रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने राजनीतिक आंदोलनों के दौरान आम जनता और कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमों की वापसी की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नवा रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा की अध्यक्षता में ‘राजनीतिक प्रकरण वापसी समिति’ की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रदेश भर के विभिन्न जिलों में दर्ज 16 प्रमुख राजनीतिक मामलों की समीक्षा की गई।
बैठक के मुख्य निर्णय: 9 मुकदमों को मिली हरी झंडी
समिति ने बारीकी से सभी मामलों का अध्ययन करने के बाद 9 प्रकरणों को वापस लेने की सिफारिश (अनुशंसा) कर दी है। इसके अलावा 2 मामलों को संबंधित जिलों में पुनर्विचार के लिए वापस भेजा गया है। वहीं, जांच के दौरान जिन मामलों का सीधा संबंध राजनीतिक आंदोलनों से नहीं पाया गया, समिति ने उन्हें अस्वीकृत कर दिया।
प्रकरणों की स्थिति का संक्षिप्त विवरण
| श्रेणी / स्थिति | प्रकरणों की संख्या |
| कुल समीक्षा किए गए मामले | 16 |
| वापसी हेतु अनुशंसित प्रकरण | 09 |
| पुनर्विचार हेतु जिलों को भेजे गए | 02 |
| गैर-राजनीतिक पाकर अस्वीकृत | 05 |
उच्चस्तरीय बैठक में दिग्गज नेताओं और अधिकारियों की मौजूदगी
बैठक में गृह एवं जेल मंत्री विजय शर्मा के साथ राज्य सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया:

प्रमुख उपस्थिति:
- मंत्रिगण: उप मुख्यमंत्री अरुण साव, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े, कृषि मंत्री रामविचार नेताम।
- प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी: प्रमुख सचिव (गृह) निहारिका बारीक, प्रमुख सचिव (विधि) मनीष ठाकुर, गृह सचिव श्रीमती नेहा चंपावत और डीजीपी अरुण देव गौतम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी।
न्यायालयों में लंबित मामलों की त्वरित प्रक्रिया का निर्देश
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने समीक्षा के दौरान पूर्व में अनुशंसित और वर्तमान में लंबित मामलों की प्रगति की जानकारी ली।
- त्वरित कार्रवाई के निर्देश: समिति ने निर्देश दिया कि न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा की जाए ताकि कानूनी प्रक्रियाओं को नियमानुसार शीघ्र पूरा किया जा सके।
- प्रकरणवार समीक्षा: उप मुख्यमंत्री ने हर मामले का अलग-अलग विश्लेषण किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि केवल वास्तविक राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े मामलों में ही नियमानुसार राहत की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
छत्तीसगढ़ सरकार के इस निर्णय से राज्य के विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों से जुड़े कार्यकर्ताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का मुख्य ध्यान कानूनी प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाते हुए अदालत में लंबित मामलों का जल्द से जल्द निपटारा करना है।











