Rahul Gandhi ECI Protest: नई दिल्ली. दिल्ली में राजनीतिक पारा उस समय चढ़ गया जब संसद से निर्वाचन आयोग कार्यालय (ECI) की ओर मार्च निकाल रहे ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के प्रमुख नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस घटनाक्रम पर जर्मनी प्रवास पर गए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
राहुल गांधी से हाथापाई और हिरासत पर शशि थरूर का तीखा हमला
जर्मनी के बर्लिन में आयोजित एक पूर्व-निर्धारित सम्मेलन में हिस्सा लेने गए शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से हाथापाई किए जाने और उन्हें हिरासत में लिए जाने की तस्वीरें देखकर वह बेहद व्यथित हैं।
थरूर ने दूर से एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि 13 करोड़ मतदाताओं के मताधिकार से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे विपक्ष के खिलाफ सरकार का यह रवैया पूरी तरह से शर्मनाक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस लड़ाई में अंततः न्याय की ही जीत होगी।
आकाशवाणी भवन पर धरना और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब ‘इंडिया’ ब्लॉक के सांसद संसद परिसर से निर्वाचन सदन तक मार्च निकाल रहे थे। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद विपक्षी नेता आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठ गए। कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि जब तक सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को चुनाव आयोग से मिलने का समय नहीं दिया जाता और मांगें पूरी नहीं होतीं, प्रदर्शन जारी रहेगा।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने मार्च के लिए कोई पूर्व अनुमति नहीं ली थी। स्थिति को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित लगभग 260 लोगों (जिनमें 10 सांसद शामिल हैं) को हिरासत में लेकर किंग्सवे कैंप स्थित न्यू पुलिस लाइंस ले जाया गया, जहाँ से बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च: SIR प्रक्रिया और फॉर्म 6 पर छिड़ा घमासान
विपक्ष का यह प्रदर्शन उनके व्यापक “लोकतंत्र बचाओ” अभियान का हिस्सा है, जो मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर केंद्रित है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के बाद यह विवाद और गहरा गया, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्तों ने इस प्रक्रिया के दौरान कई आपत्तियां जताई थीं।
इसके अलावा, नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ‘फॉर्म 6’ में बदलावों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने भी स्पष्ट कर दिया है कि उसने फॉर्म 6 के किसी भी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है। इन तमाम मुद्दों को लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर हमलावर है।











