ग्रीष्मकालीन धान की जगह दलहन-तिलहन, मक्का एवं रागी की खेती को दें बढ़ावा – महासमुंद कलेक्टर

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महासमुंद. जिले में जल संरक्षण और किसानों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से प्रशासन अब ग्रीष्मकालीन धान की खेती का रकबा कम करने और वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठा रहा है। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को दलहन, तिलहन, मक्का और रागी की खेती के प्रति किसानों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि खेती में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देकर पानी की बचत के साथ किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है।

जिला पंचायत के सभाकक्ष में आयोजित कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने शासन की विभिन्न कृषि योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों को किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने को कहा।

गर्मी में धान की जगह दलहन-तिलहन की खेती पर जोर

बैठक में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कहा कि ग्रीष्मकालीन धान की खेती में पानी की अधिक खपत होती है। ऐसे में जल संसाधनों पर अनावश्यक दबाव कम करने के लिए किसानों को वैकल्पिक फसलें अपनाने के लिए जागरूक करना जरूरी है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को उनकी जमीन की मिट्टी, उपलब्ध जल संसाधन और बाजार की मांग के अनुसार दलहन, तिलहन, मक्का एवं रागी जैसी फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया जाए। इससे न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि जिले में कृषि विविधीकरण की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

कृषक उन्नति योजना में धान छोड़ने पर मिलेंगे 15 हजार रुपये प्रति एकड़

कलेक्टर ने कृषक उन्नति योजना के माध्यम से किसानों को धान के स्थान पर दूसरी फसलें लेने के लिए प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि योजना के प्रावधानों के अनुसार धान के बदले अन्य फसल लेने पर किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये तथा धान के अतिरिक्त अन्य फसल लेने पर प्रति एकड़ 10 हजार रुपये की सहायता राशि का प्रावधान है।

उन्होंने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को इन आर्थिक प्रावधानों की जानकारी दें। किसानों को योजना का लाभ समझाकर वैकल्पिक खेती के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि जिले में धान पर निर्भरता कम करने के साथ फसल विविधीकरण को गति मिल सके।

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पीएम-आशा के तहत दलहन और तिलहन खरीदी की तैयारी

बैठक में प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के तहत जिले में दलहन एवं तिलहन फसलों के उपार्जन की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में किसान दलहन और तिलहन की खेती करते हैं, वहां उनकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त खरीदी केंद्रों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने उपार्जन व्यवस्था को किसानों के अनुकूल बनाने और उन्हें अपनी उपज बेचने में किसी तरह की परेशानी नहीं होने देने पर जोर दिया।

इसके अलावा जिले की पड़त भूमि और रबी फसल क्षेत्र का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।

बिना लाइसेंस खाद-बीज और कीटनाशक बेचने वालों पर होगी कार्रवाई

किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध कराने के लिए कलेक्टर ने खाद, बीज और कीटनाशक विक्रेताओं की जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले में बिना वैध लाइसेंस के उर्वरक, बीज और कीटनाशक की दुकानें संचालित नहीं होनी चाहिए।

यदि कोई दुकानदार बिना लाइसेंस के इन कृषि उत्पादों का विक्रय करते पाया जाता है, तो उसके खिलाफ संबंधित उर्वरक, बीज एवं कीटनाशक अधिनियमों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के शेष हितग्राहियों की ई-केवाईसी, आधार सीडिंग और भूमि सीडिंग का काम भी प्राथमिकता से पूरा कराने के निर्देश दिए, ताकि पात्र किसानों को योजना की राशि मिलने में किसी तरह की बाधा न आए।

महासमुंद को कृषि के क्षेत्र में मिलेगी नई पहचान

कृषि को अधिक लाभकारी और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर ने कृषि विज्ञान केंद्र भलेसर के वैज्ञानिकों के साथ समन्वय स्थापित करने को कहा। उन्होंने जिले की मिट्टी, उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों और बाजार की मांग का अध्ययन कर दो से तीन ऐसी विशिष्ट कृषि गतिविधियों का चयन करने के निर्देश दिए, जिन्हें मॉडल के रूप में विकसित किया जा सके।

कलेक्टर ने कहा कि इन गतिविधियों के सफल क्रियान्वयन से महासमुंद जिले को कृषि क्षेत्र में एक अलग पहचान दिलाई जा सकती है। इससे किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने, उत्पादन बढ़ाने और अपनी उपज के लिए बेहतर विपणन अवसर प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

कृषि विभाग के अधिकारी रहे मौजूद

इस समीक्षा बैठक में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुपमा आनंद, उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप, सहायक संचालक कृषि महासमुंद, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के नोडल अधिकारी तथा कृषि विज्ञान केंद्र भलेसर के प्रमुख वैज्ञानिक सहित कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में जल संरक्षण, फसल विविधीकरण, कृषि योजनाओं का लाभ, किसानों की आय में वृद्धि और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। प्रशासन की इस पहल से जिले में कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों को प्रोत्साहन मिलने और टिकाऊ कृषि व्यवस्था विकसित करने की उम्मीद है।खबरें पढ़ने के लिए विजिट करें babapost.in पर।

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