महासमुंद. “हिंदुत्व केवल शब्द नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा है। जैसे शरीर के बिना प्राण का कोई अस्तित्व नहीं, वैसे ही हिंदुत्व के बिना भारत की कल्पना असंभव है। हिंदुत्व का मूल वसुधैव कुटुम्बकम है। समाज को संगठित करने के लिए ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाना होगा, छुआछूत एक पाप है और हम सब एक ही ईश्वर की संतान हैं। हिंदुत्व भारत को एक सूत्र में पिरोता है। हम सब मिलकर एक ऐसे समाज का निर्माण करें जो वैभवशाली हो, समरस हो और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत हो। संगठित हिंदू ही सुरक्षित और समृद्ध भारत का आधार है।” उक्त बातें सरस्वती शिशु मंदिर तुमगांव में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में मुख्य अतिथि के आसंदी से समाजसेवी मनराखन ठाकुर ने कही।
पंच परिवर्तन के विषय पर अपना विचार रखते हुए महिला वक्ता शशि प्रभा थिटे ने कहा ” राष्ट्र को वैभव के शिखर तक पहुंचाने के लिए समाज में समरसता लाना होगा। मम दीक्षा हिंदू रक्षा के भाव के साथ हर हिंदू को सहोदर मानना होगा। पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में हम अपने संस्कार खो रहे हैं। सप्ताह में कम से कम एक बार पूरा परिवार साथ बैठकर भोजन करें, अपने कुल देवी-देवता की चर्चा करें और बच्चों को गौरवशाली इतिहास की कहानियां सुनाएं। परिवार ही वह पहली पाठशाला है जहां राष्ट्रभक्ति का बीज बोया जाता है।” पर्यावरण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि “पर्यावरण की रक्षा हमारे रसोईघर से शुरू होनी चाहिए। हमें जल का संरक्षण करना है, प्लास्टिक मुक्त जीवन अपनाना है और अपने आंगन में कम से कम एक तुलसी या फलदार वृक्ष लगाना है। प्रकृति बचेगी, तभी संस्कृति बचेगी। स्वदेशी वस्तु, स्वदेशी भाषा एवं स्वदेशी परिधान सहित स्व का बोध ही देश को सुदृढ़ और सशक्त बनाएगा। हमें एक ऐसे अनुशासित समाज का निर्माण करना होगा जो नियमों का पालन भय से नहीं, बल्कि श्रद्धा और जिम्मेदारी से करे।”
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक के प्रांत सह सेवा प्रमुख मोहन साहू ने कहा “यह अवसर आत्म-चिंतन और संकल्प का है। 1925 में विजयादशमी के दिन रोपा गया एक छोटा सा बीज आज वटवृक्ष बन चुका है।
संघ का 100 वां वर्ष केवल एक संगठन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह भारत के ‘स्व’ के जागरण की यात्रा है।
कार्यक्रम का प्रारंभ भारत माता की पूजा अर्चना के पश्चात् जय महामाया मानस मंडली अछोला के मानस मंडली द्वारा मानस गान के साथ हुआ। आयोजन समिति की ओर से राकेश चंद्राकर द्वारा स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए कहा कि ”हिंदू सम्मेलन का उद्देश्य न केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत पर चर्चा करना है, बल्कि समाज में एकता, समरसता और सनातन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है। आप सभी का यहाँ जुड़ना इस संकल्प को और भी दृढ़ बनाता है।”
कार्यक्रम का सफल संचालन पप्पू पटेल एवं आभार प्रदर्शन आयोजन समिति की ओर से मोती साहू ने किया। इस अवसर पर छात्राओं द्वारा देशभक्ति रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में नगर पंचायत उपाध्यक्ष सावित्री निर्मलकर, डिगेश्वरी चंद्राकर, धनेश्वरी साहू, माननीय खंड संघचालक भगोली राम साहू, विभाग धर्मजागरण संयोजक विपिन शर्मा, जिला सह बौद्धिक प्रमुख राधेश्याम सोनी, खंड कार्यवाह चंदन डड़सेना, उमेश भारती गोस्वामी, ओमनारायण शर्मा, विवेक साहू, हर्ष, शुभम, विश्वनाथ धीवर, संतन धृतलहरे, उषा बाई साहू, फगनी बाई, हेमीन, ठाकुर, बुटी बाई ठाकुर, विनोद गहरवाल, शशि साहू, तेजेंद्र शर्मा, कुंदन प्रजापति, शशिकांत साहू, डोमार पटेल, नरेन्द्र साहू, द्रोणा साहू, भुनेश्वर साहू, कीर्ति बघेल, गिरजा दास बघेल, राकेश धीवर, दुकालू ध्रुव, रोशन साहू, उत्तम निर्मलकर, विष्णु धीवर , रामेश्वर आचार्य, राजकुमार यादव, दामिनी निषाद, खुशबू यादव , चित्रेखा, गंगा यादव, कल्पना साहू, लक्ष्मी ध्रुव, मनीषा सोनी, संतोष साहू, खेमराज साहू, शारदा सोनकर, कृष्णा साहू सहित तुमगांव मंडल के 18 गांवों के 450 से भी अधिक संख्या में धर्म प्रेमी एवं देशभक्त उपस्थित थे। भारत माता की आरती के पश्चात् सामूहिक संकल्प वाचन के साथ संगठित हिंदू – समर्थ भारत के जयघोष से कार्यक्रम का समापन किया गया।
वसीयत को लेकर विवाद, पिता और जीजा ने कर दी पिटाई