रायपुर. छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग ने राज्य में श्रम सुधारों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘मजदूरी संहिता (छत्तीसगढ़) नियम, 2026’ की अंतिम अधिसूचना 28 अक्टूबर 2026 को राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित कर दी है। इसके साथ ही राज्य में मजदूरी से जुड़ी नई कानूनी व्यवस्था प्रभावी हो गई है।
पुरानी व्यवस्था समाप्त, अब नए नियमों से तय होगी मजदूरी
नई नियमावली के लागू होने से छत्तीसगढ़ में न्यूनतम वेतन और वेतन भुगतान से जुड़ी व्यवस्थाएं पूरी तरह बदल गई हैं। इस नई व्यवस्था के तहत दशकों पुराने न्यूनतम वेतन (छत्तीसगढ़) नियम, 1958 और छत्तीसगढ़ वेतन भुगतान नियम, 1962 को आधिकारिक तौर पर प्रतिस्थापित (रिप्लेस) कर दिया गया है।
राज्य सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत करना और कार्यस्थलों पर वेतन भुगतान को अधिक पारदर्शी बनाना है।
प्रक्रिया और जनता के सुझावों पर आधारित निर्णय
श्रम विभाग ने इस नई व्यवस्था को पूरी तरह व्यावहारिक बनाने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई थी:
- प्रारूप प्रकाशन: इन नियमों का शुरुआती प्रारूप 13 अप्रैल 2026 को राजपत्र में जारी किया गया था।
- सुझाव आमंत्रित: आम नागरिकों, श्रमिक संगठनों, नियोक्ताओं और विभिन्न हितधारकों से 45 दिनों के भीतर आपत्तियां एवं सुझाव मांगे गए थे।
- अंतिम मुहर: सभी प्राप्त सुझावों और आपत्तियों की गहन समीक्षा के बाद ही इन अंतिम नियमों को अधिसूचित किया गया है।
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नई मजदूरी संहिता के मुख्य बिंदु
- वेतन निर्धारण और सुरक्षा: राज्य स्तर पर वेतन निर्धारण, न्यूनतम मजदूरी, और बोनस से जुड़े प्रावधानों को एक मजबूत कानूनी ढांचा मिला है।
- श्रमिक अधिकारों का संरक्षण: श्रमिकों को समय पर और पारदर्शी तरीके से वेतन मिले, इसके लिए कड़े वैधानिक प्रावधान तय किए गए हैं।
- नियोक्ताओं की जिम्मेदारी: नियोक्ताओं के लिए वैधानिक जिम्मेदारियों का पालन करना अनिवार्य किया गया है, जिससे कार्य संस्कृति में सुधार होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मजदूरी संहिता, 2019’ के अंतर्गत छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम राज्य के श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारने और एक निष्पक्ष श्रम व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। खबरें पढ़ने के लिए विजिट करें babapost.in पर।

