AAP Crisis 2026: अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। राज्यसभा सचिवालय ने पार्टी छोड़ने वाले सांसदों को नई राजनीतिक पहचान देते हुए उन्हें भारतीय जनता पार्टी का सदस्य मान लिया है। इस फैसले के बाद उच्च सदन में बीजेपी की ताकत बढ़ गई है और राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
राज्यसभा का फैसला और बदलता राजनीतिक गणित
राज्यसभा द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, AAP से अलग हुए सभी सांसद अब आधिकारिक तौर पर बीजेपी का हिस्सा माने जाएंगे। इस बदलाव के बाद राज्यसभा में बीजेपी के सांसदों की संख्या बढ़कर 113 तक पहुंच गई है, जिससे पार्टी की स्थिति और मजबूत हुई है।
AAP की प्रतिक्रिया और कानूनी चुनौती
AAP की ओर से इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर इन सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की थी। उनका कहना है कि यह कदम दल-बदल कानून का उल्लंघन है और जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात है।
संजय सिंह ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर पार्टी इस मुद्दे को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ सकती है।
राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों का बड़ा फैसला
राघव चड्ढा सहित सात सांसदों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर AAP छोड़ने का ऐलान किया था। उनके साथ संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता भी शामिल हैं।
इन नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। राघव चड्ढा ने कहा कि संविधान के तहत यदि दो-तिहाई सांसद एक साथ निर्णय लेते हैं, तो वे दूसरी पार्टी में विलय कर सकते हैं।
क्या है दल-बदल कानून का पहलू
भारत में दल-बदल कानून के तहत सांसदों के पार्टी बदलने पर नियम तय हैं। हालांकि, यदि पर्याप्त संख्या (दो-तिहाई) में सांसद एक साथ पार्टी छोड़ते हैं, तो इसे वैध माना जा सकता है। यही तर्क बागी सांसदों की ओर से दिया जा रहा है, जबकि AAP इसे चुनौती दे रही है।
आगे क्या होगा?
इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर बीजेपी की स्थिति मजबूत हुई है, वहीं AAP के लिए यह बड़ा संगठनात्मक संकट बन गया है। आने वाले समय में यह मामला अदालत तक पहुंच सकता है, जिससे इसकी दिशा तय होगी।
पैसा वसूलने गए टीम लीडर से 2 लोगों ने की मारपीट











