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सरकार ने 23 चिप-डिजाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी, सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए उठाया बड़ा कदम

On: August 22, 2025
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Technology
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने देश की सेमीकंडक्टर डिज़ाइन क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) योजना के तहत 23 चिप-डिज़ाइन परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है।

घरेलू स्टार्टअप और एमएसएमई द्वारा संचालित इन परियोजनाओं को निगरानी कैमरे, ऊर्जा मीटर, माइक्रोप्रोसेसर आईपी और नेटवर्किंग अनुप्रयोगों जैसे क्षेत्रों के लिए स्वदेशी चिप्स और सिस्टम-ऑन-चिप (एसओसी) समाधान विकसित करने हेतु समर्थन प्राप्त हो रहा है। 72 कंपनियों को अपनी चिप डिज़ाइन परियोजनाओं के लिए उद्योग-मानक इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन ऑटोमेशन (ईडीए) उपकरणों तक पहुंच प्राप्त हुई है।

फेबलेस सेमीकंडक्टर कंपनी, वर्वेसेमी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स ने आज उन्नत एकीकृत सर्किट (आईसी) के अपने आगामी पोर्टफोलियो की घोषणा की, जिसे देश की सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता में तेजी लाने और वैश्विक नवाचार को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

वर्ष 2017 में स्थापित, वर्वेसेमी उन पहली भारतीय कंपनियों में से एक है जो सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा (आईपी) का वैश्विक स्तर पर निर्यात करती है, और इसकी मशीन लर्निंग-संचालित एनालॉग चेन आईपी, अग्रणी अंतरराष्ट्रीय निर्माताओं के उत्पादों में अंतर्निहित हैं।

वर्वेसेमी 110 से ज़्यादा आईपी, 25 आईसी एसकेयू, 10 पेटेंट और 5 व्यापार रहस्यों के पोर्टफोलियो के साथ, अंतरिक्ष, रक्षा, औद्योगिक और स्मार्ट ऊर्जा क्षेत्रों में अनुप्रयोगों को सशक्त बना रही है, और वर्तमान में दुनिया भर के ग्राहकों द्वारा कई आईसी का मूल्यांकन किया जा रहा है।

सरकार की डीएलआई योजना (DLI Scheme) के तहत अनुमोदित कंपनियों के पहले समूह में से एक और चिप्स टू स्टार्टअप (सी2एस) कार्यक्रम के तहत भी, वर्वेसेमी देश में डिजाइन किए गए चिप्स विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है जिसका उद्देश्य आत्मनिर्भरता और नवाचार को बढ़ावा देना है।

वर्वेसेमी द्वारा चिप्स/एसओसी का रोडमैप: वर्ष 2026 के अंत / वर्ष 2027 की शुरुआत में बड़े पैमाने पर उत्पादन का लक्ष्य

वर्वेसेमी के रोडमैप में कई उल्लेखनीय आईसी शामिल हैं जिन्हें कई महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है।

बीएलडीसी नियंत्रक अनुप्रयोग विशिष्ट एकीकृत चिप (एएसआईसी) को वर्वेसेमी द्वारा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सी2एस कार्यक्रम के तहत डिजाइन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य पंखे और अन्य छोटे मोटर उपकरणों के अनुप्रयोगों पर केंद्रित है, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और इनके नमूने वर्ष 2026 में आने की उम्मीद है।

डी.एल.आई. द्वारा मान्यता प्राप्त परियोजना के रूप में अनुमोदित प्रिसिजन मोटर-नियंत्रण समाधानों के लिए ए.एस.आई.सी., ई.वी., ड्रोन और औद्योगिक स्वचालन के लिए सिलिकॉन पर केंद्रित है, तथा इनके नमूने भी वर्ष 2026 में आने का लक्ष्य रखा गया है।

अन्य महत्वपूर्ण उत्पाद रोडमैप में ये शामिल हैं –

अंतरिक्ष और एवियोनिक्स के लिए बहुक्रियाशील डेटा अधिग्रहण प्रणाली हेतु एएसआईसी , उन्नत मशीन लर्निंग द्वारा संचालित और मिशन-महत्वपूर्ण एयरोस्पेस अनुप्रयोगों के लिए डिज़ाइन किया गया हैं, जिसके इंजीनियरिंग नमूने वर्ष 2026 में उपलब्ध होंगे।

भार मापने वाले पैमाने और ब्रिज सेंसर अनुप्रयोगों के लिए एएसआईसी अगली पीढ़ी के वज़न मापने वाले सिस्टम और फ़ोर्स टच उपकरणों को अत्यंत उच्च परिशुद्धता और विश्वसनीयता के साथ सक्षम बना रहा है। इस एकीकृत सर्किट के नमूने का परीक्षण एशिया भर के प्रमुख साझेदारों के साथ किया जा रहा है, और इसके इंजीनियरिंग नमूने वर्ष 2025 के अंत तक उपलब्ध होंगे।

स्मार्ट ऊर्जा मीटरिंग अनुप्रयोगों के लिए एएसआईसी को भारत में डिज़ाइन किया जा रहा है ताकि अति-सटीक, उच्च-गति ऊर्जा मापन और पूर्वानुमानित रखरखाव क्षमताएँ प्रदान की जा सकें। क्लास 0.2एस परिशुद्धता मानकों के अनुरूप मल्टी-चैनल सेंसिंग की विशेषता वाला यह एकीकृत सर्किट अगली पीढ़ी की स्मार्ट ऊर्जा प्रणालियों के लिए मज़बूत और विश्वसनीय प्रदर्शन सुनिश्चित करता है, जिसके नमूने वर्ष 2025 के अंत तक उपलब्ध होंगे।

प्रत्येक चिप में अंतर्निहित बुद्धिमत्ता-

वर्वेसेमी के आईसी एम्बेडेड मशीन लर्निंग द्वारा संचालित होते हैं , जो स्व-उपचार प्रणालियों, विफलता-सुरक्षित विश्वसनीयता और बेहतर निर्माण परिणामों को सक्षम बनाते हैं । यह एकीकृत सर्किट ऊर्जा दक्षता और सटीकता को पारंपरिक सीमाओं से परे वर्वेसेमी के चिप्स को अधिक स्मार्ट, सुरक्षित और कुशल बनाते हैं।

वर्वेसेमी के संस्थापक और सीईओ राकेश मलिक ने कहा, “ये नवाचार देश के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे। रणनीतिक और उपभोक्ता बाज़ारों के लिए देश में उच्च क्षमता वाले आईसी का निर्माण न केवल आयात प्रतिस्थापन को बढ़ावा दे रहा है बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अग्रणी होने की देश की क्षमता को भी दर्शाता हैं।

वर्वेसेमी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स के संस्थापक और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी, प्रताप नारायण सिंह ने कहा, वर्वेसेमी में, हम उन्नत सिग्नल-चेन डिज़ाइन को मशीन लर्निंग के साथ एकीकृत करते हैं ताकि समस्याओं का अनुकूली अंशांकन और पूर्वानुमानित निदान प्रदान किया जा सके। “हमारे मल्टी-चैनल डेटा अधिग्रहण और औद्योगिक अनुप्रयोग आईसी ने एयरोस्पेस, औद्योगिक और उपभोक्ता बाजारों में सटीकता, दक्षता और विश्वसनीयता के नए मानक स्थापित किए हैं।”

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की समूह समन्वयक (आर एंड डी), श्रीमती सुनीता वर्मा ने कहा। “भारत की महत्वाकांक्षा सेमीकंडक्टर डिज़ाइन में विश्व में अग्रणी बनने की है, और एक ऐसे भविष्य की कल्पना है जहाँ दुनिया के हर उपकरण में भारत में डिज़ाइन की गई चिप होगी”।

वर्वेसेमी के बारे में

वर्वेसेमी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स एक फैबलेस सेमीकंडक्टर कंपनी है जो उच्च-प्रदर्शन वाले एनालॉग आईपी और एएसआईसी में विशेषज्ञता रखती है । पांच फाउंड्री और 20 से ज़्यादा तकनीकी नोड्स में नवाचारों के साथ, वर्वेसेमी दक्षता, शक्ति और क्षेत्र में 10 गुना तक सुधार प्रदान करती है । 5जी, वाई-फाई 6/7, ऊर्जा, मोटर नियंत्रण और एयरोस्पेस क्षेत्र में वैश्विक निर्माताओं की विश्वसनीयता प्राप्त, वर्वेसेमी वैश्विक स्तर पर भारत में डिज़ाइन किए गए सेमीकंडक्टर समाधानों में अग्रणी बनी हुई है।

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