आयुष्मान कार्ड के बावजूद वसूले ₹87,300! श्री महावीर हॉस्पिटल पर गिरी गाज, एक महीने के लिए लाइसेंस सस्पेंड

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रायपुर. न्यूरो सर्जरी के दौरान चिकित्सकीय प्रक्रियाओं में खामियां और आयुष्मान योजना के तहत अनियमितता सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने श्री महावीर हॉस्पिटल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। अस्पताल का लाइसेंस 17 अक्टूबर से 16 नवंबर 2026 तक एक महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है। वहीं, आयुष्मान भारत योजना और खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत अस्पताल का पंजीयन तीन महीने के लिए निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

मेडिकल लापरवाही की शिकायत के बाद हुई जांच

अंबिकापुर स्थित श्री महावीर हॉस्पिटल के खिलाफ मृण्मयी पाण्डेय ने गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अस्पताल ने मरीज की सीटी स्कैन रिपोर्ट, एक्स-रे और रेफरल एवं डेथ समरी जैसे महत्वपूर्ण मेडिकल दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। शिकायतकर्ता ने इन दस्तावेजों को छिपाने या नष्ट करने की मंशा होने का भी आरोप लगाया था।

इसके अलावा, शिकायत में आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मरीज के परिजनों से लाखों रुपये वसूलने और उचित इलाज नहीं मिलने के कारण मरीज की मृत्यु होने का आरोप लगाया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, अंबिकापुर के माध्यम से जांच टीम गठित की गई। जांच के बाद प्रस्तुत रिपोर्ट और अस्पताल के स्पष्टीकरण का परीक्षण किया गया, जिसके आधार पर कार्रवाई का निर्णय लिया गया।

न्यूरो सर्जरी की सुविधा और डॉक्टर के पंजीयन पर उठे सवाल

जांच में सामने आया कि मरीज की मस्तिष्क संबंधी न्यूरो सर्जरी करने वाले चिकित्सक का नाम अस्पताल के पंजीयन दस्तावेजों में दर्ज नहीं था। साथ ही, अस्पताल के पंजीयन में न्यूरो सर्जरी जैसी उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा का उल्लेख भी नहीं पाया गया।

अस्पताल प्रबंधन ने अपने जवाब में कहा कि मरीज का इलाज अन्य डॉक्टरों की टीम ने किया था। हालांकि, जांच में यह बात सामने आई कि नर्सिंग होम एक्ट के तहत अस्पताल के संचालन की जिम्मेदारी उसके प्रोप्राइटर की होती है। स्वास्थ्य विभाग को संबंधित चिकित्सकीय सेवाएं शुरू करने से पहले सूचना दिए जाने के प्रमाण भी नहीं मिले।

जांच रिपोर्ट में मरीज को दूसरे अस्पताल में रेफर करने की प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किए जाने की बात भी सामने आई। इन कमियों को नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन से जोड़कर देखा गया।

इस मामले में आयुष्मान योजना के तहत इलाज के भुगतान को लेकर भी गंभीर अनियमितता सामने आई। अस्पताल के दस्तावेजों के अनुसार, मरीज के इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पूरी राशि बुक की गई थी। इसके बावजूद मरीज के परिजनों से अतिरिक्त रूप से 87,300 रुपये लिए गए।

स्वास्थ्य विभाग ने इस राशि को अवैध रूप से वसूली गई रकम माना है और इसे मरीज के परिजनों को वापस करने के निर्देश दिए हैं।

विभाग के अनुसार, इससे पहले भी श्री महावीर हॉस्पिटल के खिलाफ मरीज से निर्धारित राशि से अधिक पैसे लेने की शिकायत मिली थी। उस समय अस्पताल को कड़ी चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद दोबारा अनियमितता सामने आने के बाद विभाग ने मामले में सख्त कदम उठाया।

नर्सिंग होम एक्ट के तहत एक महीने तक बंद रहेंगी पंजीकृत सेवाएं

जांच में सामने आई कमियों और नियमों के उल्लंघन को देखते हुए श्री महावीर हॉस्पिटल का लाइसेंस/पंजीयन 17 अक्टूबर 2026 से 16 नवंबर 2026 तक एक महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है।

इसके साथ ही आयुष्मान योजना के तहत पाई गई अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल का पंजीयन आगामी तीन महीने के लिए निलंबित करने के संबंध में शासन को प्रतिवेदन भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इस प्रक्रिया में खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना और आयुष्मान योजना के तहत अस्पताल के पंजीयन पर कार्रवाई प्रस्तावित है।

स्वास्थ्य विभाग ने क्यों लिया सख्त फैसला?

इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के पीछे तीन प्रमुख बिंदु सामने आए हैं:

  • चिकित्सकीय प्रक्रियाओं में खामियां: न्यूरो सर्जरी करने वाले डॉक्टर का नाम और संबंधित सुविधा अस्पताल के पंजीयन दस्तावेजों में दर्ज नहीं होना।
  • रेफरल प्रक्रिया में लापरवाही: मरीज को दूसरे अस्पताल में भेजने की निर्धारित प्रक्रिया का सही पालन नहीं किया जाना।
  • आयुष्मान योजना में वित्तीय अनियमितता: योजना के तहत राशि बुक होने के बावजूद परिजनों से 87,300 रुपये अतिरिक्त लेना।

जांच रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने इसे नर्सिंग होम एक्ट के उल्लंघन और आयुष्मान योजना के नियमों के पालन में गंभीर लापरवाही का मामला माना है। खबरें पढ़ने के लिए babapost.in पर विजिट करें।

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