उत्पन्ना एकादशी 2025: इन कामों से बन सकता है दुर्भाग्य – जानें तिथि, व्रत नियम और निषेध

उत्पन्ना एकादशी 2025 – देवउठनी एकादशी के बाद आने वाली उत्पन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi 2025)को बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण तिथि माना गया है। यह व्रत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता

Written by: Admin

Published on: November 14, 2025

उत्पन्ना एकादशी 2025 – देवउठनी एकादशी के बाद आने वाली उत्पन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi 2025)को बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण तिथि माना गया है। यह व्रत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। वर्ष 2025 में उत्पन्ना एकादशी शनिवार, 15 नवंबर को पड़ रही है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु एवं एकादशी देवी की विशेष पूजा करने से पापों का विनाश होता है और जीवन में सुख, शांति व सौभाग्य की प्राप्ति होती है। सभी एकादशी व्रतों की तरह यह तिथि साधना, भक्ति और सत्कर्म का संदेश देती है।

उत्पन्ना एकादशी पर क्या न करें? (Utpanna Ekadashi 2025 Par Kya Nahi Karen)

1️⃣ झूठ और छल-कपट से बचें

इस दिन झूठ बोलना, किसी को धोखा देना या गलत कार्य करना अत्यंत अशुभ माना गया है। ऐसे कर्मों से व्रत का फल नष्ट हो जाता है और भगवान विष्णु अप्रसन्न हो सकते हैं।

2️⃣ तामसिक भोजन का सेवन न करें

उत्पन्ना एकादशी पर केवल सात्त्विक भोजन का सेवन करें। इस दिन लहसुन, प्याज, मांस, मछली, अंडा और शराब का सेवन वर्जित है, क्योंकि यह व्रत की पवित्रता को भंग करता है।

3️⃣ गुस्सा, क्रोध और कटु वचन से दूर रहें

क्रोध, अपशब्द, झगड़ा या तीखे व्यवहार से व्रत का प्रभाव कम हो जाता है। मन को शांत और सकारात्मक रखें।

4️⃣ दान से इंकार न करें

इस दिन किसी भी जरूरतमंद को अन्न, कपड़े या धन का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। मांगने वाले को खाली हाथ लौटाना अशुभ माना जाता है।

5️⃣ चावल का सेवन न करें

एकादशी पर चावल खाना वर्जित है। माना जाता है कि चावल खाने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता। द्वादशी के दिन चावल का सेवन किया जा सकता है।

उत्पन्ना एकादशी 2025 का व्रत यदि पूर्ण श्रद्धा, नियम और संयम से रखा जाए तो यह जीवन में सौभाग्य, वैभव और दिव्य आशीर्वाद का मार्ग खोलता है। इस पवित्र दिन नकारात्मक कर्मों से बचें और दान, पूजा एवं भक्ति में मन लगाएं।

सुझाव

  • भगवान विष्णु को तुलसी दल चढ़ाएं
  • विष्णु सहस्रनाम या श्री हरि नाम जप करें
  • संध्या के समय दीपदान अवश्य करें

मंगल की महादशा के शुभ-अशुभ प्रभाव: जानिए राहु, गुरु और शनि की अंतर्दशा में जीवन पर क्या पड़ता है असर

Previous

छत्तीसगढ़ में 917 पदोन्नत प्राचार्यों की काउंसिलिंग, प्रतिदिन दो पालियों में होगी प्रक्रिया

Next

आज का राशिफल 16 नवंबर 2025: मेष से मीन तक जानें किसके चमकेंगे सितारे, किसे मिल सकती है बड़ी सफलता