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LPG गबन का बड़ा खुलासा, जीपीएस डेटा से खुला पूरा खेल

On: May 2, 2026
LPG Case
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महासमुंद. छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में पुलिस ने एलपीजी गैस गबन के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए करोड़ों रुपये की चोरी का पर्दाफाश किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि सुरक्षित रख-रखाव के लिए निजी कंपनी को सौंपे गए गैस टैंकरों से भारी मात्रा में एलपीजी गैस निकालकर अवैध रूप से बाजार में बेची गई। इस पूरे मामले की अनुमानित कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये बताई जा रही है।

पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में की गई जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अधिकारियों के अनुसार दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा पुलिस ने छह एलपीजी कैप्सूल टैंकर जब्त किए थे। गर्मी के मौसम में सुरक्षा कारणों को देखते हुए जिला प्रशासन ने इन टैंकरों को 30 मार्च 2026 को रायपुर के उरला स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी के तहत सौंपा था।

जांच के दौरान पुलिस ने टैंकरों के जीपीएस रिकॉर्ड खंगाले, जिसमें पता चला कि 31 मार्च से 6 अप्रैल के बीच देर रात सभी छह टैंकरों से गैस निकाली गई। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने गैस की बढ़ती मांग और ऊंची कीमतों का फायदा उठाते हुए चोरी की गैस को रायपुर की अलग-अलग एजेंसियों को बाजार मूल्य से डेढ़ से दो गुना अधिक कीमत पर बेचा।

मामले में ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष सिंह ठाकुर, डायरेक्टर सार्थक ठाकुर और कंपनी के मैनेजर पर साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरी कार्रवाई योजनाबद्ध तरीके से की गई थी ताकि किसी को संदेह न हो।

फर्जी दस्तावेज बनाकर छिपाई गई चोरी

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि सिंघोड़ा से अभनपुर तक लगभग 200 किलोमीटर के सफर के दौरान कहीं भी टैंकरों का आधिकारिक वजन नहीं कराया गया। आरोप है कि गैस निकालने के बाद टैंकरों का वजन करवाकर फर्जी रिकॉर्ड तैयार किए गए।

रिकॉर्ड की जांच में पुलिस को बड़ा अंतर मिला। कंपनी ने अप्रैल महीने में केवल 47 टन गैस खरीदी थी, जबकि बिक्री रिकॉर्ड में 107 टन गैस दिखाई गई। अधिकारियों के अनुसार अतिरिक्त 60 टन गैस पूरी तरह अवैध थी और इसे चोरी की श्रेणी में माना गया है।

पुलिस ने जब्त किए टैंकर, सिलेंडर और इलेक्ट्रॉनिक सबूत

विशेषज्ञों की टीम ने जांच के दौरान यह स्पष्ट किया कि टैंकरों से स्वतः गैस रिसाव होना संभव नहीं था। इससे यह पुष्टि हुई कि गैस जानबूझकर निकाली गई थी।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक आरोपी निखिल वैष्णव को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस ने छापेमारी में 7 एलपीजी कैप्सूल टैंकर, 4 गैस स्टोरेज टैंक, 125 से अधिक कमर्शियल गैस सिलेंडर, कंप्यूटर सिस्टम, सीसीटीवी डीवीआर और लेनदेन से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं।

कई एजेंसियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(3), 61, 238 और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। साथ ही रायपुर की उन आठ गैस एजेंसियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिन्होंने कथित रूप से बिना बिल के गैस खरीदी थी।

अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई और खुलासे हो सकते हैं।

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