महासमुंद. छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। खरीफ सीजन 2026 में धान की पारंपरिक खेती के स्थान पर दलहन, तिलहन और अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती करने वाले किसानों को अब पंजीयन के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। राज्य सरकार ने फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 नवंबर 2026 कर दी है। पहले किसानों को पंजीयन कराने के लिए 31 अक्टूबर 2026 तक का समय दिया गया था।
इस फैसले से उन किसानों को बड़ी राहत मिलेगी, जो धान के बदले दूसरी खरीफ फसलें लेकर सरकार की कृषक उन्नति योजना के तहत आर्थिक सहायता प्राप्त करना चाहते हैं। योजना के अंतर्गत पात्र किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये तक की आदान सहायता राशि देने का प्रावधान है।
कृषि विभाग के अनुसार, राज्य सरकार खरीफ फसल के दौरान धान के रकबे में विविधता लाने और किसानों को वैकल्पिक फसलों की ओर प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक सहायता दे रही है। कृषक उन्नति योजना के तहत धान के स्थान पर मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, दलहन, तिलहन और कपास जैसी फसलों की खेती करने वाले पात्र किसानों को 15,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
इसके अलावा धान के अतिरिक्त अन्य फसलें लेने वाले पात्र किसानों को 10,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से सहायता राशि देने का प्रावधान है। इस आर्थिक प्रोत्साहन का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक धान की खेती के साथ-साथ दूसरी फसलों के उत्पादन के लिए प्रेरित करना है।
एकीकृत किसान पोर्टल पर अब 15 नवंबर तक करा सकेंगे पंजीयन
कृषि विभाग ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन की समय-सीमा बढ़ा दी है। पहले पंजीयन की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 15 नवंबर 2026 कर दिया गया है।
जिन किसानों ने अभी तक पोर्टल पर अपना पंजीयन नहीं कराया है, उनके पास अब आवेदन पूरा करने का अतिरिक्त अवसर है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना जल्द से जल्द अपना पंजीयन करा लें, ताकि योजना का लाभ लेने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
सेवा सहकारी समिति में भी करा सकते हैं पंजीयन
कृषक उन्नति योजना का लाभ लेने के लिए एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराना अनिवार्य है। किसान अपने नजदीकी सेवा सहकारी समिति में पहुंचकर भी पंजीयन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के ऐसे किसान जिन्हें ऑनलाइन पंजीयन करने में परेशानी होती है, वे संबंधित सेवा सहकारी समिति से संपर्क कर सकते हैं। वहां निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उनका पंजीयन कराया जा सकता है।
गिरदावरी सत्यापन के बाद खाते में आएगी सहायता राशि
कृषि विभाग के मुताबिक, पंजीयन के बाद संबंधित खेतों का गिरदावरी सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र किसानों को मान्य कृषि रकबे के आधार पर आदान सहायता राशि दी जाएगी।
योजना की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी। इससे सहायता राशि का भुगतान पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
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फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना है सरकार का उद्देश्य
उप संचालक कृषि एफ. आर. कश्यप ने बताया कि राज्य सरकार खरीफ सीजन में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। धान के अलावा मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, दलहन, तिलहन और कपास जैसी फसलों की खेती करने से कृषि उत्पादन में विविधता आएगी।
इस पहल से किसानों को पारंपरिक खेती के विकल्प अपनाने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही दलहन और तिलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।
किसानों के लिए जरूरी सूचना: 15 नवंबर से पहले पूरा करें पंजीयन
महासमुंद जिले के ऐसे किसान जिन्होंने खरीफ 2026 में धान के बदले वैकल्पिक फसलों की खेती की है और कृषक उन्नति योजना का लाभ लेना चाहते हैं, उन्हें 15 नवंबर 2026 तक एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराना होगा।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे समय रहते अपने नजदीकी सेवा सहकारी समिति में संपर्क कर पंजीयन की प्रक्रिया पूरी करें। निर्धारित समय-सीमा के भीतर पंजीयन और आवश्यक सत्यापन पूरा होने पर ही पात्रता के अनुसार सहायता राशि का लाभ मिल सकेगा। babapost.in पर खबरें पढ़ने के लिए विजिट करें।

