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सीजफायर के बाद भी लेबनान पर इजराइल के हमले

On: April 9, 2026
US Iran ceasefire impact on Lebanon
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US Iran ceasefire impact on Lebanon: मिडिल ईस्ट में पिछले 40 दिनों से जारी संघर्ष के बीच जब अमेरिका की पहल पर सीजफायर की घोषणा हुई, तब पूरी दुनिया को लगा कि अब हालात सामान्य होने की दिशा में बढ़ेंगे। लेकिन यह राहत ज्यादा देर तक कायम नहीं रह सकी। सीजफायर के महज 24 घंटे के भीतर ही हालात फिर बिगड़ गए, जब इजराइल ने लेबनान पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू कर दिए। इन हमलों ने न सिर्फ क्षेत्रीय शांति को झटका दिया, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी।

US Iran ceasefire impact on Lebanon
US Iran ceasefire impact on Lebanon

10 मिनट में 100 हमले: क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट्स के अनुसार, इजराइल ने बेहद कम समय में लेबनान के विभिन्न इलाकों पर करीब 100 मिसाइलें दागीं। यह हमला इतनी तेजी से हुआ कि स्थानीय प्रशासन को संभलने का मौका तक नहीं मिला। इस हमले में सैकड़ों लोगों के मारे जाने की खबर है, जिससे मानवीय संकट और गहरा गया है।

इजराइल का कहना है कि लेबनान में हिज़्बुल्लाह सक्रिय है, जो उसकी सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है। इसी वजह से वह लेबनान को सीजफायर समझौते का हिस्सा नहीं मानता।

अमेरिका का रुख: लेबनान सीजफायर का हिस्सा नहीं

अमेरिका की ओर से भी इस मुद्दे पर स्पष्ट बयान सामने आया है। जेडी वेंस ने साफ कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जो संघर्ष-विराम हुआ है, उसमें लेबनान शामिल नहीं है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न तो वॉशिंगटन और न ही इजराइल ने लेबनान को इस समझौते का हिस्सा बनाने पर सहमति दी थी। यह बयान उस समय आया जब कुछ देशों ने दावा किया था कि लेबनान को भी इस सीजफायर में शामिल किया गया है।

ट्रंप का बयान: हिज्बुल्लाह मुख्य वजह

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि लेबनान को सीजफायर समझौते में शामिल नहीं किया गया क्योंकि वहां हिज्बुल्लाह सक्रिय है।

ट्रंप के अनुसार, यह संघर्ष अलग प्रकृति का है और इसे उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में इस स्थिति का समाधान खोज लिया जाएगा।

नेतन्याहू का रुख: शर्तों के साथ समर्थन

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के फैसले का समर्थन किया है, जिसमें ईरान के खिलाफ हमले दो हफ्तों के लिए रोकने की बात कही गई है।

हालांकि, उन्होंने यह समर्थन कुछ शर्तों के साथ दिया है। नेतन्याहू ने कहा कि ईरान को तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना होगा और क्षेत्र में सभी प्रकार के हमलों को रोकना होगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह संघर्ष-विराम सीमित दायरे में है और इसमें लेबनान शामिल नहीं है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ता संकट

मिडिल ईस्ट पहले से ही राजनीतिक और सैन्य तनाव का केंद्र रहा है। इस ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना कितना चुनौतीपूर्ण है।

लेबनान जैसे छोटे देश पर लगातार हमले न केवल वहां के नागरिकों के लिए संकट पैदा कर रहे हैं, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की स्थिरता को भी प्रभावित कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की सैन्य कार्रवाइयां जारी रहीं, तो यह संघर्ष और बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।

क्या आगे बढ़ेगा संघर्ष या मिलेगा समाधान?

वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि आने वाले दिनों में हालात कैसे बदलेंगे। एक ओर अमेरिका और इजराइल रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले ले रहे हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय संगठन और देश अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

सीजफायर के बावजूद अगर हमले जारी रहते हैं, तो यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की विफलता मानी जाएगी। ऐसे में वैश्विक समुदाय की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

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