छत्तीसगढ़ के बारनवापारा अभ्यारण्य में काले हिरणों के संरक्षण की सफलता बनी देशभर के लिए प्रेरणा

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रायपुर. छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य (लगभग 245 वर्ग किमी) में काले हिरणों (ब्लैकबक) का सफलतापूर्वक पुनरुद्धार हुआ है, जहाँ इनकी संख्या अब 200 के करीब पहुँच गई है। 1970 के दशक में विलुप्त हो चुके इन हिरणों को 2018 की पुनरुद्धार योजना और 2026 तक के वैज्ञानिक प्रयासों से वापस लाया गया। हाल ही में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम “मन की बात” में जब बारनवापारा अभ्यारण्य के काले हिरणों की सफल वापसी का उल्लेख किया, तो यह केवल एक राज्य की उपलब्धि नहीं रही, बल्कि भारत के पर्यावरण मानचित्र पर वन्यजीव संरक्षण का एक नया अध्याय बन गई। 

विजन भरा नेतृत्व और प्रतिबद्धता- इस गौरवमयी उपलब्धि के सूत्रधार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हैं। उन्होंने इस सफलता को राज्य की समृद्ध जैव विविधता और पर्यावरण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतिफल बताया है। मुख्यमंत्री साय का मानना है कि प्रधानमंत्री की सराहना केवल एक प्रशंसा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के वन विभाग और वहां के स्थानीय समुदायों के कठिन परिश्रम पर लगी राष्ट्रीय मुहर है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज विकास और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के बीच उस दुर्लभ संतुलन को साध रहा है, जिसकी आज पूरे विश्व को आवश्यकता है।

वैज्ञानिक रणनीति: विलुप्ति से पुनर्वास तक- बारनवापारा अभ्यारण्य में काले हिरणों (Blackbucks) का दिखाई देना एक समय दुर्लभ हो गया था। लेकिन वन मंत्री केदार कश्यप के कुशल मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के रणनीतिक निर्देशन ने इस असंभव लक्ष्य को वास्तविकता में बदल दिया। फरवरी 2026 का महीना छत्तीसगढ़ के वन इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जब विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी में 30 काले हिरणों को उनके प्राकृतिक आवास में ‘सॉफ्ट रिलीज’ पद्धति से मुक्त किया गया। यह प्रक्रिया केवल उन्हें जंगल में छोड़ने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि वे नए वातावरण में बिना किसी तनाव (Stress-free) के रच-बस सकें। ब्लैकबक कंजर्वेशन सेंटर में बेहतर पोषण और वैज्ञानिक देखभाल से इनकी संख्या में वृद्धि हुई। 

प्रशासनिक इच्छाशक्ति और मैदानी संघर्ष- इस महाअभियान के पीछे उन जांबाज अधिकारियों और मैदानी अमले की मेहनत है, जिन्होंने दिन-रात एक कर दिया। मुख्य वन संरक्षक (रायपुर) श्रीमती सतोविशा समाजदार और वनमंडलाधिकारी (बलौदाबाजार) धम्मशील गणवीर के नेतृत्व में फील्ड स्टाफ, जीव वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों की एक समर्पित टीम ने एक ढाल की तरह काम किया। वर्तमान में इन हिरणों की सुरक्षा के लिए हाई-टेक निगरानी प्रणाली, जीपीएस ट्रैकिंग और नियमित पेट्रोलिंग का उपयोग किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ वन विभाग की तकनीकी दक्षता का प्रमाण है।

रामपुर ग्रासलैंड:- एक सुरक्षित भविष्य का पालना बारनवापारा अभ्यारण्य का यह मॉडल आज देश के अन्य राज्यों के लिए एक ‘केस स्टडी’ बन सकता है। यहाँ केवल काले हिरण की प्रजाति का पुनर्वास नहीं हुआ, बल्कि उनके लिए एक संपूर्ण आवास तंत्र विकसित किया गया। रामपुर ग्रासलैंड का वैज्ञानिक प्रबंधन, प्राकृतिक जल स्रोतों का जीर्णोद्धार और घास की स्थानीय प्रजातियों का संवर्धन वे मुख्य कारक हैं, जिन्होंने काले हिरणों को वहां फलने-फूलने के लिए प्रेरित किया। इसके अतिरिक्त, स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी ने मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की एक अनूठी मिसाल पेश की है। काला हिरण (ब्लैकबक) भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक संकटग्रस्त मृग है। नर काले हिरण का रंग गहरा भूरा से काला होता है, उसके लंबे सर्पिलाकार सींग होते हैं और शरीर का निचला भाग सफेद होता है। मादा काले हिरण हल्के भूरे रंग की होती हैं और सामान्यतः उनके सींग नहीं होते। यह प्रजाति खुले घास के मैदानों में पाई जाती है और दिन के समय सक्रिय रहती है। इसका मुख्य आहार घास और छोटे पौधे होते हैं। इनकी ऊंचाई लगभग 74 से 84 सेंटीमीटर होती है। नर का वजन 20 से 57 किलोग्राम के बीच और मादाओं का 20 से 33 किलोग्राम तक होता है। नर काले हिरण की सर्पिलाकार सींगें, जो लगभग 75 सेंटीमीटर तक लंबी हो सकती हैं, इन्हें आसानी से पहचानने योग्य बनाती हैं।

भविष्य की राह और राष्ट्रीय संदेश- बारनवापारा अभ्यारण्य में गूंजती काले हिरणों की चहल-कदमी और उनकी कुलाचें इस बात का जीवंत साक्ष्य हैं कि यदि इंसान प्रकृति के प्रति अपनी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी समझ ले, तो खोई हुई धरोहर को फिर से लौटाया जा सकता है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ‘लिविंग लैबोरेटरी’ (जीवंत प्रयोगशाला) के रूप में कार्य करेगी, जहाँ वे प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना सीख सकेंगी। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मन की बात’ ने हमारे नवाचारों को एक वैश्विक मंच प्रदान किया है। छत्तीसगढ़ सरकार पर्यावरण संवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जोड़कर एक ऐसे भविष्य का निर्माण कर रही है, जहाँ मनुष्य और वन्यजीव दोनों सुरक्षित हों।आज जब हम बारनवापारा अभ्यारण्य की खुली वादियों में कुलाचें भरते काले हिरणों को देखते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है कि प्रकृति स्वयं मुस्कुराते हुए छत्तीसगढ़ के इस सराहनीय प्रयास को अपना आशीर्वाद दे रही है। यह छत्तीसगढ़ के गौरव का वह उत्कर्ष है, जिसकी चमक अब पूरे देश को प्रेरित कर रही है।

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