महासमुंद मौसम समाचार: महासमुंद जिले में मानसून लगातार सक्रिय बना हुआ है और बारिश का सिलसिला किसानों के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी राहत लेकर आया है। जिले में 1 जून 2026 से 6 जुलाई 2026 तक कुल 275.1 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार सरायपाली तहसील पूरे जिले में सबसे अधिक वर्षा वाला क्षेत्र बनकर उभरा है।
सरायपाली में सबसे अधिक 386.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज
भू-अभिलेख विभाग से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार जिले की विभिन्न तहसीलों में वर्षा का आंकड़ा अलग-अलग दर्ज किया गया है। सबसे अधिक औसत वर्षा सरायपाली तहसील में 386.3 मिलीमीटर रिकॉर्ड की गई। इसके बाद पिथौरा में 301.3 मिलीमीटर और महासमुंद तहसील में 281.1 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई।
बसना तहसील में 234.6 मिलीमीटर, कोमाखान में 225.1 मिलीमीटर तथा जिले में सबसे कम वर्षा बागबाहरा तहसील में 222.9 मिलीमीटर दर्ज की गई।
6 जुलाई को जिले में 85.6 मिलीमीटर औसत वर्षा
6 जुलाई 2026 को महासमुंद जिले में औसतन 85.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। एक ही दिन में हुई इस अच्छी बारिश से जलस्रोतों में पानी की आवक बढ़ी है और कृषि कार्यों को भी गति मिलने की संभावना है।
तहसीलवार वर्षा का ताजा आंकड़ा
6 जुलाई को दर्ज वर्षा के अनुसार पिथौरा तहसील में सबसे अधिक 128.5 मिलीमीटर बारिश हुई। इसके बाद सरायपाली में 97.7 मिलीमीटर, बसना में 90.4 मिलीमीटर, महासमुंद में 68.5 मिलीमीटर, कोमाखान में 66.5 मिलीमीटर तथा बागबाहरा तहसील में 62.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।
महासमुंद जिले की कुल औसत वर्षा
- महासमुंद जिला औसत वर्षा: 275.1 मिमी
- सरायपाली: 386.3 मिमी
- पिथौरा: 301.3 मिमी
- महासमुंद: 281.1 मिमी
- बसना: 234.6 मिमी
- कोमाखान: 225.1 मिमी
- बागबाहरा: 222.9 मिमी
किसानों और जल संसाधनों के लिए राहत
जिले में लगातार हो रही वर्षा से खरीफ फसलों की बुआई के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। खेतों में पर्याप्त नमी मिलने से किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। वहीं तालाब, नहरों और अन्य जलस्रोतों में भी जलस्तर बढ़ने की संभावना है, जिससे आने वाले दिनों में सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

महासमुंद जिले में इस मानसून सीजन के दौरान वर्षा का प्रदर्शन संतोषजनक रहा है। 1 जून से अब तक जिले में 275.1 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है, जबकि सरायपाली तहसील सर्वाधिक वर्षा के साथ जिले में पहले स्थान पर है। यदि आगामी दिनों में मानसून इसी तरह सक्रिय रहा तो कृषि, जल संरक्षण और पेयजल व्यवस्था को और अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
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