बाल अधिकार आयोग की सख्ती: महासमुंद में बच्चे से बर्बरता मामले में आरोपी गिरफ्तार
महासमुंद जिले में एक मासूम बच्चे के साथ हुई अमानवीय क्रूरता के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सख्त और त्वरित कार्रवाई से आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित हुई है। यह प्रकरण बाल अधिकारों की रक्षा के लिए आयोग की सक्रिय और संवेदनशील भूमिका का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया है।
झूठे चोरी के आरोप में बच्चे से की गई बर्बरता
आयोग को सूचना मिली थी कि महासमुंद जिले के एक गांव में समाज के एक प्रभावशाली परिवार ने 600 रुपये की चोरी का झूठा आरोप लगाकर एक बच्चे को निर्वस्त्र कर बेरहमी से पीटा। प्रारंभिक जांच में यह आरोप पूरी तरह निराधार पाया गया। सूचना मिलते ही आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा स्वयं देर रात गांव पहुंचीं और पीड़ित परिवार से मिलकर पूरे मामले की गंभीरता से जांच की।
जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि बच्चे के साथ मारपीट के बाद उसके पिता को भी गंभीर रूप से प्रताड़ित किया गया था। मानसिक और सामाजिक दबाव से टूटकर पिता ने आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया और मामले की गंभीरता कई गुना बढ़ गई।
पुलिस प्रशासन पर भी गिरी गाज
मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी की गंभीर लापरवाही सामने आने पर आयोग ने कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा की। पुलिस अधीक्षक महासमुंद द्वारा थानेदार को केवल निंदा की शास्ति दी गई, जिसे आयोग ने अपर्याप्त माना। इसके बाद पुलिस मुख्यालय स्तर पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करवाई गई है।
इस प्रकरण में तीनों आरोपियों के विरुद्ध चालान प्रस्तुत किया जा चुका है और मुख्य आरोपी को जनवरी माह के मध्य तक न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108, 127(2), 115(2) और 351(2) के तहत अपराध दर्ज कर मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
पीड़ित बच्चे के पुनर्वास के निर्देश
आयोग ने बाल कल्याण समिति और जिला बाल संरक्षण दल को निर्देशित किया है कि पीड़ित बच्चे की संपूर्ण देखभाल, शिक्षा, पुनर्वास और पीड़ित क्षतिपूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि न्यायालयीन प्रकरण में किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 और यदि बाल श्रम से जुड़ा कोई तथ्य सामने आता है तो बाल श्रम प्रतिषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं को भी अभियोग पत्र में शामिल किया जाए।
आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की हिंसा, उत्पीड़न या शोषण को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध कानून के तहत कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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