महासमुंद. छत्तीसगढ़ के आदिवासी लोक कला नर्तक दलों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने और राज्य स्तर पर पहचान बनाने का सुनहरा अवसर है। शहीद वीर नारायण सिंह स्मृति आदिवासी लोक कला महोत्सव पुरस्कार 2026-27 के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इस प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दलों को अधिकतम एक लाख रुपये तक की पुरस्कार राशि दी जाएगी। इच्छुक दलों को निर्धारित प्रारूप में आवश्यक दस्तावेजों के साथ 25 नवंबर 2026 को शाम 5 बजे तक अपनी प्रविष्टि जमा करनी होगी।
सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, महासमुंद के अनुसार, निर्धारित समय सीमा के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। इसलिए प्रतियोगिता में शामिल होने के इच्छुक आदिवासी लोक कला नर्तक दलों को समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
आदिवासी लोक कला महोत्सव में मिलेंगे आकर्षक पुरस्कार
शहीद वीर नारायण सिंह स्मृति आदिवासी लोक कला महोत्सव के तहत राज्य स्तरीय नृत्य प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसमें चयनित आदिवासी नर्तक दल अपने पारंपरिक लोक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। निर्णायक मंडल के मूल्यांकन के आधार पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले तीन दलों को सम्मानित किया जाएगा।
पुरस्कार राशि का विवरण इस प्रकार है:
- प्रथम पुरस्कार: 1,00,000 रुपये
- द्वितीय पुरस्कार: 50,000 रुपये
- तृतीय पुरस्कार: 25,000 रुपये
यह आयोजन आदिवासी लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले दलों को प्रोत्साहित करने का अवसर प्रदान करेगा।
25 नवंबर तक कहां जमा करना होगा आवेदन?
आवेदन करने के इच्छुक दलों को निर्धारित प्रारूप और जरूरी प्रमाणों के साथ अपनी प्रविष्टि कार्यालय सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, महासमुंद में जमा करनी होगी।
- आवेदन की अंतिम तिथि: 25 नवंबर 2026
- अंतिम समय: शाम 5 बजे तक
- आवेदन का स्थान: कार्यालय सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, महासमुंद
- प्रतियोगिता का वर्ष: 2026-27
- पात्रता: छत्तीसगढ़ राज्य के आदिवासी लोक कला नर्तक दल
ध्यान रहे कि अंतिम तिथि और समय के बाद पहुंचने वाली प्रविष्टियां स्वीकार नहीं की जाएंगी। आवेदन जमा करने से पहले निर्धारित प्रारूप और दस्तावेजों की पूर्णता सुनिश्चित करना जरूरी है।
आवेदन के साथ कौन-कौन से दस्तावेज देने होंगे?
इस पुरस्कार के लिए केवल नृत्य प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि आदिवासी समाज में सामाजिक चेतना और सामाजिक उत्थान के लिए किए गए कार्यों को भी महत्व दिया जाएगा। इसलिए आवेदन के साथ दल की उपलब्धियों और योगदान का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
प्रविष्टि में निम्नलिखित जानकारियां शामिल करनी होंगी:
- दल का संपूर्ण परिचय: आदिवासी लोक कला नर्तक दल की पृष्ठभूमि और गतिविधियों का विवरण।
- सामाजिक योगदान: आदिवासी समाज में सामाजिक चेतना जगाने और सामाजिक उत्थान के लिए किए गए कार्यों की विस्तृत जानकारी।
- पूर्व में प्राप्त पुरस्कार: दल को पहले मिले पुरस्कारों और सम्मानों का विवरण।
- प्रकाशित प्रतिवेदन: दल के उत्कृष्ट कार्यों के संबंध में प्रकाशित रिपोर्ट या प्रतिवेदन की जानकारी और उनकी एक-एक प्रति।
- प्रशंसा एवं टिप्पणियां: सामाजिक जागरूकता और सामाजिक विकास के क्षेत्र में किए गए कार्यों पर प्रतिष्ठित व्यक्तियों अथवा पत्र-पत्रिकाओं की टिप्पणियों की सत्यापित प्रतियां।
प्रविष्टि में दी गई जानकारी, तथ्यों, निष्कर्षों और प्रमाणों की जिम्मेदारी संबंधित आवेदनकर्ता की होगी। प्रस्तुत दस्तावेजों और जानकारियों का सत्यापन सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, महासमुंद द्वारा किया जाएगा।
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हर जिले से चुना जाएगा एक सर्वश्रेष्ठ आदिवासी नर्तक दल
पुरस्कार प्रक्रिया के तहत छत्तीसगढ़ के प्रत्येक जिले से सर्वश्रेष्ठ आदिवासी लोक कला नर्तक दल का चयन किया जाएगा। यदि किसी जिले से एक से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं, तो चयन प्रक्रिया के लिए समिति गठित की जाएगी।
यह समिति कलेक्टर के मार्गदर्शन में सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास तथा लोक कला के क्षेत्र में रुचि रखने वाले विशेषज्ञ सदस्यों की भागीदारी से प्रविष्टियों का परीक्षण करेगी। समिति जिले से एक सर्वश्रेष्ठ दल का चयन कर उसकी प्रविष्टि राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए भेजेगी।
इसके बाद राज्य स्तर पर चयनित दलों के बीच नृत्य प्रतियोगिता आयोजित होगी। गठित निर्णायक मंडल प्रतिभागी दलों के प्रदर्शन का आकलन करेगा और उसी आधार पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार के विजेताओं का चयन किया जाएगा।
आदिवासी संस्कृति और सामाजिक जागरूकता को मिलेगा प्रोत्साहन
शहीद वीर नारायण सिंह स्मृति आदिवासी लोक कला महोत्सव पुरस्कार का उद्देश्य पारंपरिक आदिवासी लोक कला को प्रोत्साहित करने के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले दलों के योगदान को पहचान देना भी है। इस प्रतियोगिता में दलों की सांस्कृतिक प्रतिभा के साथ सामाजिक चेतना, जनजागरूकता और सामाजिक उत्थान के लिए किए गए प्रयासों का विवरण भी महत्वपूर्ण रहेगा।
छत्तीसगढ़ के इच्छुक आदिवासी लोक कला नर्तक दलों के लिए यह अपनी उपलब्धियों को राज्य स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर है। ऐसे में पात्र दलों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना आवश्यक दस्तावेज तैयार कर निर्धारित समय तक अपनी प्रविष्टि जमा कर दें। खबरें पढ़ने के लिए विजिट करें babapost.in पर।

