महासमुंद. भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने देश की पहली डिजिटल जनगणना 2027 की तैयारी को मजबूत करने के लिए विभिन्न राज्यों में पूर्व परीक्षण प्रारंभ किया है। इस दिशा में छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले को पायलट क्षेत्र के रूप में चुना गया है, जहां 10 नवंबर से मकानसूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य शुरू हो चुका है। यह प्रक्रिया 30 नवंबर 2025 तक पूर्ण की जाएगी।
24 गांवों में डिजिटल मैपिंग और जियो-टैगिंग कार्य लगभग पूरा
महासमुंद तहसील के 24 चयनित गांवों में कुल 39 मकानसूचीकरण ब्लॉक बनाए गए हैं, जिन्हें 6 सर्किलों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक सर्किल की देखरेख के लिए 07 पर्यवेक्षक और 39 प्रगणक नियुक्त किए गए हैं। इनमें से 1 पर्यवेक्षक और 4 प्रगणक आरक्षित रखे गए हैं ताकि कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए।
पर्यवेक्षकों द्वारा DLM (Digital Layout Mapping) ऐप के माध्यम से ब्लॉकों की डिजिटल मैपिंग पूरी कर ली गई है। वहीं प्रगणकों ने HLO (House Listing Operation) ऐप के जरिये मकानों, भवनों और परिवारों का जियो-टैगिंग कार्य भी लगभग पूरा कर लिया है।
स्वगणना: नागरिकों को पहली बार खुद डेटा दर्ज करने का अवसर
जनगणना के इतिहास में पहली बार नागरिकों को स्वगणना (Self Enumeration) का अवसर दिया गया है। 1 से 7 नवंबर 2025 तक नागरिक अपने परिवार और मकान की जानकारी मोबाइल ऐप के माध्यम से स्वयं दर्ज कर सकते थे। यह पहल डिजिटल भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
डिजिटल जनगणना में आधुनिक तकनीक का प्रयोग
भारत की जनगणना 2027 पूरी तरह डिजिटल प्रारूप में होगी। इसके लिए दो विशेष मोबाइल एप्लिकेशन तैयार किए गए हैं जो Android 11 और iOS 14 या उससे ऊपर के स्मार्टफोनों पर काम करेंगे। एप के सुचारु संचालन के लिए कम से कम 6 GB RAM वाले डिवाइस की आवश्यकता होगी।
इन ऐप्स के माध्यम से प्रगणक सीधे मोबाइल पर डेटा संकलित कर रहे हैं, जिससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि डेटा की सटीकता भी बढ़ेगी।
अधिकारियों द्वारा सतत मॉनिटरिंग और प्रशिक्षण
राज्य के जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल, जिला कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी विनय कुमार लंगेह सहित वरिष्ठ अधिकारी स्वयं फील्ड में जाकर कार्य का निरीक्षण कर रहे हैं।
डिप्टी कलेक्टर मनोज खांडे और उप जिला जनगणना अधिकारी अक्षा गुप्ता दैनिक प्रगति की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
साथ ही, तहसीलदार जुगल किशोर पटेल द्वारा चयनित गांवों में जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सरपंचों और कोटवारों को मुनादी के माध्यम से नागरिकों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।
जनगणना निदेशालय से आए नेशनल ट्रेनर अशोक मिश्रा, मास्टर ट्रेनर संतोष मेंढे और वैद्यनाथ क्षेत्र में मौजूद रहकर प्रगणकों की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं।
नागरिकों से सहयोग की अपील
प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे गणना के दौरान सही और सटीक जानकारी प्रदान करें ताकि जनगणना के आंकड़े विश्वसनीय बन सकें। यह डेटा आने वाले वर्षों में नीतिगत निर्णयों और विकास योजनाओं का आधार बनेगा।
महासमुंद जिले में भारत की पहली डिजिटल जनगणना 2027 का पूर्व परीक्षण जारी है। 24 गांवों में मकानसूचीकरण, जियो-टैगिंग और डिजिटल लेआउट मैपिंग का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अधिकारियों की सघन निगरानी में यह ऐतिहासिक जनगणना पूरी तरह डिजिटल रूप में होने जा रही है।
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