Bihar New CM: नई दिल्ली. बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है, जहां सम्राट चौधरी राज्य के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। यह पहली बार है जब भारतीय जनता पार्टी सीधे तौर पर बिहार में अपना मुख्यमंत्री दे रही है। एनडीए विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से उनके नाम पर मुहर लगी, जिसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें प्रतीकात्मक रूप से मखाना की माला पहनाकर अपनी राजनीतिक विरासत सौंपी।

शपथ ग्रहण समारोह और राजनीतिक संदेश
आज सुबह 10:50 बजे लोकभवन में आयोजित होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल सम्राट चौधरी को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। इस मौके पर जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान सहित एनडीए के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। खास बात यह है कि पहले चरण में केवल मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री ही शपथ लेंगे, जबकि मंत्रिमंडल का विस्तार बाद में किया जाएगा।
जदयू कोटे से दो डिप्टी सीएम
राजनीतिक समीकरणों को संतुलित करते हुए इस बार दो उपमुख्यमंत्री जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से बनाए जाएंगे। पहले भाजपा की ओर से यह पद संभाला जाता था, लेकिन अब गठबंधन में जदयू की भूमिका को मजबूत किया गया है। संभावित नामों में विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव शामिल हैं, जो लंबे समय से नीतीश कुमार के भरोसेमंद सहयोगी रहे हैं।
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर
सम्राट चौधरी का राजनीतिक जीवन करीब 30 वर्षों का रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल से की, फिर जनता दल यूनाइटेड में रहे और 2017 में भाजपा में शामिल हुए। भाजपा में आने के बाद उन्हें लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं। वे उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री जैसे अहम पद संभाल चुके हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी भी बिहार की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा रहे हैं।
सम्राट चौधरी का बयान और विजन
मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद सम्राट चौधरी ने कहा कि भाजपा ने उन्हें हमेशा सेवा का अवसर दिया और वे पार्टी के भरोसे पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करेंगे। उन्होंने नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ विजन और नीतीश कुमार के ‘समृद्ध बिहार’ संकल्प को साथ लेकर आगे बढ़ने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में सुशासन और विकास को नई दिशा दी जाएगी।
बिहार की राजनीति में क्या बदलेगा
सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने से बिहार की राजनीति में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। भाजपा अब राज्य में नेतृत्व की भूमिका में है, जबकि जदयू गठबंधन सहयोगी के रूप में संतुलन बनाए रखेगी। यह बदलाव आगामी चुनावों और राज्य की नीतियों पर भी प्रभाव डाल सकता है।
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