नई दिल्ली में आयोजित इंडियन मोबाइल कांग्रेस 2026 के 10वें एडिशन का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के टेलीकॉम सेक्टर और डिजिटल कनेक्टिविटी में हुई अभूतपूर्व प्रगति की जमकर तारीफ़ की। भारत में डिजिटल क्रांति के सफर को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि 2022 में इसी मंच से 5G की शुरुआत हुई थी, जो आज 5.5 लाख से भी ज़्यादा बेस स्टेशनों तक पहुँच चुकी है। 2024 में इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन के जरिए ग्लोबल स्टैंडर्ड्स पर मंथन हुआ और मेक इन इंडिया के संकल्प के साथ भारत आज वैश्विक पटल पर एक सशक्त डिजिटल शक्ति बनकर उभरा है।
संकट से समाधान तक: कैसे डिजिटल भारत ने बदली आम जनजीवन की तस्वीर
पीएम मोदी ने टेलीकॉम नेटवर्क के उस दौर को याद किया जब 2020 के कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान डिजिटल कनेक्टिविटी देश की जीवनरेखा बनी। इसी नेटवर्क के बूते बच्चों की पढ़ाई बिना रुके जारी रही, लोग अपनों से जुड़े रहे और रिमोट वर्क का नया मॉडल सफलतापूर्वक स्थापित हुआ।
इतना ही नहीं, इस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ने पारदर्शी गवर्नेंस को भी नई दिशा दी है:
- सीधा आर्थिक लाभ: PM-KISAN सम्मान निधि जैसी योजनाओं का पैसा सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचता है और इसकी पल-पल की जानकारी उनके मोबाइल पर एसएमएस के जरिए तुरंत मिल जाती है।
- समय की बचत: स्मार्टफ़ोन अब केवल कॉलिंग या मैसेजिंग का साधन न रहकर सेवाओं को तेज़ी से हासिल करने का सशक्त माध्यम बन चुका है, जिससे आम जनता को लंबी लाइनों और इंतज़ार से मुक्ति मिली है।
- सस्ता डेटा और नेटवर्क विस्तार: सरकार का मुख्य ध्यान अब दूर-दराज़ के क्षेत्रों में नए मोबाइल टावर लगाने और ऑप्टिकल फ़ाइबर का जाल बिछाने पर है, ताकि हर नागरिक को किफ़ायती दरों पर हाई-स्पीड इंटरनेट मिल सके।
गेमिंग, कंटेंट क्रिएशन और OTT: छोटे शहरों से उभरती नई डिजिटल इकॉनमी
भारत में डिजिटल क्रांति का दायरा अब सिर्फ सूचनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोज़गार और एंटरटेनमेंट का नया हब बन चुका है।
- 50 करोड़ से ज़्यादा गेमर्स: देश में आज 50 करोड़ से अधिक लोग गेमिंग इकोसिस्टम से जुड़े हैं, जिनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी टियर-2 और टियर-3 शहरों की है।
- मोबाइल बना स्टूडियो: युवा अब केवल गेम खेल नहीं रहे, बल्कि अपने स्मार्टफ़ोन को गेमिंग कंसोल और क्रिएटिव स्टूडियो में बदलकर नए बिज़नेस खड़े कर रहे हैं।
- क्षेत्रीय भाषाओं का दबदबा: OTT प्लेटफ़ॉर्म्स पर क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेंट की मांग तेज़ी से बढ़ी है, जिससे स्थानीय कलाकारों और क्रिएटर्स को बड़ा मंच मिला है।
- 1,000 करोड़ का उद्योग: भारत का कंटेंट-क्रिएशन सेक्टर लगातार विस्तार करते हुए लगभग 1,000 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुँच गया है।
सुरक्षित डिजिटल भारत: साइबर क्राइम और डीपफेक के खिलाफ बढ़ती जागरूकता
तकनीक के बढ़ते प्रयोग के साथ-साथ सुरक्षा के मोर्चे पर भी देश सजग हुआ है। प्रधानमंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि आज के भारतीय नागरिक डिजिटल खतरों को लेकर पहले से कहीं अधिक सतर्क हैं। डीपफेक, फेक कंटेंट और फ़्रॉड मैसेजेस के प्रति आम जनता की बढ़ती जागरूकता एक सुरक्षित और ज़िम्मेदार डिजिटल इकोसिस्टम के निर्माण में अहम भूमिका निभा रही है।









