महासमुंद. छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सीएम पोर्टल पर मिली शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों, पैथोलॉजी लैब और मेडिकल स्टोरों के खिलाफ जांच अभियान चलाया। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देश पर बसना क्षेत्र में किए गए इस औचक निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कई गंभीर नियम उल्लंघन सामने आए। जांच के बाद संबंधित संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी करने और निर्धारित समय-सीमा में जवाब मांगने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. आर सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में नर्सिंग होम एक्ट, पंजीयन संबंधी शर्तों और शासन के स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों के पालन की पड़ताल की। निरीक्षण में अस्पतालों की व्यवस्थाओं, चिकित्सकों की उपलब्धता, पैथोलॉजी जांच की वैधता और मरीजों के उपचार से जुड़े प्रोटोकॉल पर विशेष ध्यान दिया गया।
बसना पैथोलॉजी लैब में बिना योग्य विशेषज्ञ के जांच का मामला
औचक निरीक्षण के दौरान बसना पैथोलॉजी लैब में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच दल के अनुसार, लैब में योग्य पैथोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति में जांच की जा रही थी। इसके अलावा, संस्थान को मिली अनुमति के दायरे से बाहर की जांचें भी संचालित किए जाने की जानकारी सामने आई।
जांच के दौरान तीन ऐसे कर्मचारी भी कार्यरत मिले, जो राज्य के अन्य संस्थानों में नियमित रूप से अध्ययनरत हैं। उल्लेखनीय है कि इस लैब के खिलाफ पहले भी सील करने की कार्रवाई की जा चुकी है।
इन तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए सीएमएचओ ने लैब संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। संचालक को निर्धारित समय-सीमा के भीतर जवाब देने और व्यवस्थाओं में सुधार करने को कहा गया है। जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गोविंद अस्पताल की लैब में नहीं मिले लैब टेक्नीशियन
गोविंद अस्पताल, बसना के निरीक्षण के दौरान प्रयोगशाला में लैब टेक्नीशियन अनुपस्थित पाए गए। अस्पताल प्रबंधन ने भोजन अवकाश का हवाला दिया। इस पर सीएमएचओ ने निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रयोगशाला संचालन और आवश्यक कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही अस्पताल प्रबंधन को आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र मरीजों का नियमानुसार उपचार करने, आयुष्मान कार्ड बनाने तथा योजना से जुड़ी सुविधाओं की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने को कहा गया।
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अवलेडी अस्पताल में उपचार व्यवस्था और प्रोटोकॉल पर उठे सवाल
अवलेडी अस्पताल के निरीक्षण के दौरान ऑपरेशन थिएटर संचालित मिला और प्रसव के बाद कई महिलाएं अस्पताल में भर्ती थीं। मौके पर केवल एक बीएचएमएस चिकित्सक उपस्थित पाए गए।
जांच दल के मुताबिक, चिकित्सकीय निगरानी और आवश्यक दस्तावेजी अनुमोदन के बिना रक्त चढ़ाने, नर्सिंग स्टाफ द्वारा स्वयं को चिकित्सक के रूप में प्रस्तुत करने तथा प्रसव एवं आपातकालीन सेवाओं में निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किए जाने जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। दवाओं के इस्तेमाल में भी शासन के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की जानकारी मिली।
इन मामलों को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। आगे की कार्रवाई संबंधित संस्थान के जवाब और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर नियमानुसार की जाएगी।
मेडिकल स्टोर में मिली इंजेक्शन और सीरींज जैसी सामग्री
बंसुला स्थित साव मेडिकल में मेडिकल स्टोर की आड़ में अनधिकृत रूप से मरीजों का इलाज किए जाने की शिकायत मिली थी। इसी के आधार पर जांच दल ने दुकान का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के समय वहां कोई मरीज उपचाररत नहीं मिला, लेकिन दुकान में खुले इंजेक्शन, सीरींज और अन्य चिकित्सीय सामग्री पाई गई। इस संबंध में संचालक से स्पष्टीकरण लेने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
अस्पतालों में साफ-सफाई और 24 घंटे चिकित्सकीय ड्यूटी के निर्देश
निरीक्षण के दौरान सीएमएचओ डॉ. आर सिंह ने सभी संबंधित संस्थानों में साफ-सफाई का बेहतर स्तर बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने चिकित्सकों की ड्यूटी रोस्टर के अनुसार 24 घंटे उपलब्धता सुनिश्चित करने और मरीजों तथा उनके परिजनों के साथ संवेदनशीलता एवं विनम्रता से व्यवहार करने की हिदायत दी।
जांच दल में सीएमएचओ, सहायक नोडल अधिकारी (नर्सिंग होम एक्ट), खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) और जिला समन्वयक (आयुष्मान भारत) शामिल थे।
नियमों का उल्लंघन जारी रहा तो हो सकती है सीलिंग की कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि आम लोगों के स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिले के सभी निजी अस्पतालों, पैथोलॉजी लैबों और मेडिकल स्टोरों के लिए निर्धारित पंजीयन शर्तों, कानूनी प्रावधानों और स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।
संबंधित संस्थानों को तय समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत करने और निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिलता या नियमों का उल्लंघन जारी रहता है, तो नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर संबंधित संस्थान को सील करने की कार्रवाई भी की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद अब संबंधित संस्थानों के जवाब और स्वास्थ्य विभाग की आगामी जांच पर नजर रहेगी।
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