नई दिल्ली. देश में नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन और चुनाव आयोग (EC) की कार्यप्रणाली को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने नए वोटरों के पंजीकरण के लिए चुनाव आयोग द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले किसी भी संशोधित या बदले हुए ‘फॉर्म-6’ को मंज़ूरी नहीं दी है।
सुप्रीम कोर्ट की यह सख्त टिप्पणी 2025 में फॉर्म-6 में जोड़े गए एक अतिरिक्त दस्तावेज़ (एनेक्ज़र) को लेकर उठे विवाद के बाद आई है। कोर्ट ने साफ किया है कि वह रिकॉर्ड्स की जांच करके यह पता लगाएगा कि यह बदलाव आखिर किसके स्तर पर किए गए थे।
क्या है फॉर्म-6 और एनेक्ज़र D से जुड़ा पूरा विवाद?
इस पूरे विवाद की जड़ ऑनलाइन वोटर रजिस्ट्रेशन प्रोसेस में शामिल की गई एक अतिरिक्त घोषणा (Declaration) है। इस प्रक्रिया के तहत नए वोटरों से विशेष पुनरीक्षण अभ्यास (SIR) के दौरान यह मांग की गई थी कि वे खुद को, अपने माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी को पिछली वोटर लिस्ट से जोड़ने वाली जानकारी दें।
विवाद से जुड़े प्रमुख बिंदु:
- जून 2025 का SIR आदेश: चुनाव आयोग ने SIR अभ्यास के तहत नए पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 के साथ एनेक्ज़र ‘D’ जोड़कर अतिरिक्त घोषणा पत्र मांगना शुरू किया।
- जुलाई 2026 की ऑनलाइन अनिवार्यता: जुलाई 2026 में ऑनलाइन आवेदन के दौरान इस डिक्लेरेशन को अनिवार्य कर दिया गया।
- चुनाव आयुक्तों की आपत्ति: रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस बदलाव पर चिंता जताई थी। उनका मानना था कि ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ़ इलेक्टर्स रूल्स, 1960’ के तहत फॉर्म-6 एक वैधानिक फॉर्म है और नियमों में औपचारिक संशोधन किए बिना इसे बदला नहीं जा सकता।
- चुनाव आयोग का पक्ष: EC का दावा है कि मूल फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं हुआ है, बल्कि यह केवल SIR प्रक्रिया के लिए एक अतिरिक्त घोषणा पत्र था जिसे कोर्ट की हरी झंडी मिली हुई थी।
CEC पर एकतरफा फैसले के आरोप और सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुनवाई के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाए गए कि उन्होंने बाकी दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना यह फैसला एकतरफा लिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने या कोई interim (अंतरिम) आदेश देने से फिलहाल इनकार कर दिया।
बेंच ने स्पष्ट किया कि जब तक चुनाव आयोग का आधिकारिक जवाब सामने नहीं आता, तब तक कोर्ट यही मानेगा कि फैसले कानून के दायरे में रहकर लिए गए थे। CJI कांत ने टिप्पणी की, “रिपोर्ट सही हो सकती है या गलत, लेकिन हम सिर्फ मीडिया रिपोर्ट के आधार पर आदेश नहीं दे सकते। हमें चुनाव आयोग के जवाब का इंतजार करना होगा।”
फॉर्म-6 विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के रुख का संक्षिप्त विवरण
| विषय / पहलू | सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणी / स्थिति |
| संशोधित फॉर्म-6 की मंज़ूरी | CJI ने स्पष्ट किया कि कोर्ट ने किसी भी बदले हुए फॉर्म-6 को मंज़ूरी नहीं दी है। |
| बदलावों की जांच | सुप्रीम कोर्ट रिकॉर्ड मंगाकर यह जांच करेगा कि फॉर्म-6 में बदलाव किसने और कैसे किए। |
| CEC को सस्पेंड करने की मांग | अंतरिम आदेश देने से इनकार; चुनाव आयोग के आधिकारिक जवाब का इंतजार। |
| 27 मई का पिछला फैसला | कोर्ट ने माना था कि EC के पास फ्रेमवर्क बनाने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार “असीमित नहीं” है। |
27 मई के फैसले में कोर्ट ने क्या कहा था?
सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई को बिहार SIR प्रक्रिया पर दिए अपने फैसले में चुनाव आयोग को विशेष पुनरीक्षण कराने और आवश्यक डॉक्यूमेंटेशन फ्रेमवर्क तैयार करने का अधिकार दिया था। हालांकि, कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया था कि EC का यह अधिकार “असीमित” नहीं है।
कानूनी नियमों और फॉर्म-6 में किसी भी तरह के फेरबदल का सीधे तौर पर SIR के मुख्य उद्देश्य से तार्किक संबंध (Logical Connection) होना अनिवार्य है।







