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Monsoon 2026: गंगरेल समेत महानदी परियोजना के चारों बांधों में रिकॉर्ड जलभराव, किसानों को बड़ी राहत

On: July 10, 2026
Mahanadi Pariyojana
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Mansoon 026: छत्तीसगढ़ में सक्रिय मानसून ने इस बार जल संसाधनों को नई ऊर्जा दे दी है। लगातार हो रही झमाझम बारिश के चलते महानदी परियोजना (MRP) के सभी प्रमुख जलाशयों में तेजी से पानी की आवक दर्ज की जा रही है। धमतरी जिले में स्थित प्रदेश की लाइफलाइन माने जाने वाले गंगरेल (रविशंकर सागर) बांध, मुरूमसिल्ली, दूधावा और सोंढूर जलाशय का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे न केवल किसानों को खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त सिंचाई जल मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है, बल्कि राजधानी रायपुर समेत कई शहरों की पेयजल जरूरतों को लेकर भी राहत मिली है।

गंगरेल बांध में तेजी से बढ़ा जलस्तर

जल संसाधन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण जलाशयों में शामिल गंगरेल (रविशंकर सागर) बांध का पूर्ण जलभराव स्तर (FRL) 347.75 मीटर है। वर्तमान में इसका जलस्तर बढ़कर 343.75 मीटर तक पहुंच गया है। बांध में 399.81 मिलियन घनमीटर उपयोगी (लाइव) जल संग्रहित हो चुका है, जो इसकी कुल क्षमता का लगभग 74.68 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटों के दौरान कैचमेंट एरिया से लगातार पानी आने के कारण जलभराव की रफ्तार और तेज हो गई है।

मुरूमसिल्ली, दूधावा और सोंढूर जलाशय भी तेजी से भर रहे

मानसून की लगातार सक्रियता का असर अन्य प्रमुख जलाशयों पर भी साफ दिखाई दे रहा है।

  • मुरूमसिल्ली जलाशय का जलस्तर बढ़कर 423.21 मीटर दर्ज किया गया है। यहां 206.66 मिलियन घनमीटर यानी करीब 72.74 प्रतिशत जल संग्रहित हो चुका है।
  • दूधावा बांध का जलस्तर 1388.48 मीटर तक पहुंच गया है, जहां वर्तमान में 137.98 मिलियन घनमीटर पानी संग्रहित है।
  • सोंढूर जलाशय का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है और यह 468.30 मीटर पर पहुंच चुका है। यहां 137.89 मिलियन घनमीटर पानी जमा हो चुका है।

लगातार हो रही बारिश के कारण चारों जलाशयों में जलभराव की स्थिति लगातार बेहतर होती जा रही है।

अगले कुछ दिनों में लबालब हो सकते हैं सभी बांध

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि मानसून की मौजूदा रफ्तार बनी रही तो महानदी परियोजना के सभी प्रमुख बांध जल्द ही अपनी पूर्ण क्षमता के करीब पहुंच सकते हैं। विभाग ने इंजीनियरों और मैदानी अमले को 24 घंटे जलस्तर की निगरानी रखने तथा बांधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जरूरत पड़ने पर जल प्रबंधन के तहत नियंत्रित तरीके से पानी छोड़े जाने की रणनीति भी तैयार की जा रही है।

किसानों के लिए राहत की खबर

मानसून की अच्छी बारिश ने प्रदेश के किसानों की सबसे बड़ी चिंता दूर कर दी है। अब खरीफ फसलों के लिए सिंचाई जल की उपलब्धता पर्याप्त रहने की संभावना है। महानदी परियोजना से जुड़ी नहरों के माध्यम से अंतिम छोर तक स्थित खेतों को भी समय पर पानी मिल सकेगा। इससे धान समेत अन्य खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।

रायपुर समेत कई शहरों की पेयजल व्यवस्था होगी मजबूत

गंगरेल और अन्य प्रमुख जलाशयों में बढ़ते जलभराव का लाभ केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। राजधानी रायपुर सहित कई शहरों की पेयजल आपूर्ति भी अब अधिक सुरक्षित मानी जा रही है। पर्याप्त जल भंडारण होने से आने वाले महीनों में पानी की कमी की आशंका काफी हद तक समाप्त हो गई है।

मानसून की यह मेहरबानी छत्तीसगढ़ के जल संसाधनों, कृषि व्यवस्था और शहरी पेयजल प्रबंधन के लिए बेहद सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

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