नई दिल्ली. ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए चीन की एक प्रमुख रिफाइनरी और कई जहाजों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरान की तेल से होने वाली आय को कम करना और उसके वैश्विक प्रभाव को सीमित करना है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, यह कदम सीधे तौर पर ईरान की आर्थिक ताकत को कमजोर करने के लिए उठाया गया है।
चीन की हेंगली रिफाइनरी क्यों बनी निशाना
अमेरिका ने चीन की प्रमुख कंपनी Hengli Petrochemical (Dalian) Refinery Company Limited पर कार्रवाई की है, जिसे ईरान से कच्चा तेल खरीदने वाली बड़ी कंपनियों में गिना जाता है। अधिकारियों का कहना है कि यह रिफाइनरी प्रतिबंधित नेटवर्क के जरिए तेल खरीद रही थी, जिससे ईरानी सरकार को भारी आर्थिक फायदा हो रहा था।
अमेरिका का उद्देश्य: ईरान की आय पर रोक
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने स्पष्ट किया कि यह आर्थिक दबाव ईरान की आक्रामक गतिविधियों को रोकने और उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को सीमित करने के लिए जरूरी है। उनका कहना है कि अमेरिका आगे भी उन सभी कंपनियों, जहाजों और बिचौलियों पर कार्रवाई करेगा जो ईरान के तेल को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं।
‘शैडो फ्लीट’ पर सख्ती, 40 से ज्यादा जहाज ब्लैकलिस्ट
इस कार्रवाई के तहत करीब 40 शिपिंग कंपनियों और जहाजों को निशाना बनाया गया है, जिन्हें ईरान के तथाकथित “शैडो फ्लीट” का हिस्सा माना जाता है। इसके अलावा 19 और जहाजों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, जो कच्चा तेल, एलपीजी और अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पादों को विभिन्न देशों तक पहुंचा रहे थे।
चीन की ‘टीपॉट’ रिफाइनरियां क्यों अहम हैं
अमेरिका का दावा है कि चीन की स्वतंत्र रिफाइनरियां, जिन्हें “टीपॉट्स” कहा जाता है, ईरान के कच्चे तेल की सबसे बड़ी खरीदार हैं। इनमें हेंगली दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है, जिसने अरबों डॉलर का तेल खरीदा है। जांच में यह भी सामने आया कि यह कारोबार प्रतिबंधित चैनलों और सैन्य नेटवर्क से जुड़ा हुआ था।
अमेरिकी प्रतिबंध कैसे काम करते हैं
अमेरिकी कानून के तहत जिन व्यक्तियों या कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया जाता है, उनकी अमेरिका में मौजूद संपत्तियां फ्रीज कर दी जाती हैं। साथ ही अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों को उनके साथ लेन-देन करने से रोक दिया जाता है। इतना ही नहीं, जो विदेशी कंपनियां इस तरह के नेटवर्क का हिस्सा बनती हैं, उन्हें भी सख्त सजा का सामना करना पड़ सकता है।
2025 से अब तक 1000 से ज्यादा कार्रवाई
ट्रेजरी विभाग के अनुसार, फरवरी 2025 से अब तक ईरान से जुड़े 1000 से अधिक व्यक्तियों, कंपनियों, जहाजों और विमानों पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। यह दिखाता है कि अमेरिका लगातार ईरान की आर्थिक ताकत को कमजोर करने की दिशा में काम कर रहा है। देश-विदेश की ताजा खबरें पढ़ें Babapost Hindi News पर











