आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की 5 बड़ी मांगें: 30 हजार मानदेय, पेंशन और नियमितीकरण के लिए महासमुंद में हड़ताल

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महासमुंद. छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर एक दिवसीय काम बंद आंदोलन किया। संयुक्त मंच के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में जिलेभर से करीब 2 हजार महिला कर्मियों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने नियमितीकरण, मानदेय में वृद्धि, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा जैसी मांगों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। रैली निकालने के बाद महिलाओं ने अपर कलेक्टर को मुख्यमंत्री, महिला एवं बाल विकास मंत्री और विभागीय सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा।

अपनी मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने सुबह से ही आंदोलन शुरू कर दिया। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचीं महिला कर्मियों ने सुबह 10 बजे स्थानीय अटल परिसर में एकत्र होकर धरना दिया। इस दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों को उठाया।

हड़ताल के कारण जिले के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों में कामकाज प्रभावित रहा। इसका असर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को मिलने वाली सेवाओं पर भी पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे लंबे समय से विभागीय जिम्मेदारियां निभा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त मानदेय, नौकरी की सुरक्षा और सम्मानजनक सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

नियमितीकरण से पेंशन तक, आंगनबाड़ी कर्मियों की ये हैं 5 प्रमुख मांगें

अटल परिसर में आयोजित धरना सभा में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने महिला कर्मियों की समस्याओं को सामने रखा। वक्ताओं ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद उन्हें कई बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है।

आंदोलन के दौरान ज्ञापन में पांच प्रमुख मांगें रखी गईं।

1. नियमितीकरण और मानदेय में वृद्धि: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियमित कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की गई। नियमितीकरण होने तक श्रम कानूनों के तहत कार्यकर्ताओं को 30 हजार रुपये और सहायिकाओं को 25,500 रुपये प्रतिमाह मानदेय देने की मांग रखी गई।

2. पदोन्नति में सुविधा: कार्यकर्ताओं को सुपरवाइजर तथा सहायिकाओं को कार्यकर्ता के पद पर सीधे पदोन्नत करने की मांग की गई। साथ ही पदोन्नति प्रक्रिया में उम्र संबंधी बाध्यता समाप्त करने की बात कही गई।

3. पेंशन और सामाजिक सुरक्षा: महिला कर्मियों ने समूह बीमा, पेंशन, ग्रेच्युटी और भविष्य निधि (PF) जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई। उनका कहना है कि वर्षों तक सेवा देने के बाद भी बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा की गारंटी नहीं है।

4. मृत्यु और सेवानिवृत्ति पर आर्थिक सहायता: सेवाकाल के दौरान आकस्मिक मृत्यु होने पर परिवार के सदस्य को तत्काल अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की गई। इसके अलावा सेवानिवृत्ति पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को 5 लाख रुपये और सहायिका को 3 लाख रुपये की एकमुश्त राशि देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।

5. हर साल मानदेय में 1,000 रुपये की बढ़ोतरी: प्रदर्शनकारियों ने मध्यप्रदेश की तर्ज पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में प्रतिवर्ष 1,000 रुपये की वृद्धि करने की मांग की। उनका कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन मौजूदा मानदेय में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।

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कलेक्टर कार्यालय तक निकाली रैली, अपर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

धरना सभा के बाद दोपहर करीब 2:30 बजे महिला कर्मियों ने रैली निकाली। हाथों में बैनर और मांगों से जुड़ी तख्तियां लेकर प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं। यहां उन्होंने अपर कलेक्टर को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और विभागीय सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा।

इसके बाद जिले की स्थानीय समस्याओं और विभागीय मुद्दों को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग के बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) को भी अलग से ज्ञापन दिया गया।

गैर-विभागीय काम कम करने की मांग

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी आर्थिक परेशानियों और काम के बढ़ते दबाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि करीब 10 हजार रुपये के मानदेय में परिवार का खर्च चलाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसके साथ ही विभागीय जिम्मेदारियों के अलावा दूसरे काम भी सौंपे जाते हैं, जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों के मूल कार्य प्रभावित होते हैं।

महिला कर्मियों ने गैर-विभागीय कार्यों का बोझ कम करने की मांग करते हुए कहा कि उन्हें बच्चों के पोषण, प्रारंभिक देखभाल और महिलाओं से जुड़ी विभागीय सेवाओं पर ध्यान देने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।

ट्रेड यूनियनों ने दिया समर्थन

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के इस आंदोलन को ट्रेड यूनियनों का भी समर्थन मिला। प्रदर्शन के दौरान तृतीय वर्ग कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष दिलीप तिवारी, स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष दीपक तिवारी और टेकराम सेन सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ सक्षम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका कल्याण संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुधा रात्रे के साथ सुलेखा शर्मा, भारती ठाकुर, सुशीला ठाकुर, विभा साहू, अन्नपूर्णा वैष्णव, हाजरा खान, छाया हिरवानी, द्रौपदी साहू, तुसी गोस्वामी, उषा चौहान, शोभा बड़क, बबीता खांडे, बसंती, रामहीन नारंग, जुगेंद्री महापात्र, कृष्ण पटेल, रेणु निराला, दिनेश्वरी, लक्ष्मी, नंदिता, सुनीता सोनी, कौशल्या, प्रभा मंडे, अंजू शर्मा, रामप्यारी, धनमती, अनुसूइया चंद्राकर, रुक्मणि सिदार, अहिल्या मरकाम, रूपा भारती, विमला सोनी, पूर्णिमा ठाकुर और धन्नाति बघेल समेत जिलेभर की महिला कर्मियों ने प्रदर्शन में भाग लिया।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द गंभीरता से विचार कर समाधान नहीं निकाला, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। महिला कर्मियों का कहना है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए। खबरें पढ़ने के लिए विजिट करें babapost.in पर।

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