्लिश से जोरदार वापसी की। इस फिल्म में एक साधारण गृहिणी का किरदार निभाकर उन्होंने साबित किया कि प्रतिभा कभी पुरानी नहीं होती। उनके अभिनय को आलोचकों और दर्शकों दोनों ने सराहा।

2017 में आई फिल्म मॉम उनके करियर की अंतिम फिल्म साबित हुई। इस फिल्म में उन्होंने एक मां के संघर्ष और दर्द को बेहद संवेदनशीलता से चित्रित किया। इस भूमिका के लिए उन्हें मरणोपरांत राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

असमय निधन और विरासत

24 फरवरी 2018 को दुबई में उनका आकस्मिक निधन हो गया। इस खबर ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। लाखों प्रशंसकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

श्रीदेवी का योगदान सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं था; उन्होंने भारतीय सिनेमा में नायिकाओं की स्थिति को मजबूत किया। उन्होंने यह साबित किया कि एक अभिनेत्री भी फिल्म की सफलता की मुख्य आधार बन सकती है।

पुरस्कार और सम्मान

अपने करियर में उन्होंने कई फिल्मफेयर पुरस्कार जीते। भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया। उनके अभिनय की विविधता और समर्पण ने उन्हें सिनेमा इतिहास में अमर बना दिया।

क्यों कहा जाता है उन्हें “पहली महिला सुपरस्टार”?

1980 और 90 के दशक में जब फिल्मों का केंद्र पुरुष नायक हुआ करते थे, तब श्रीदेवी ने अपनी फिल्मों को अपने दम पर हिट कराया। उनकी लोकप्रियता, बॉक्स ऑफिस पर सफलता और व्यापक प्रशंसक वर्ग ने उन्हें यह उपाधि दिलाई।

उन्होंने पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़कर महिला पात्रों को मजबूत और प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया। यही कारण है कि आज भी नई पीढ़ी की अभिनेत्रियाँ उन्हें प्रेरणा स्रोत मानती हैं।

श्रीदेवी केवल एक अभिनेत्री नहीं थीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की एक संस्था थीं। उनका सफर संघर्ष, समर्पण और सफलता की मिसाल है। उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में जो स्थान बनाया, वह सदैव अटूट रहेगा।

उनकी मुस्कान, उनकी अदाएँ और उनकी अद्भुत प्रतिभा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। भारतीय सिनेमा के इतिहास में श्रीदेवी का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।

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