नई दिल्ली. पंजाब की सियासत में सोमवार को उस समय बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया, जब पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान के दफ्तर और उनके करीबियों से जुड़े भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। यह कड़ा रुख अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पत्रों पर पंजाब पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई न किए जाने के बाद अपनाया है।
ED के खुलासे: ट्रांसफर-पोस्टिंग और CLU में बड़े पैमाने पर धांधली
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) को तीन अलग-अलग पत्र भेजकर राज्य में चल रहे भ्रष्टाचार के एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा किया था। एजेंसी की जांच में सामने आया कि:
- ट्रांसफर और पोस्टिंग का खेल: सरकारी नौकरियों में तबादलों और नियुक्तियों को प्रभावित करने के लिए निजी लोगों का एक पूरा सिंडिकेट काम कर रहा था।
- CLU मंज़ूरी में अनियमितताएं: ज़मीन के इस्तेमाल में बदलाव (Change of Land Use – CLU) की अनुमति दिलाने के नाम पर फर्जी सहमति पत्र (Fake Consent Letters) का इस्तेमाल किया गया।
- सीएम दफ्तर से तार: ED की जांच एक हाउसिंग सोसाइटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले के दौरान शुरू हुई थी, जिसमें पंजाब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से जुड़े लोगों की संदिग्ध भूमिका उजागर हुई। एजेंसी ने मुख्यमंत्री के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) राजबीर घुमन का नाम भी इस मामले में शामिल किया था।
पुलिस की चुप्पी के बाद हाई कोर्ट में पहुंची जनहित याचिका (PIL)
ED द्वारा नामजद आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग के बावजूद जब पंजाब पुलिस ने इन पत्रों पर कोई संज्ञान नहीं लिया, तो मामला अदालत की चौखट पर पहुंच गया।
वकील निखिल सराफ ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की। याचिका में पंजाब पुलिस की कथित निष्क्रियता और ढुलमुल रवैये पर सवाल उठाते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने निष्पक्ष जांच के लिए पूरा केस CBI के हवाले कर दिया।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खारिज किए आरोप
इस अदालती फैसले और ED के दावों के बाद राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। हालांकि, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
मुख्यमंत्री मान का कहना है कि उनकी सरकार के खिलाफ लगाए जा रहे इन दावों में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है और यह केवल सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है। उन्होंने इन आरोपों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए इन्हें पूरी तरह से बेबुनियाद करार दिया है।










