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भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा: स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘मंगरोल’ 12 अक्टूबर को बेड़े में होगा शामिल

On: October 10, 2026
INS Mangrol ASW SWC

नई दिल्ली. भारतीय नौसेना अपनी तटीय और उथले पानी की युद्ध क्षमताओं को नया आयाम देने जा रही है। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), कोच्चि द्वारा निर्मित तीसरा पनडुब्बी रोधी युद्धपोत शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) ‘मंगरोल’ 12 अक्टूबर 2026 को नौसेना डॉकयार्ड, मुंबई में आधिकारिक रूप से भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा।

इस ऐतिहासिक समारोह की अध्यक्षता पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन करेंगे। कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय, कोचीन शिपयार्ड, सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी और स्वदेशी रक्षा उपकरण निर्माताओं के प्रतिनिधि भाग लेंगे।

विरासत का सम्मान: जूनागढ़ के तटीय शहर से मिला नाम

गुजरात के जूनागढ़ जिले के प्रमुख मछली पकड़ने वाले बंदरगाह और तटीय शहर के नाम पर रखा गया ‘मंगरोल’, पूर्ववर्ती आईएनएस मंगरोल (M 85) की शानदार विरासत को आगे बढ़ाता है। पूर्ववर्ती आईएनएस मंगरोल एक सुरंगरोधी पोत (Minesweeper) था, जिसने 07 अप्रैल 2004 तक देश की सेवा की थी। अपने पुराने युद्धपोतों के नामों और विरासत को संजोकर रखना भारतीय नौसेना की एक गौरवशाली परंपरा रही है।

‘आत्मनिर्भर भारत’ की मिसाल: 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री

भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहलों के तहत निर्मित यह युद्धपोत देश की बढ़ती रक्षा निर्माण क्षमताओं का सशक्त प्रतीक है।

प्रमुख विशेषताएंविवरण
निर्माताकोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), कोच्चि
स्वदेशी सामग्री (Indigenisation)80% से अधिक
इंजन प्रणालीवाटरजेट प्रोपल्शन वाले 3 डीजल इंजन
मुख्य भूमिकाउथले पानी में पनडुब्बी रोधी युद्ध और तटीय सुरक्षा
कमीशनिंग तिथि12 अक्टूबर 2026
कमीशनिंग स्थलनौसेना डॉकयार्ड, मुंबई

आधुनिक हथियारों और उन्नत सेंसरों से लैस

उथले पानी में दुश्मन की पनडुब्बियों और पानी के भीतर के खतरों को बेअसर करने के लिए ‘मंगरोल’ में अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है:

  • सोनार सिस्टम: पानी के नीचे सटीक निगरानी के लिए ‘अभय’ हल-माउंटेड सोनार।
  • हमलावर हथियार: हल्के वजन के टॉरपीडो और स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर।
  • सुरक्षा चक्र: दुश्मन के टॉरपीडो हमलों को नाकाम करने के लिए ‘मारीच’ उन्नत टॉरपीडो डिकॉय सिस्टम।
  • प्रोपल्शन तकनीक: तीन शक्तिशाली डीजल इंजनों और वाटरजेट प्रोपल्शन के साथ यह जहाज़ उथले पानी में भी तेज़ी से मुड़ने और गति पकड़ने में सक्षम है।

तटीय सुरक्षा और नौसैनिक अभियानों को मिलेगी नई धार

समुद्री सुरक्षा परिदृश्य में पानी के नीचे बढ़ते खतरों को देखते हुए ‘मंगरोल’ का बेड़े में शामिल होना सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है:

  1. तटीय सुरक्षा मजबूत: जहाँ बड़े युद्धपोत उथले पानी के कारण आसानी से काम नहीं कर पाते, वहाँ मंगरोल प्रभावी ढंग से गश्त करेगा।
  2. संयुक्त अभियान: यह गश्ती विमानों, नौसैनिक हेलीकॉप्टरों और अन्य युद्धपोतों के साथ वास्तविक समय में तालमेल बिठाकर पनडुब्बी रोधी अभियानों को अंजाम देगा।
  3. बहुआयामी क्षमताएं: यह पोत सुरंग युद्ध (Mine Warfare), कम तीव्रता वाले समुद्री ऑपरेशन और बंदरगाहों के सुरक्षा चक्र को मजबूत करने में सक्षम है।

मंगरोल का भारतीय नौसेना में प्रवेश न केवल अभियानगत तत्परता (Operational Readiness) को बढ़ाएगा, बल्कि जहाज निर्माण के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प को भी नई ऊंचाई देगा। खबरें पढ़ने के लिए babapost.in पर विजिट करें।

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