रायपुर. छत्तीसगढ़ में शेरपार-मानपुर-कोहका सड़क के अधूरे निर्माण, खराब गुणवत्ता और उखड़ती सड़क को लेकर लोक निर्माण विभाग (PWD) ने सख्त रुख अपनाया है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित इस सड़क की जांच और अधिकारियों के निरीक्षण में निर्माण की गुणवत्ता, रखरखाव तथा सड़क सुरक्षा से जुड़े मानकों में खामियां सामने आने के बाद विभाग ने दो ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। ठेकेदारों को अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है।
सड़क निर्माण में खामियां मिलने पर PWD की कार्रवाई
शेरपार-मानपुर-कोहका सड़क के निर्माण और रखरखाव की स्थिति का निरीक्षण राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के अधिकारियों ने किया था। जांच के दौरान सड़क की सतह पर क्षति, निर्माण कार्य अधूरा रहने और गुणवत्ता संबंधी कमियों के साथ रखरखाव में लापरवाही के मामले सामने आए।
इसके बाद लोक निर्माण विभाग ने संबंधित दो ठेकेदारों को नोटिस जारी कर निर्धारित समयसीमा में स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सड़क निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन और सड़क की उचित स्थिति बनाए रखना जरूरी है।
परफॉर्मेंस गारंटी में होने के बावजूद सड़क की हालत खराब
इस मामले में अहम बात यह है कि शेरपार-मानपुर-कोहका सड़क अभी परफॉर्मेंस गारंटी अवधि के अंतर्गत है। इसके बावजूद सड़क की सतह पर नुकसान और रखरखाव से जुड़ी समस्याएं सामने आई हैं।
परफॉर्मेंस गारंटी के दौरान सड़क की गुणवत्ता और उसकी स्थिति को लेकर संबंधित ठेकेदारों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में विभाग की जांच के बाद जारी नोटिस को सड़क निर्माण की गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
6 उप अभियंताओं को भी कारण बताओ नोटिस
सड़क की खराब स्थिति और रखरखाव में सामने आई कमियों के मामले में विभाग ने राष्ट्रीय राजमार्ग उप संभाग बालोद के सभी छह उप अभियंताओं को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
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संबंधित अधिकारियों को अपना प्रतिवाद प्रस्तुत करने के लिए तीन दिनों की समयसीमा दी गई है। विभाग ने निर्देश दिया है कि सभी उप अभियंता निर्धारित अवधि के भीतर अपना पक्ष रखें।
यदि अधिकारियों का जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की जा सकती है।
शेरपार-मानपुर-कोहका सड़क मामले में अब संबंधित ठेकेदारों और उप अभियंताओं के जवाब पर विभाग की आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी। ठेकेदारों को 15 दिनों में जवाब देना है, जबकि छह उप अभियंताओं को तीन दिनों के भीतर अपना प्रतिवाद प्रस्तुत करना होगा।
इस कार्रवाई के जरिए सड़क निर्माण की गुणवत्ता, नियमित रखरखाव और सड़क सुरक्षा से जुड़े मानकों के पालन की जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया गया है। अब देखना होगा कि संबंधित पक्षों के स्पष्टीकरण के बाद विभाग क्या कदम उठाता है। खबरें पढ़ने के लिए babapost.in पर विजिट करें।

