नई दिल्ली. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश की चुनाव प्रणाली को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को रद्द करने और आगामी चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांगों पर कांग्रेस पार्टी किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी। खड़गे ने कहा कि इन तीन अहम मुद्दों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता और INDIA गठबंधन के सहयोगी दल देशभर में सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
चुनाव प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की 3 गैर-समझौतावादी मांगें
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी एक पोस्ट के जरिए कांग्रेस प्रमुख ने पार्टी का रुख साफ करते हुए तीन प्रमुख मांगों को रेखांकित किया:
- CEC ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा: चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के पदत्याग की मांग।
- SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को रद्द करना: मतदाता सूची के पुनरीक्षण की मौजूदा प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से समाप्त करना।
- बैलेट पेपर से चुनाव कराना: चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए EVM के स्थान पर पुनः बैलेट पेपर से मतदान की वापसी।
खड़गे ने कहा कि नागरिक समाज के जो भी सदस्य और युवा संगठन इन मांगों के समर्थन में संघर्ष कर रहे हैं, कांग्रेस पार्टी और INDIA गठबंधन मजबूती से उनके साथ खड़ा है।
महिला पत्रकारों के साथ बदसलूकी पर जताई गहरी चिंता
राजधानी दिल्ली में हाल ही में घटी एक घटना का उल्लेख करते हुए खड़गे ने भारतीय जनता पार्टी और पुलिस प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने दिल्ली में महिला पत्रकारों को परेशान किए जाने की घटना की कड़े शब्दों में निंदा की।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और विवाद का घटनाक्रम
यह पूरा घटनाक्रम 3 अक्टूबर को राजधानी दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है, जहाँ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और अन्य संगठनों ने SIR प्रक्रिया के विरोध में प्रदर्शन किया था।
- प्रदर्शनकारियों की कार्रवाई: जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण और AISA अध्यक्ष नेहा बोरा समेत कई प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड्स पार करने का प्रयास किया।
- पुलिस की कार्रवाई: डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) नेहा यादव के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
- गंभीर आरोप: हिरासत की कार्रवाई के दौरान खुद को पत्रकार बताने वाली तीन महिलाओं ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर उनके साथ बदसलूकी और यौन उत्पीड़न किया।
30 सितंबर को भी INDIA गठबंधन के घटकों ने एकजुट होकर चुनाव आयोग के सामने यही तीन मांगें रखी थीं, जिससे राजनीतिक गतिरोध और गहरा गया है।







