रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में किसानों, सरकारी कर्मचारियों, उद्योगों, पर्यटन और प्रदेश के बुनियादी ढांचे से जुड़े कई अहम फैसलों को मंजूरी दी गई। बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी की तारीख 15 नवंबर तय करने, किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने और प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल की सीमा निर्धारित करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को राहत जारी रखने, सरकारी कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने तथा सड़क, रेल, पर्यटन और खेल विकास के लिए नई योजनाओं को मंजूरी दी गई।
साय कैबिनेट के इन फैसलों में किसानों की सुविधा, रोजगार सृजन, औद्योगिक निवेश को बढ़ावा और सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। आइए जानते हैं छत्तीसगढ़ कैबिनेट की बैठक में लिए गए सभी 19 महत्वपूर्ण निर्णयों की पूरी जानकारी।
1. छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से होगी धान खरीदी, किसानों को मिलेंगे 3100 रुपये प्रति क्विंटल
छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी की तैयारी तेज कर दी है। मंत्रिपरिषद ने 15 नवंबर 2026 से प्रदेश के किसानों से धान खरीदने का फैसला लिया है। सरकार के निर्णय के अनुसार, धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी। इसके तहत अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान खरीदा जाएगा।
सरकार के मुताबिक, इस व्यवस्था से 27.50 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिलने की संभावना है। किसानों को पंजीयन प्रक्रिया में राहत देते हुए पिछले वर्ष पंजीकृत उन सभी किसानों को धान बेचने के लिए पात्र माना गया है, जिनकी एग्रीस्टेक आईडी उपलब्ध है। ऐसे किसानों को दोबारा पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी।
एग्रीस्टेक पंजीयन के आधार पर किसानों को धान बेचते समय समिति में अलग से ऋण पुस्तिका ले जाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से धान के रकबे का ऑनलाइन निर्धारण किया जाएगा। वास्तविक किसानों से धान की खरीदी सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू रहेगी।
किसानों को नजदीक में सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 360 नए धान खरीदी केंद्र शुरू किए जाएंगे। इससे प्रदेश में कुल उपार्जन केंद्रों की संख्या बढ़कर 3100 हो जाएगी। इसके साथ ही खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 और 2025-26 के अतिशेष धान के नीलामी के माध्यम से निराकरण के संबंध में मंत्रिमंडलीय उपसमिति के निर्णय का भी अनुमोदन किया गया।
2. बिजली उपभोक्ताओं को राहत जारी, एम-ऊर्जा योजना की अवधि बढ़ी
छत्तीसगढ़ के घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए भी कैबिनेट ने अहम निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान यानी एम-ऊर्जा योजना के तहत 200 यूनिट तक बिजली बिल में दी जा रही रियायत को पहले की तरह जारी रखने की मंजूरी दी गई है।
इसके साथ ही योजना का लाभ लेने के लिए 400 यूनिट तक मासिक बिजली खपत की पात्रता अवधि को 30 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दिया गया है।
सरकार के अनुसार, इस फैसले से करीब 7.25 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को बिजली बिल में मिलने वाली राहत का लाभ लगातार मिलता रहेगा।
3. सड़क निर्माण कार्यों के लिए 230 करोड़ रुपये तक की संभावित राहत
बिटुमिन यानी डामर की कीमतों में असाधारण वृद्धि को देखते हुए राज्य सरकार ने सड़क निर्माण से जुड़े ठेकेदारों को राहत देने का फैसला किया है। यह राहत छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण और लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत संचालित पात्र सड़क निर्माण, नवीनीकरण तथा संधारण कार्यों के लिए दी जाएगी।
ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के अंतर्गत आने वाले कार्यों के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक वास्तव में खरीदे और उपयोग किए गए बिटुमिन की मात्रा के आधार पर 130.88 करोड़ रुपये की सहायता बजट अनुदान के रूप में दी जाएगी।
वहीं, राज्य वित्त पोषित सड़क परियोजनाओं के उन अनुबंधों में भी मूल्य राहत देने का निर्णय लिया गया है, जिनकी निविदाएं 1 अप्रैल 2026 से पहले प्राप्त हुई थीं। ऐसे कार्यों में 15 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक खरीदे और उपयोग किए गए बिटुमिन पर राहत दी जाएगी। इसके लिए लगभग 70 से 100 करोड़ रुपये के अतिरिक्त व्यय का अनुमान है।
इस निर्णय से डामरीकरण से जुड़े लंबित सड़क निर्माण कार्यों को गति देने और निर्धारित समय सीमा में पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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4. सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को मिलेगी कैशलेस चिकित्सा सुविधा
राज्य के शासकीय कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों के लिए कैशलेस इलाज की व्यवस्था लागू करने के प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद ने मंजूरी दी है।
नई व्यवस्था के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में पात्र सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे इलाज के दौरान अस्पताल में पहले अपनी जेब से पूरा चिकित्सा खर्च जमा करने और बाद में प्रतिपूर्ति के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं रहेगी।
चिकित्सा सुविधा से जुड़ी पूर्व मंजूरी और दावों की प्रक्रिया ऑनलाइन तथा डिजिटल माध्यम से संचालित की जाएगी। इस फैसले से गंभीर बीमारियों और आपातकालीन परिस्थितियों में कर्मचारियों के परिवारों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
5. मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन-2026 को मंजूरी
छत्तीसगढ़ में सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास को व्यवस्थित बनाने के लिए मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन-2026 की गाइडलाइन्स को मंजूरी दी गई है।
यह मिशन वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए संचालित होगा। इसके लिए कुल 500 करोड़ रुपये का प्रस्तावित प्रावधान है, यानी प्रत्येक वर्ष 100 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है।
लोक निर्माण विभाग को मिशन का नोडल विभाग बनाया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGRIDCL) क्रियान्वयन एजेंसी होगी।
मिशन के तहत सड़क नेटवर्क का मास्टर प्लान, डेटा आधारित अधोसंरचना आकलन, परियोजनाओं की डीपीआर तैयार करना, जीआईएस आधारित नियोजन, डिजिटल कार्य निगरानी, गुणवत्ता परीक्षण और सड़क सुरक्षा ऑडिट पर ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) और नए वित्तीय मॉडल को प्रोत्साहित किया जाएगा।
इससे परियोजनाओं की बेहतर योजना बनाने, निर्माण लागत में अनावश्यक वृद्धि रोकने और सड़क निर्माण की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलने की उम्मीद है।
6. मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन से पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
छत्तीसगढ़ में पर्यटन स्थलों के विकास और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन को मंजूरी दी गई है। ‘पर्यटन से समृद्धि’ के लक्ष्य के साथ इस मिशन को अगले पांच वर्षों तक संचालित करने की योजना है। इसके लिए लगभग 500 करोड़ रुपये का प्रस्तावित प्रावधान किया गया है।
मिशन के तहत पर्यटन स्थलों पर सड़क संपर्क, बुनियादी सुविधाएं, सुरक्षा, स्वच्छता और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया जाएगा। साथ ही होमस्टे, निजी निवेश और पर्यटन आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
इस पहल से स्थानीय युवाओं, महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों के लिए रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करने और छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
7. राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े नौ मामले वापस लेने की प्रक्रिया को मंजूरी
मंत्रिपरिषद ने विशुद्ध रूप से राजनीतिक आंदोलनों से संबंधित नौ प्रकरणों को जनहित में न्यायालय से वापस लेने के लिए आगे की कार्रवाई की अनुमति दी है।
यह अनुमति 30 सितंबर 2026 को हुई मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक में की गई अनुशंसा के अनुरूप दी गई है। मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया नियमानुसार आगे बढ़ाई जाएगी।
8. नगर पंचायत कूंरा का नाम अब होगा कुंवरगढ़
रायपुर जिले की नगर पंचायत कूंरा का नाम बदलकर कुंवरगढ़ करने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान की है।
कुंवरगढ़ को छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक गढ़ों में शामिल माना जाता है। यह क्षेत्र प्राचीन मंदिरों, ऐतिहासिक धरोहरों और तालाबों के लिए जाना जाता है। समय के साथ इसका नाम कूंरा प्रचलित हो गया था।
स्थानीय नागरिक लंबे समय से नगर पंचायत को उसकी ऐतिहासिक पहचान के अनुरूप कुंवरगढ़ नाम देने की मांग कर रहे थे। मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद नाम परिवर्तन से संबंधित आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
9. कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं को मिलेगा विशेष प्रोत्साहन
छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में संशोधन को मंजूरी देते हुए राज्य सरकार ने बड़े निवेश वाली कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज का प्रावधान किया है।
इसके तहत 1000 करोड़ रुपये या उससे अधिक निवेश वाली पात्र परियोजनाओं को विशेष प्रोत्साहन देने की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य राज्य के विशाल कोयला भंडार का मूल्यवर्धित उपयोग बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करना है।
इस कदम से कोयला आधारित नई औद्योगिक परियोजनाओं और निवेश की संभावनाओं को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
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10. 8000 करोड़ की रेल परियोजना को गति देने का फैसला
छत्तीसगढ़ में रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए कटघोरा-तखतपुर-मुंगेली-कवर्धा-खैरागढ़-डोंगरगढ़ रेल परियोजना को लेकर अहम निर्णय लिया गया है। लगभग 295 किलोमीटर लंबी इस परियोजना के त्वरित क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CRCL) के माध्यम से शत-प्रतिशत इक्विटी निवेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
परियोजना की अनुमानित लागत करीब 8000 करोड़ रुपये है। इसमें 25 प्रतिशत यानी लगभग 2000 करोड़ रुपये की अंशपूंजी प्रस्तावित है। इसमें छत्तीसगढ़ सरकार और रेल मंत्रालय लगभग 1000-1000 करोड़ रुपये का योगदान देंगे।
राज्य सरकार की हिस्सेदारी मिनरल डेवलपमेंट फंड, जिला खनिज न्यास (DMF) और राज्य बजट के माध्यम से वहन की जाएगी।
इस रेल परियोजना से उन क्षेत्रों को बेहतर रेल सुविधा मिलने की उम्मीद है, जो अभी पर्याप्त रेल कनेक्टिविटी से वंचित हैं। इससे उद्योग, पर्यटन, रोजगार और कृषि उपज को नए बाजारों तक पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है।
11. पांच सरकारी परिसंपत्तियों के पुनर्विकास को सैद्धांतिक मंजूरी
राज्य सरकार ने रिडेवलपमेंट योजना के दूसरे चरण में पांच परियोजनाओं को सैद्धांतिक स्वीकृति दी है। इसके तहत सरकारी भूमि और जर्जर परिसंपत्तियों का योजनाबद्ध तरीके से पुनर्विकास किया जाएगा।
प्रस्तावित परियोजनाओं में शामिल हैं:
- दुर्ग का शासकीय पोल्ट्री फार्म।
- रामानुजगंज का वेटरनरी हॉस्पिटल परिसर।
- जशपुर में पुलिस लाइन और रणजीता स्टेडियम के पीछे की भूमि।
- सक्ती का बुधवारी बाजार।
- धमतरी के रुद्री चौक की शासकीय भूमि एवं जर्जर परिसंपत्तियां।
इन परियोजनाओं को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य सरकारी भूमि का बेहतर उपयोग, नई परिसंपत्तियों का निर्माण, राजस्व में वृद्धि और रोजगार के अवसर बढ़ाना है। साथ ही सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम रखने की कोशिश की जाएगी।
12. राजनांदगांव में केंद्रीय भंडारण निगम को मिलेगी 10 एकड़ जमीन
राजनांदगांव जिले में भंडारण सुविधाओं का विस्तार करने के लिए ग्राम खपरीकला में केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) को 10 एकड़ भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
भूमि का आवंटन निर्धारित नियमों के अनुसार बाजार मूल्य के 75 प्रतिशत प्रब्याजि, वार्षिक भू-भाटक तथा निर्धारित अधोसंरचना और पर्यावरण उपकर के आधार पर किया जाएगा।
इससे जिले में कृषि उपज और अन्य वस्तुओं के सुरक्षित भंडारण के लिए सुविधाएं विकसित करने में मदद मिलेगी। बेहतर भंडारण व्यवस्था से कृषि उत्पादों के रखरखाव और आपूर्ति व्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
13. सोमनी में 400 करोड़ से बनेगी मल्टी फ्रूट प्रोसेसिंग फैसिलिटी
राजनांदगांव जिले के ग्राम सोमनी में मल्टी फ्रूट प्रोसेसिंग फैसिलिटी स्थापित करने की योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिली है। इसके लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के माध्यम से परियोजना विकसित करने के उद्देश्य से कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग को राजगामी संपदा की 31.55 एकड़ भूमि आवंटित करने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है।
परियोजना में लगभग 400 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। इसके तहत किसानों से सीधे फल खरीदने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
सरकार के अनुसार, इस परियोजना से 1000 से अधिक प्रत्यक्ष और 5000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। फल उत्पादक किसानों को प्रसंस्करण, विपणन और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में भी सहायता मिल सकती है।
14. सुशासन एवं अभिसरण विभाग में तीन नए पद स्वीकृत
प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुशासन एवं अभिसरण विभाग के विभागाध्यक्ष कार्यालय में तीन नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है।
इनमें आयुक्त/संचालक का एक पद, अपर संचालक का एक पद और अपर संचालक स्तर के विशेषज्ञ का एक पद शामिल है।
इन पदों से विभाग को प्रशासनिक नेतृत्व, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और लोक प्रशासन तथा विधि संबंधी विषयों में विशेषज्ञता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इससे सुशासन से जुड़ी नीतियों और सुधारात्मक पहलों के क्रियान्वयन को गति देने का लक्ष्य है।
15. वन मुख्यालय में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी का अस्थायी पद
मंत्रिपरिषद ने नवा रायपुर स्थित अरण्य भवन के वन मुख्यालय में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (पे-लेवल-16) का एक अस्थायी पद एक वर्ष के लिए सृजित करने की मंजूरी दी है।
इस पद से पीएम गति-शक्ति, प्रगति और परिवेश पोर्टल से संबंधित कार्यों के निष्पादन, निगरानी और समन्वय को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
16. दिवंगत चिकित्सक के परिवार को पेंशन और एरियर्स की मंजूरी
कैबिनेट ने स्वर्गीय डॉ. राकेश मोहन चंदोला, सह प्राध्यापक, चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर की 19 अक्टूबर 1987 से 7 जनवरी 2022 तक की सेवा को परिवार पेंशन के उद्देश्य से नियमित सेवा मानने का निर्णय लिया है।
इस आधार पर उनके पात्र परिवारजनों को परिवार पेंशन, बकाया राशि यानी एरियर्स और नियमानुसार ब्याज का भुगतान करने की स्वीकृति दी गई है।
17. मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन से खिलाड़ियों को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग
छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के प्रारूप को मंजूरी दी गई है। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 100 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
मिशन के तहत स्कूलों और चयन शिविरों के माध्यम से टैलेंट हंट आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ट्रॉफी के जरिए खिलाड़ियों की प्रतिभा पहचानी जाएगी और चयनित खिलाड़ियों को AMS में पंजीकृत किया जाएगा।
इसके बाद खिलाड़ियों को अलग-अलग स्तरों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। फीडर सेंटरों में बुनियादी प्रशिक्षण, राज्य खेल अकादमियों में खेल-विशिष्ट उन्नत प्रशिक्षण और उच्च प्रदर्शन केंद्रों में विशेषज्ञ कोचिंग की व्यवस्था प्रस्तावित है। खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स साइंस और प्रदर्शन विश्लेषण जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
दस प्रमुख खेल विधाओं में कोर और डेवलपमेंट समूह बनाकर पदक की संभावना वाले खिलाड़ियों को लक्षित सहायता और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर दिए जाएंगे।
पहले चरण में अंबिकापुर, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, जगदलपुर और जशपुर में फीडर सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इस पहल से प्रदेश में खेल प्रशिक्षण का ढांचा मजबूत करने और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने का लक्ष्य है।
18. औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियमों में संशोधन
छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। इस बदलाव का उद्देश्य औद्योगिक भूमि के उपयोग को सरल बनाना और भूखंडों की उपलब्धता बेहतर करना है।
सरकार के अनुसार, संशोधित नियमों से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा और औद्योगिक भूमि एवं भवनों से जुड़े विवादों में कमी लाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही खाली या अतिरिक्त भूमि का उत्पादक उपयोग तथा पारदर्शी ई-नीलामी के माध्यम से आवंटन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा।
19. कृषक उन्नति योजना में बदलाव, सहायता राशि अब प्रति एकड़ के आधार पर
किसानों से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में मंत्रिपरिषद ने खरीफ-2026 के लिए कृषक उन्नति योजना में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत धान की फसल पर मिलने वाली आदान सहायता राशि की गणना प्रति क्विंटल के बजाय प्रति एकड़ के आधार पर करने का निर्णय लिया गया है।
धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किए जाने का निर्णय भी दोहराया गया है।
सरकार का मानना है कि सहायता राशि को प्रति एकड़ के आधार पर निर्धारित करने से किसानों को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही फसल विविधीकरण, उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशक, कृषि यंत्रीकरण और आधुनिक कृषि तकनीकों में निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। इससे किसानों की आय और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।
छत्तीसगढ़ कैबिनेट के फैसलों से किन क्षेत्रों को मिलेगा फायदा?
साय कैबिनेट के इन निर्णयों में कृषि, बिजली, स्वास्थ्य, सड़क, रेल, पर्यटन, उद्योग और खेल जैसे प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है। धान खरीदी की तैयारी, बिजली बिल में रियायत जारी रखने और सरकारी कर्मचारियों के लिए कैशलेस इलाज जैसी घोषणाएं सीधे तौर पर नागरिकों और कर्मचारियों से जुड़ी हैं।
वहीं, रेल परियोजना, पर्यटन विकास मिशन, मल्टी फ्रूट प्रोसेसिंग फैसिलिटी और अधोसंरचना मिशन जैसी पहलों से निवेश, कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसर बढ़ाने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ सरकार के इन फैसलों का उद्देश्य किसानों को सहायता देने, सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने, औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने और प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को गति देना है। इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव इनके क्रियान्वयन, निर्धारित बजट और समयसीमा के अनुसार प्रगति पर निर्भर करेगा। Entertainment से संबंधित खबरें पढ़ें।

